‌‘ला क्लासे' फैशन शो में दिखा ‌‘शाश्वत भारत' का भव्य स्वरूप

सूर्यदत्त इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी का आयोजन; परंपरा, प्रकृति और आधुनिक डिजाइन का अनूठा संगम

    24-Feb-2026
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पुणे, 23 फरवरी (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)
हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और स्वदेशी हस्तकलाओं का संरक्षण कर उन्हें आधुनिक रूप में विश्व के सामने प्रस्तुत करना ही वास्तव में ‌‘सस्टेनेबल भारत' के सपने को साकार करेगा. प्रो. डॉ. संजय बी. चोरडिया, संस्थापक अध्यक्ष, सूर्यदत्त ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स
 
 भारतीय संस्कृति, परंपरा और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना सतत भविष्य के लिए प्रत्येक व्यक्ति की प्राथमिक जिम्मेदारी है. हमारी इस समृद्ध परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए उसे आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत करना आवश्यक है, ऐसा प्रतिपादन सूर्यदत्त समूह के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. डॉ. संजय बी. चोरडिया ने किया. सूर्यदत्त इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (SIFT) द्वारा आयोजित वार्षिक फैशन शो ‌‘ला क्लासे 2026' हाल ही में अत्यंत भव्य वातावरण में संपन्न हुआ. ‌‘सस्टेनेबल भारत' की संकल्पना पर आधारित इस शो में विद्यार्थियों ने खादी, पैठणी, कलमकारी और प्राकृतिक रंगों का उपयोग करते हुए छह विविध थीमें प्रस्तुत कीं. इनमें ‌‘धरोहर' और ‌‘रंगरेज' थीम ने संयुक्त रूप से प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि ‌‘हस्तकला' थीम को द्वितीय स्थान मिला. कार्यक्रम में संस्थापक अध्यक्ष प्रो. डॉ. संजय बी. चोरडिया, सह-उपाध्यक्ष श्रीमती स्नेहल नवलखा, प्राचार्या डॉ. सायली पांडे, संदेश नवलखा, शीतल जैन, रंजना सिंह तथा विभिन्न विभागों के प्रमुख, अभिभावक और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित थे. इस फैशन शो में विद्यार्थियों ने छह सृजनात्मक अनुक्रमों (सीक्वेंस) के माध्यम से भारतीय वस्त्रकला की यात्रा प्रस्तुत की. इसमें खादी, ऑर्गेनिक कॉटन, पैठणी और बनारसी जैसे पारंपरिक वस्त्रों को आधुनिक डिजाइनों के साथ संयोजित किया गया. ‌‘भूमि और तंतु' से प्रारंभ हुई यह यात्रा ‌‘धरोहर', ‌‘हस्तकला' और ‌‘रंगरेज' जैसी थीम से होती हुई ‌‘मिट्टी एवं विविधता' पर संपन्न हुई. विद्यार्थियों ने प्राकृतिक रंगों, अपशिष्ट कपड़ों के पुनः उपयोग और हस्तनिर्मित कढ़ाई पर विशेष जोर देकर सतत फैशन का महत्व प्रभावी रूप से रेखांकित किया. कार्यक्रम की शुरुआत ‌‘भूमि और तंतु' से हुई, जिसमें खादी और ऑर्गेनिक कॉटन जैसे प्राकृतिक रेशों के माध्यम से धरती से जुड़ाव को दर्शाया गया. इसके बाद ‌‘सौर स्पिंडल/सौर शक्ति' के माध्यम से सूर्य ऊर्जा की प्रेरणा प्रस्तुत की गई, जबकि ‌‘हस्तकला' में भारतीय कारीगरों के कौशल की झलक रैंप पर दिखाई दी. ‌‘धरोहर' में पैठणी, बनारसी और कांजीवरम जैसे पारंपरिक हस्तकरघा वस्त्रों को आधुनिक रूप देकर भारतीय विरासत को संरक्षित किया गया. ‌‘रंगरेज' में प्राकृतिक रंगों की छटा बिखेरी गई, जबकि अंतिम सत्र ‌‘मिट्टी और विविधता' में अपशिष्ट कपड़ों से निर्मित विशिष्ट डिजाइनों द्वारा ‌‘जीरो वेस्ट' फैशन का आदर्श प्रस्तुत किया गया. प्रत्येक प्रस्तुति के माध्यम से विद्यार्थियों ने भारतीय वस्त्रकला के गौरवशाली इतिहास और भविष्य के सतत फैशन की दिशा को स्पष्ट किया. कार्यक्रम का विशेष आकर्षण सूर्यदत्त नेशनल स्कूल के नन्हें विद्यार्थियों का रैंप वॉक तथा सूर्यदत्त समूह की उपाध्यक्ष श्रीमती सुषमा चोरडिया की प्रस्तुति रही. श्रीमती चोरडिया ने पुरानी पैठणी साड़ी को अपसाइकिल कर तैयार किया गया आकर्षक फ्लेयर्ड परिधान पहनकर सतत फैशन को सशक्त समर्थन दिया. इस समारोह में संस्थापक अध्यक्ष प्रो. डॉ. संजय बी. चोरडिया, श्रीमती सुषमा चोरडिया, श्रीमती स्नेहल नवलखा सहित विभिन्न विभागों के प्रमुख, अभिभावक और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित थे. कार्यक्रम का मूल्यांकन फैशन डिजाइनर संदेश नवलखा, शीतल जैन और रंजना सिंह की विशेषज्ञ समिति द्वारा किया गया. निर्णायक मंडल ने ‌‘धरोहर' और ‌‘रंगरेज' को संयुक्त रूप से प्रथम तथा ‌‘हस्तकला' को द्वितीय पुरस्कार देकर सम्मानित किया. व्यक्तिगत श्रेणी में ईेशरी आंबेकर (भूमि और तंतु), लीना चौधरी (सूर्यशक्ति), अपूर्वा माने (धरोहर), शुभांगी कराले (हस्तकला), अंजली सोलट (रंगरेज) और श्रेया इंगुलकर (मिट्टी एवं विविधता) ने अपनी-अपनी थीम में ‌‘श्रेष्ठ डिजाइनर' का सम्मान प्राप्त किया. साथ ही ‌‘अपसाइकिल टू रनवे' अंतरमहाविद्यालयीन प्रतियोगिता में गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक, पुणे की टीम विजेता रहीं, जबकि वेदिका सुपेकर ने सर्वश्रेष्ठ डिजाइनर पुरस्कार जीता. VLCC ने मेकअप पार्टनर के रूप में सहयोग किया, जबकि कार्यक्रम का कुशल संचालन अमृता पानसे ने किया. संपूर्ण आयोजन का तकनीकी नियोजन और क्रियान्वयन प्राचार्या डॉ. सायली पांडे के मार्गदर्शन में किया गया. विद्यार्थियों को प्रो. मोनिका कर्वे और प्रो. शिखा शारदा का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ तथा शो की कोरियोग्राफी भी प्रो. शिखा शारदा ने सफलतापूर्वक संभाली. कार्यक्रम का सुव्यवस्थित संयोजन प्रो. अखिला मुरमट्टी, प्रो. खुशबू गजबे और छाया माने ने किया, जबकि धनश्री पिसे ने प्रशासनिक सहयोग प्रदान किया. निर्णायक मंडल ने विद्यार्थियों की डिजाइनों में बारीकी और सतत फैशन की अभिनव प्रस्तुति की विशेष सराहना की. अंत में प्राचार्या डॉ. सायली पांडे ने उपस्थित सभी लोगों का आभार व्यक्त किया और ‌‘ला क्लासे 2026' का यह भव्य समारोह सफलतापूर्वक संपन्न हुआ. थीम-6, भूमि और तंतु ला क्लासे-2026 में प्राकृतिक रंगों, टाई एंड डाई तकनीक और सस्टेनेबल सोच के प्रस्तुतीकरण से प्रथम पुरस्कार हासिल करने वाली विजेता टीम ‌‘रंगरेज'. चित्र में बाएं से संदेश नवलखा, सानिका कुलकर्णी, प्रो.डॉ. संजय बी.चोरडिया, सुषमा चोरडिया, अंजली सोलाट, वैभवी तापकीर, डॉ.सायली पांडे, श्रुति गावडे, सौ.शीतल जैन और सानिया सैयद इस गौरवशाली क्षण के साक्षी बने.