गुजर निंबालकरवाड़ी ग्रामपंचायत के बैंक खाते से लगभग 82 लाख रुपये का भुगतान बेयरर चेक के माध्यम से निकाले जाने का मामला सामने आया है. शिवसेना के समन्वयक वसंत माेरे ने आराेप लगाया है कि तत्कालीन सरपंच तथा प्रभाग क्रमांक 38 के नवनिर्वाचित नगरसेवक व्यंकाेजी खाेपड़े और ग्रामसेवक विशाल निकम ने अधिकार न हाेते हुए भी ठेकेदार के यहां काम करने वाले कर्मचारियाें के नाम पर चेक निकालकर राशि का दुरुपयाेग किया. इस संबंध में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और मनपा आयुक्त काे ज्ञापन देकर मामले की गहन जांच की मांग की गई है.
यह जानकारी वसंत माेरे ने पत्रकार परिषद में दी.माेरे ने बताया कि यह कथित अनियमितता गुजर निंबालकरवाड़ी के मनपा में शामिल हाेने से पहले वर्ष 2017 से 2021 के बीच हुई. ग्रामपंचायत काे जिला परिषद से अनुदान और कर राजस्व के रूप में लगभग 3 कराेड़ 50 लाख रुपये प्राप्त हुए थे. यह राशि पुणे जिला मध्यवर्ती बैंक में ग्रामपंचायत के खाते में जमा थी.खाेपड़े और निकम काे बेयरर चेक जारी करने का काेई अधिकार नहीं था, फिर भी उन्हाेंने विश्वनाथ लहाडे, संताेष बाजीराव गायकवाड़ और पाेपट लाेखंडे जैसे ठेका पद्धति से मजदूरी करने वाले कर्मचारियाें के नाम पर चेक निकाले.इसके अतिरिक्त ज्ञानदा अर्थमूवर्स नामक संस्था काे भी 11 लाख 51 हजार रुपये का भुगतान चेक के माध्यम से किया गया.
माेरे का आराेप है कि ज्ञानदा अर्थमूवर्स व्यंकाेजी खाेपड़े की ही संस्था है और इस प्रकार उन्हाेंने जनप्रतिनिधि कानून का उल्लंघन किया है. इस मामले में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी से शिकायत की गई है. उन्हाेंने मामले की गंभीरता काे देखते हुए जांच का आश्वासन दिया है.मनपा आयुक्त से भी शिकायत कर जांच की मांग की गई है.माेरे ने कहा कि जब ग्रामपंचायत का अभिलेख मनपा ने अपने कब्जे में लिया, उस समय खाते में केवल 16 लाख रुपये शेष थे. पूर्व के दस्तावेजाें और लेनदेन की जांच कर व्यंकाेजी खाेपड़े और विशाल निकम पर कार्रवाई की जानी चाहिए.ग्रामपंचायत निधि में कथित अनियमितता करने वाले खाेपड़े काे बजट में काेई निधि न दी जाए, अन्यथा मनपा निधि में भी अनियमितता की आशंका है. इस संबंध में आयुक्त, महापाैर, सभागृह नेता और सांसद से भी मांग की जाएगी.