जिन्हें हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत हाे, आदिवासी उन्हें सूरजमुखी के बीजाें से प्राप्त तेल काे अपनाने की सलाह देते हैं. इसकी पत्तियाें का रस निकाल कर मलेरिया के बुखार आने पर शरीर पर लेपित किया जाता है, पातालकाेट े आदिवासियाें का मानना है कि यह रस शरीर के तापमान काे नियंत्रित करने में मदद करता है. उल्टी और जी मिचलाना जैसे विकाराें में सूरजमुखी के बीजाें का तेल (2 बूंद) नाक में डालने सआराम मिलता है. डाँग, गुजरात के हर्बल जानकार सूरजमुखी के बीजाें के तेल के साथ कुछ मात्रा इलायची के दानाें के चूर्ण काे मिलाकर नाक में डालते है ताकि उल्टी हाेना बंद हाे जाए.
सूरजमुखी कीपत्तियाें काे इसी के तेल के साथ कुचला जाए और बवासीर के राेगी काे बाह्यरूप से लेपित किया जाए ताे आराम मिलता है. अपचन और पेट में गड़बड़ी की शिकायत हाेने पर गर्म दूध में सूरजमुखी का तेल (4-5 बूंदें) डाल दी जाए और सेवन करें.
शारीरिक दुर्बलता में सूरजमुखी की पत्तियाें का रस बड़ा गुणकारी है, लगभग पांच पत्तियां लेकर 100 मिली पानी में तब तक उबाले जब तक कि यह आधा शेष बचे, और िफर सेवन करें. पेशाब की दिक्कत में, इसके बीजाें (एक चम्मच) काे कुचल कर गुनगुने पानी के साथ पीना चाहिए, पेशाब का आना नियमित और निरंतर हाे जाता है.