अस्थायी रेखांकन के कारण मनपा की इन्कम घटी

    26-Feb-2026
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अस्थायी रेखांकन करने के निर्णय के कारण पुणे मनपा के निर्माण विभाग काे बड़ा आर्थिक झटका लगा है. भूमि अभिलेख विभाग द्वारा वहिवाट की माप प्रक्रिया बंद कर स्थानीय स्वशासी संस्थाओं से अस्थायी रेखांकन स्वीकृत कराने की शर्त लगाए जाने के बाद निर्माण अनुमति की प्रक्रिया मंद हाे गई है. मनपा ने यह जिम्मेदारी अपने कार्यक्षेत्र में नहीं आने की स्पष्टता देने के कारण अनेक मापन लंबित रह गए हैं, परिणामस्वरूप अनुमति के लिए आने वाली परियाेजनाओं की संख्या घट गई है. इससे निर्माण विभाग के राजस्व काे लगभग एक हजार कराेड़ रुपये का झटका लगा है, ऐसी जानकारी अतिरिक्त आयुक्त पृथ्वीराज बी. पी. ने दी.महाराष्ट्र प्रादेशिक नियाेजन एवं नगररचना अधिनियम 1966 तथा एकीकृत विकास नियंत्रण एवं प्राेत्साहन नियमावली के अनुसार किसी भी विकास कार्य के लिए सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है.
 
किंतु शहराें की सीमा ें बड़े पैमाने पर अवैध भूमि विभाजन करना, जमीन की माप कर उसके आधार पर निर्माण अनुमति लेना और उससे अनाधिकृत इमारतें खड़ी हाेना, ऐसे प्रकाराें पर नियंत्रण रखने के लिए भूमि अभिलेख विभाग ने नए निर्देश जारी किए थे.
तत्कालीन भूमि अभिलेख संचालक डाॅ. सुहास दिवसे ने इस संबंध में परिपत्र जारी कर मनपा, नगरपालिका और स्थानीय नियाेजन प्राधिकरणाें से अस्थायी रेखांकन स्वीकृत करना अनिवार्य किया.इस प्रक्रिया का उद्देश्य अवैध क्रय विक्रय व्यवहार और अनाधिकृत निर्माण पर नियंत्रण रखना था. किंतु अस्थायी रेखांकन करना मनपा के कार्यक्षेत्र में नहीं आने की स्पष्टता देते हुए पुणे मनपा ने यह जिम्मेदारी स्वीकार करने से इनकार कर दिया. इसके कारण संबंधित मापन भूमि अभिलेख विभाग द्वारा रद्द किए जारहे हैं.
 
परिणामस्वरूप निर्माण अनुमति के लिए आने वाली परियाेजनाओं की संख्या उल्लेखनीय रूप से कम हाे गई है.इन घटनाक्रमाें के कारण मनपा के निर्माण विभाग के राजस्व पर बड़ा प्रभाव पड़ा है और लगभग एक हजार कराेड़ रुपये की संभावित आय घटने की जानकारी प्रशासन द्वारा दी गई है. इसलिए अस्थायी रेखांकन के संबंध में स्पष्ट नीतिगत निर्णय लेने की आवश्यकता उत्पन्न हाे गई है.
अन्यथा निर्माण अनुमति प्रक्रिया में और अधिक बाधाएं उत्पन्न हाेने की संभावना व्यक्त की जा रही है. पिछले वर्ष मनपा काे निर्माण अनुमति शुल्क से लगभग 2,700 कराेड़ का राजस्व प्राप्त हुआ था. इस वर्ष नए निर्माण में मंदी के कारण निर्माण अनुमति शुल्क के माध्यम से मनपा के काेष में केवल 1,685 कराेड़ रुपये जमा हुए हैं.