केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल और महाराष्ट्र प्रदूषण मंडल द्वारा प्रतिदिन 24 घंटे किए जाने वाले वायु गुणवत्ता निरीक्षण के आंकड़ाें के अनुसार पुणे में गतवर्ष 365 दिनाें में से केवल 76 दिन स्वास्थ्य के लिए अच्छे रहे.जबकि 102 दिन संताेषजनक, 109 दिन मध्यम प्रदूषण और 72 दिन स्वास्थ्य के लिए खतरनाक रहे. 6 दिन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक रहे. इस प्रकार कुल 187 दिन प्रदूषित रहे. बढ़ते वाहन, निर्माण कार्य और धूल ककारण प्रदूषण में वृद्धि हुई है और केवल वर्षा ऋतु में ही प्रदूषण कम हाेने का अनुभव हाे रहा है. इसलिए अब प्रदूषण पर वर्षा ऋतु ही उपाय है, इसके अतिरिक्त दिनाें का क्या करना. यह प्रश्न गंभीर हाे गया है.
पिछले कुछ दिनाें से पुणे शहर में निर्माण कार्याें की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ रही है. उपनगराें में धूल का साम्राज्य फैल गया है. धूलकणाें का श्वास पुणे निवासी ले रहे हैं, जिससे वे निरंतर राेगग्रस्त हाे रहे हैं. इस पर अब काेई उपाय संभव नहीं है. केवल वर्षा ऋतु में प्रदूषण कम हाे रहा है. पुणे मनपा भी इस पर कुछ नहीं कर पा रही है. उन्हाेंने वाहनाें से पानी का छिड़काव सड़काें पर करने का अविवेकी उपाय प्रारंभ किया है, उसका भी काेई लाभ नहीं हाे रहा है.पुणे में गतवर्ष प्रदूषण की स्थिति कैसी थी, इसका आंकड़ा और विश्लेषण पर्यावरण अध्येता तथा केंद्रीय पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के पूर्व सदस्य प्रा. सुरेश चाेपणे ने किया. उन्हाेंने इस संबंध में जानकारी दी.