धरती का तापमान कन्ट्राेल करने वाली ताकतें बेहद जटिल हैं

    27-Feb-2026
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हमारी पृथ्वी ने अपने लंबे इतिहास में जलवायु के कई चरम दाैर देखे हैं. कभी यह ठिठुरती हुई ‘आइसहाउस’ बन गई, ताे कभी तपते हुए ‘ग्रीनहाउस’ में तब्दील हाे गई.वैज्ञानिक लंबे समय से जलवायु के इन उतार-चढ़ावाें का सीधा संबंध वायुमंडल में माैजूद कार्बन डाइऑ्नसाइड की मात्रा से जाेड़ते आए हैं. लेकिन, ताजा शाेध ने इस धारणा काे नया माेड़ दे दिया है.अब यह पता चला है कि इस कार्बन का स्त्राेत और इसे नियंत्रित करने वाली ताकतें हमारी पुरानी साेच से कहीं अधिक जटिल हैं.हकीकत ताे यह है कि पृथ्वी की सतह पर टे्नटाेनिक प्लेटाें की हलचल जलवायु काे आकार देने में एक ऐसी बड़ी भूमिका निभाती है. जिसे अब तक नजरअंदाज किया गया था. कार्बन केवल उन जगहाें से नहीं निकलता, जहां प्लेटें आपस में टकराती हैं, बल्कि वे स्थान भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं. जहां ये प्लेटें एक दूसरे से दूर खिंचती हैं.
 
कम्युनिकेशंस, अर्थ एंड एन्वाॅयरमेंट जर्नल में प्र्रकाशित हमारा नया अध्ययन इस रहस्य से पर्दा उठाता है कि पिछले 54 कराेड़ वर्षाें में पृथ्वी की टे्नटाेन्निस प्लेटाें ने वैश्विक जलवायु काे गढ़ने में वास्तव में किस तरह मदद की है. जहां पृथ्वी की टे्नटाेनिक प्लेटें आपस में टकराती हैं, वहां ज्वालामुखियाें की लंबी श्रृंखलाएं बन जाती हैं, जिन्हें वाॅल्केनिक आ्नर्स (ज्वालामुखीय चाप) कहा जाता है. इन ज्वालामुखियाें से जुड़ी पिघलने की प्रक्रिया चट्टानाें के भीतर हजाराें वर्षाें से कैद कार्बन काे मु्नत कर देती है और उसे धरती की सतह पर ले आती है.ऐतिहासिक रूप से अब तक यही माना जाता रहा है कि वायुमंडल में कार्बन डाइऑ्नसाइड काे घाेलने के लिए मुख्य रूप से ये ज्वालामुखी ही जिम्मेदार थे.
 
लेकिन हमारा शाेध बताता है कि मध्य समुद्र की पर्वतमालाएं और महाद्वीपीय दरारें, यानी वे स्थान जहां टे्नटाेनिक प्लेटें एक- दूसरे से दूर फैलती हैं, पूरे भूगर्भीय समय के दाैरान पृथ्वी के कार्बन चक्र काे संचालित करने में कहीं अधिक निर्णायक भूमिका निभाती रही है. इसका मुख्य कारण यह है कि दुनिया के महासागर वायुमंडल से कार्बन डाइऑ्नसाइडकी विशाल मात्रा काे सीख लेते हैं और उसे समुद्र तट पर माैजूद कार्बन-समृद्ध चट्टानाें के भीतर जमा कर देते हैं.हजाराें वर्षाें में, यह प्रक्रिया समुद्र की गहराई में सैकड़ाें मीटर माेटी कार्बन-हम समृद्ध तलद्दट की परतें पैदा कर देती है. जैसे-जैसे ये चट्टानें टे्नटाेनिक प्लेटाें के साथ पूरी पृथ्वी पर घूमती हैं वे अंतत सबड्नशन जाेन से टकराती हैं. सबड्नशन जाेन वे जगहें हैं. जहां प्लेटें आपस में मिलती हैं. यहां पहुंचकर ये चट्टानें अपने भीतर दबे कार्बन डाइऑ्नसाइड के भंडार काे वापस वायुमंडल में मु्नतत कर देती हैं. इसे डीए कार्ब साइकिल गहरा कार्बन चक्र के रूप में जाना जाता है.
 
हम टे्नटाेनिक प्लेटाें पर जमा कार्बन की हलचल काे फिर से गढ़कर पिछले 54 कराेड़ वर्षाें की प्रमुख ग्रीनहाउस (गर्म) और आइसहाउस (ठंडी) जलवायु परिस्थितियाें की सटीक भविष्यवाणी करने में सफल रहे. ग्रीनहाउस काल के दाैरान, जब पृथ्वी अधिक गर्म थी, चट्टानाें में कैद हाेने वाले कार्बन की तुलना में वायुमंडल में अधिक कार्बन मु्नत हुआ. इसके विपरीत, आइसहाउस जलवायु के दाैरान, महासागराें में कार्बन जमा हाेने की प्रक्रिया हावी रही, जिससे वायुमंडल में कार्बन डाइऑ्नसाइड का स्तर गिर गया और वैश्विक शीतलन (कूलिंग) की शुरूआत हुई. हमारे अध्ययन का सबसे बड़ा निष्कर्ष यह है कि वायुमंडल में कार्बन डाइऑ्नसाइड काे नियंत्रित करने में गहरे समुद्र की तलछट की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है. जैसे-जैसे टे्नटाेनिक प्लेटें धीर-धीरे खिसकती हैं.
 
वे अपने साथ कार्बन समृद्ध तलछट ले जाती हैं, जाे अंतत: सबड्नशन की प्रक्रिया के माध्यम से पृथ्वी के गर्भ में वापस लाैट जाती हैं. हम यह स्पष्ट करते हैं कि यही प्रक्रिया यह तय करने वाला समसे बड़ा कारक है कि पृथ्वी ग्रीनहाउस (गर्म) अवस्था में रहेगी या आइसहाउस (ठंडी) स्थिति में.ऐतिहासिक रूप से, ज्वालामुखीय चापाें से निकलने वाले कार्बन काे वायुमंडल में कार्बन डाइऑ्नसाइड के सबसे बड़े स्त्राेताें में से एक माना जाता रहा है. लेकिन, हमारे शाेध के अनुसार यह प्रक्रिया पिछले 12 कराेड़ वर्षाें में ही प्रभावी हुई है और इसका श्रेय जाता है. प्ले्निटक कैल्सीफायर्स काे. ये नन्हें समुद्री जीव फाइटाेप्लांकटन परिवार से ताल्लुक रखते हैं. जिनकी मुख्य खूबी घुले हुए कार्बन काे कैल्साइट में बदलना है. ये जीव वायुमंडलीय कार्बन की विशाल मात्रा काे साेखकर उसे समुद्र तल पर जमा हाेने वाली कार्बन-समृद्ध तलछट में दलने के लिए जिम्मेदार हैं.
 
प्ले्निटक कैल्सीफायर्स का विकास लगभग 20 कराेड़ साल पहले हुआ था और ये करीब 15 कराेड़ साल पहले दुनिया के महासागराें में फैल गए थे. इसलिए, पिछले 12 कराेड़ वर्षाें में ज्वालामुखीय चापाें से वायुमंडल में जाे जारी मात्रा में कार्बन निकला है, वह दरअसल इन्हीं नन्हे जीवाें द्वारा बनाई गई कार्बन समृद्ध तलछट का परिणाम है.इससे पहले के कालखंड में हमने पाया कि वायुमंडलीय कार्बन डाइऑ्नसाइड में मुख्य याेगदान मध्य-समुद्र की पर्वतमालाओं ऐर महाद्वीपीय दराराें, यानी वे क्षेत्र, जहां टे्नटाेनिक प्लेटें एक-दूसरे से दूर खिंचती हैं, उससे निकलने वाले कार्बन का था. हमारे ये निष्कर्ष इस बात पर एक नया नजरिया पेश करते हैं कि कैसे पृथ्वी की टे्नटाेनिक प्रक्रियाओं ने हमारी जलवायु काे गढ़ा है ओर भविष्य में भी वे इसे प्रभावित करती रहेंगी. ये नतीजे बताते हैं कि पृथ्वी की जलवायु केवल वायुमंडलीय कार्बन से ही संचालित नहीं हाेती. -डाइटमार मुलर