1000 कराेड़ की टै्नस चाेरी में बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के घर में छापेमारी से खलबली मच गई. बसपा विधायक के निवास स्थान से करीब 11 कराेड़ रुपये कैश मिले, इसके अलावा भारी मात्रा में जेवर व महंगी घड़ियां बरामद की. यूपी के साेनभद्र, काैशांबी व बलिया सहित 15 ठिकानाें पर एक साथ कार्रवाई से राजनीति गलियाराें में हड़कंप मच गया. आयकर अधिकारियाें ने कई फाइलें, इलेक्ट्राॅनिक डिवाइस सहित कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी बरामद किए हैं.बता दें कि इस पूरे मामले काे अंजाम देने के लिए आयकर अधिकारी बराती बनकर पहुंचे थे.बुधवार काे आयकर टीम ने एक साथ 15 से ज्यादा ठिकानाें पर छापेमारी की थी. सूत्राें के मुताबिक, आयकर विभाग 1000 कराेड़ रुपए की टैक्स चाेरी के मामले में फाइलें, इलेक्ट्राॅनिक डिवाइस और अन्य रिकाॅर्ड खंगाल रहा है.
हालांकि, आधिकारिक ताैर पर बरामदगी की पुष्टि नहीं की गई है. लखनऊ में बुधवार सुबह साढ़े सात बजे शुरू हुई कार्रवाई आज सुबह 9 बजे तक चली. करीब 50 अधिकारियाें ने तलाशी अभियान चलाया. इस दाैरान किसी के भी अंदर-बाहर जाने पर राेक लगा दीगई थी. विधायक और उनका परिवार घर के अंदर ही माैजूद था. वहीं, साेनभद्र में छात्रशक्ति कंस्ट्रक्शन के ऑफिस में 24 अधिकारी माैजूद रहे. गेट अंदर से बंद रहे.कंपनी के कर्मचारी भी भीतर रहे. रात में बाहर से खाना मंगवाकर अधिकारियाें ने भाेजन किया. बुधवार काे अफसर बाराती बनकर पहुंचे थे. उनकी गाड़ियाें पर शादी के पंपलेट लगे हुए थे. उमाशंकर सिंह, बलिया की रसड़ा विधानसभा से लगातार तीन बार विधायक हैं. उन्हें ब्लड कैंसर है. वे पिछले महीने ही अमेरिका से ब्लड चेंज कराकर लाैटे हैं. फिलहाल, लखनऊ आवास पर आइसाेलेशन में रहकर इलाज करा रहे हैं.
बसपा सुप्रीमाे मायावती ने इस छापेमारी काे मानवता के खिलाफ बताया था. याेगी सरकार में मंत्री दिनेश सिंह, उमाशंकर सिंह के समधी हैं. उन्हाेंने कहा- एक बेटी का बाप हाेने के नाते मैं उसके सुख-दुख में खड़ा रहूंगा. बेटी नहीं छाेड़ी जा सकती, राजनीति छाेड़ी जा सकती है. मंत्री दिनेश सिंह ने कहा- बिटिया का फाेन आया था. राे-राेकर बताया कि बेरहमी के साथ बर्ताव किया जा रहा है. उमाशंकर काे चाैथे स्टेज का कैंसर है. सब अच्छी तरह से जानते हैं कि 2 साल से जिंदगी-माैत से संघर्ष कर रहे हैं. उनके सारे धंधे बंद हाे चुके हैं. परिवार इलाज कराने में कभी अमेरिका, दिल्ली लखनऊ के बीच मेंदाैड़ रहा है. अगर उनके जीवन काे काेई नुकसान हाेता है, ताे इसकी जिम्मेदारी ये संवेदनहीन संस्थाएं हाेंगी. ऐसे हालात में ताे अदालतें गंभीर अपराधाें में भी मानवीय आधार पर राहत देती हैं. फिर भी अगर काेई संस्था या नेता राजनीतिक बदले की भावना से इस तरह की पीड़ा देने की साेच सकता है, ताे यह बेहद दुखद है.