स्वातंत्र्यवीर सावरकर ने प्रत्यक्ष कर्म से समरसता का मार्ग दिखाया

    28-Feb-2026
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तिलक रोड, 27 फरवरी (आ. प्र.)
एकात्मता और समरसता की संकल्पना हमारे देश को श्रेष्ठ बनाने वाली है. प्राचीन काल से ही संतों, समाज सुधारकों और महापुरुषों ने समाज के भेदाभेद को दूर कर भाईचारे का संदेश दिया है. इसी परंपरा में स्वातंत्र्यवीर सावरकर का सामाजिक कार्य विशेष रूप से उल्लेखनीय है, उन्होंने प्रत्यक्ष कर्म के माध्यम से समरसता का मार्ग दिखाया, ऐसा प्रतिपादन ग्राहक पेठ के कार्यकारी निदेशक एवं सामाजिक कार्यकर्ता सूर्यकांत पाठक ने किया. ग्राहक पेठ द्वारा स्वा. सावरकर की पुण्यतिथी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में वे बोल रहे थे. सूर्यकांत पाठक ने सावरकर के विभिन्न कार्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्ष 1931 में रत्नागिरी में पतित पावन मंदिर सभी के लिए खोला गया था. सावरकर की प्रेरणा और भागोजी कीर के आर्थिक सहयोग से यह मंदिर निर्मित हुआ था. ग्राहक पेठ के प्रांगण में आयोजित इस समारोह में स्वा. सावरकर की प्रतिमा का पूजन किया गया. इस कार्यक्रम में नगरसेवक राघवेंद्र उर्फ बापू मानकर और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे. राघवेंद्र मानकर ने कहा कि, देव, देश और धर्म के लिए स्वातंत्र्यवीर सावरकर द्वारा किया गया कार्य अत्यंत महान है.