पुणे, 3 फरवरी (आ. प्र.) महात्मा ज्योतिबा फुले ने केवल सामाजिक क्रांति ही नहीं की बल्कि समता, स्वतंत्रता और शिक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान प्रदान किया. यह विचार प्रसिद्ध साहित्यकार और अनुवादक डॉ.दामोदर खडसे ने व्यक्त किए. यहां के वीर पासलकर सभागार में मोगल जाधव लिखित ‘मनव्या युगाचे प्रवर्तक क्रांतिसूर्य महात्मा ज्योतिराव फुले' किताब का विमोचन करने के पश्चात वे बोल रहे थे. इस अवसर पर डॉ. गणेश राऊत ने कहा कि जाधव ने इस किताब में महात्मा ज्योतिबा फुले के साहित्यिक योगदान को अधोरेखित किया है.इस किताब की महत्ता यह है कि हमें ज्ञात होता है महात्मा ज्योतिबा फुले ने सामान्य से असामान्य यात्रा कैसे की? डॉ. लहू गायकवाड़ ने महात्मा ज्योतिबा फुले के शिक्षा विषय से संबंधित योगदान, समाज जागृति एवं स्त्री शिक्षा के महत्व पर भाष्य किया. इस समय कुमार अहेर ने ‘मी सत्यशोधक ज्योतिराव फुले बोलतोय' एक पात्रीय नाटक का मंचन किया. इस समारोह में प्रकाश कुलकर्णी ने स्वागत गीत, डॉ. शिवानी लिमये ने सूत्रसंचालन , प्रा. संगीता गांगुर्डे ने आभार ज्ञापन किया. यह जानकारी प्रा. डॉ. ओमप्रकाश शर्मा ने दी.