ईडी और सीबीआई का काम भी चुनाव आयाेग कर रहा है. यह प्रतिपादन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने किया. उन्हाेंने कहा-बीजेपी भी इस साजिश में शामिल है. हम ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियाेग का प्रस्ताव भी ला सकते हैं. ममता बनर्जी एसआईआर काे लेकर खुद सुप्रीम काेर्ट में अपनी दलीलें पेश करते हुए कहा-सारे दरवाजे खटखटाए, पर कहीं भी न्याय नहीं मिला है. उन्हाेंने कहा मैं इंसाफ पाने के लिए सुप्रीम काेर्ट आई हूं मुझे न्याय चाहिए. सीएम ने कहा- बंगाल में जिंदा लाेगाें काे मृत दिखाकर नाम काटे जा रहे हैं.शादी के बाद ससुराल गई लड़कियाें के नाम भी हटाए जा रहे. इसके अलावा काम के लिए बाहर गए युवाओं का नाम भी काटा जा रहा है. उन्हाेंने कहा- अन्याय के चलते न्याय बंद दरवाजे के पीछे राे रहा है. उन्हाेंने कहा-चुनाव आयाेग बंगाल काे निशाना बना रहा है.
एसआईआर हेतु इतनी जल्दबाजी आखिर क्यों? उन्हाेंने शक जताते हुए कहा कि जरूर दाल में कुछ काला है.हालांकि मामले की अगली सुनवाई साेमवार 9 फरवरी काे की जाएगी. वहीं सुप्रीम काेर्ट ने कहा-नाम मिसमैच पर दिए गए नाेटिस वापस लिए जाएं, काेई भी निर्दाे ष मतदाता सूची से बाहर न हाे. यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए. एसआईआर मामले में ममता बनर्जी खुद अदालत में अपनी दलीलें रख रही हैं. उनकी सबसे बड़ी आपत्ति यह है कि एसआईआर प्रक्रिया के दाैरान पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं. आराेप है कि मामूली गलतियाें के आधार पर कई लाेगाें काे नाेटिस और सर्कुलर जारी किए गए.
उन्हाेंने कहा कि हर समस्या का काेई न काेई समाधान हाेता है और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि काेई भी निर्दाेष व्यक्ति मतदाता सूची से बाहर न हाे. एक उद्देश्य मृत व्यक्तियाें के नाम हटाना है.
दूसरा अयाेग्य लाेगाें काे हटाना, और यह भी सुनिश्चित हाे कि पात्र मतदाताओं के नाम सूची में बने रहें. इसके बाद सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर पश्चिम बंगाल में राॅय, दत्ता, गांगुली जैसे नाम हटाए जा रहे हैं, ताे यह भी नहीं पता कि टैगाेर का सही उच्चारण क्या है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं हाे सकता कि टैगाेर, टैगाेर नहीं है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जवाब देते हुए कहा कि वह उदाहरण देकर अपनी बात समझा सकती हैं. उन्हाेंने कहा कि वह ऐसी तस्वीरें दिखा सकती हैं जाे प्रमुख अख़बाराें में प्रकाशित हुई हैं.ममता बनर्जी ने आराेप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया का इस्तेमाल केवल नाम हटाने के लिए किया जा रहा है. उन्हाेंने कहा, मान लीजिए किसी बेटी की शादी हाे जाती है और वह ससुराल चली जाती है, ताे सवाल उठाया जा रहा है कि वह पति का सरनेम क्याें इस्तेमाल कर रही है.