आयुर्वेद में सर्दियाें से संक्रमण काे ठीक करने के लिए सत्यानाशी का इस्तेमाल किया जाता रहा है. इस पाैधे में एंटीमाइक्राेबियल, एंटीअॅ्निसडेंट और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते है.जाे बै्नटीरिया, वायरस और फंगस काे खत्म करने में मदद करते हैं.सत्यानाशी संक्रमण के साथ घाव, फाेड़े-फुंसियाें काे भी ठीक कर सकता है.सत्यानाशी की पत्तियाे काे पीसकर बनाया गया लेप संक्रमित स्थान पर लगाया जाता है, जिससे सूजन काे कम किया जा सकता है. इसकी पत्तियाें काे उबालकर काढ़ा बनाकर संक्रमित स्थान पर लगाने से फंगल इन्फे्नशन से लड़ने में मदद मिलती है. आप संक्रमण वाले स्थान पर इसके तेल काे भी लगा सकते है.इसके अलावा सत्यानाशी की बीज या पत्तियाें का इस्तेमाल कब्ज, पाचन, एसिडिटी, और अपच जैसी समस्याओं में किया जाता है. यह लिवर की डिटाॅ्नसफाई करने में मदद करता है, और इसके कार्य काे बेहतर बनाता है.सत्यानाशी के पाैधे में एंट्रीइंफ्लेमेटरी गुण हाेते है, जाे सूजन और दर्द काे कम करने में मदद करते है.इसकी पत्तियाें के अर्क का इस्तेमाल अस्थमा, ब्राेकाइटिस और खांसी के इलाज में भी किया जा सकता है.