स्वतंत्रता या गुलामी मनुष्य के भीतर की गुणवत्ता है !

    05-Feb-2026
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Osho 
 
डायाेजनीन, यूनान में एक फकीर हुआ. महावीर की तरह फकीर था, नग्न रहता था. अलमस्त आदमी था, काेई चिंता-िफक्र न थी; ताे मस्त था, शरीर स्वस्थ था, शक्तिशाली था.कुछ लाेग निकल रहे थे जंगल से और वह, एक झाड़ के नीचे विश्राम कर रहा था. आठ आदमी थे वे. उनका धंधा गुलामाें काे बेचना था.उन्हाेंने इस मस्त आदमी काे साेए देखा उन्हाेेंने कहा कि अगर यह पकड़ में आ जाए ! लेकिन इसकाे पकड़ाे कैसे ? हालांकि यह साे रहा है, हम आठ हैं; मगर अगर यह जाग गया, ताे मुसीबत खड़ी हाे जाएगी. अगर यह हाथ आ जाए , ताे खूब दाम मिल सकते हैं. क्या करें, वे विचार ही कर रहे थे. उनकी बातचीत सुनकर डायाेजनीज की नींद खुल गई.ताे उसने आंखें बंद ही किए कहा कि तुम परेशान मत हाेओ, बांध लाे. चलूंगा साथ, घबड़ाओ मत.
 
वे और भी घबड़ाए कि यह आदमी किस तरह का है? आदमी काे गुलाम बनाना हाे, ताे वह हजार झंझटें खड़ी करता है; कमजाेर आदमी भी करता है.वह भी उछलकूद मचाता है, शाेरगुल मचाता है, मार-पीट करेगा, उसमें भी ताकत आ जाती है. और यह आदमी ऐसे ही पड़ा है, और आंखें ही बंद किए. आंखें खाेलकर भी नहीं देखा कि काैन हाे, क्या हाे ? उसने कहा कि ज्यादा चिंता -िफक्र मत कराे; चिंता-िफक्र का मैं दुश्मन हूं.यही मेरी शिक्षा है कि चिंता-िफक्र छाेड़ाे.तुम बांध ही लाे. मैं चलने काे राजी हूं. मैं काेई अड़चन खड़ी न करूंगा.डरते-डरते उन्हाेंने उसके हाथ बांधे.उसने हाथ आगे कर दिए. बांध ताे लिया उसे, लेकिन भीतर कुछ टूट गया उनके.यह आदमी बांधने जैसा है नहीं. इतना स्वतंत्र आदमी उन्हाेंने देखा ही न था, जाे बंधने काे इतनी आसानी से राजी हाे.र्सिफ परम स्वतंत्र आदमी ही बंधने काे राजी हाे सकता है.
 
उसकाे अपने पर इतना भराेसा है, अपनी स्वतंत्रता की इतनी श्रद्धाहै कि क्या तुम उसे मिटाओगे ! और जिसकाे आठ आदमी मिलकर मिटा दें, वह भी काेई माेक्ष है? डाेयाेजनीज बंध गया. उसने िफर पूछा कि किस तरफ चलें? तुम बता दाे, क्याेंकि मैं जरा तगड़ा आदमी हूं. अगर मैं पूरब जाऊं, ताे तुमकाे पूरब जाना पड़ेगा. तुम आठ कुछ कर न पाओगे. इसलिए तुम मुझे राह बता दाे.
और एक आदमी आगे हाे जाए; कहां चलना है ? एक आदमी आगे हाे गया. लेकिन रास्ते में उन लाेगाें पर उसका बड़ा प्रभाव पड़ने लगा. उसकी मस्ती, उसकी चाल ! वह गीत गुनगुनाए ! वह जैसे कि जंगल से लाया शेर हाे ! और इतना निर्भीक कि तुम उसे बांध भी न सकाे, बंधने काे भी खुद ही राजी हाे ! आखिर वे पूछने लगे, तुम आदमी किस तरह के हाे ? ऐसा आदमी हमने देखा नहीं? डायाेजनीज ने कहा, हम इस राज काे समझ गए कि गुलाम ही गुलामाें काे बांधते हैं, परतंत्र लाेग ही परतंत्राें काे परतंत्र करते हैं. हम स्वतंत्र हैं. तुम हमें क्या बांधाेगे ? हम खुद ही बंधे हैं !