शिवाजीनगर, 4 फरवरी (आ.प्र.) महाराष्ट्र की राजनीति और समाजनीति अजितदादा के बिना अधूरी है. शरद पवार साहेब की विरासत लेकर खुद की अलग पहचान उन्होंने निर्माण की थी. विकास के कार्य में उन्होंने कभी भी राजनीति नहीं लायी. उनके विकास के सपनों को हम सभी मिलकर पूरा करेंगे, यहीं उनको सही मायने में श्रद्धांजलि अर्पित होगी. यह प्रतिपादन केंद्रीय नागरी उड्डयन तथा सहकारिता राज्यमंत्री मुरलीधर मोहोल ने बुधवार को किया.
उपमुख्यमंत्री अजित पवार को पुणेवासियों की ओर से शोक सभा में श्रद्धांजलि अर्पित की गई. बालगंधर्व रंगमंदिर में आयोजित इस कार्यक्रम बड़ी संख्या में राजनीतिक, प्रशासकीय, सामाजिक क्षेत्र के व्यक्ति उपस्थित थे. इस वक्त अपने भाषण में मुरलीधर मोहोल ने कहा कि दादा का श्रद्धांजलि अर्पित करने का समय आएगा, ऐसा किसी को नहीं लगा था. सभी को वेदना देने वाला यह पल है. एक सप्ताह बाद भी विश्वास नहीं हो रहा है. दादा का अचानक चला जाना सभी के लिए धक्का है. महाराष्ट्र की राजनीति और समाजनीति अजितदादा के बिना अधूरी है. अनुशासनप्रिय और समय के पाबंद अजितदादा थे. सत्ता में नहीं होते हुए भी दादा की लोकप्रियता में थोड़ी भी कमी नहीं हुई. पवार साहेब की विरासत लेकर खुद की अलग पहचान निर्माण की. विकास के कार्य में कभी भी राजनीति नहीं की. इस प्रकार के नेता अत्यंत दुर्लभ है. कोविड कार्यकाल अत्यंत कठिन समय था, उस समय में एक भी दिन ऐसा नहीं गया कि अजितदादा से बातचीत नहीं की. अजितदादा की कमी हमें हमेशा खलेगी. उनके विकास के सपनों को हम सभी पूरा करेंगे. पुणेवासियों द्वारा आयोजित श्रद्धांजलि सभा में केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा शिवाजीनगर, 4 फरवरी (आ.प्र.) महाराष्ट्र की राजनीति और समाजनीति अजितदादा के बिना अधूरी है. शरद पवार साहेब की विरासत लेकर खुद की अलग पहचान उन्होंने निर्माण की थी. विकास के कार्य में उन्होंने कभी भी राजनीति नहीं लायी. उनके विकास के सपनों को हम सभी मिलकर पूरा करेंगे, यहीं उनको सही मायने में श्रद्धांजलि अर्पित होगी. यह प्रतिपादन केंद्रीय नागरी उड्डयन तथा सहकारिता राज्यमंत्री मुरलीधर मोहोल ने बुधवार को किया. राज्य की राजनीति अजित दादा के बिना अधूरी : मोहोल मनपा आयुक्त नवल किशोर राम ने कहा कि मैं जब पुणे में जिला कलेक्टर बना, उस समय अजितदादा केवल विधायक थे, उस वक्त बारामती क्षेत्र की कुछ समस्याएं उन्होंने अत्यंत संयम से रखीं. मेरी नियुक्ति देवेंद्र फडणवीस ने की थी. बाद में सरकार बदलने के बाद सभी को लगा मेरा तबादला किया जाएगा. लेकिन बदला नहीं गया. अजितदादा ने इस बारे में जानकारी देने पर उनके ब्रॉड विजन की जानकारी मिली. कोविड कार्यकाल में भी अच्छा सपोर्ट किया. पूर्व विभागीय आयुक्त दिलीप बंड ने अपने भाषण में कहा कि मेरा और अजितदादा का वर्ष 1997 से पहली बार संपर्क आया. मुझे बताया कि पिंपरी-चिंचवड़ में नियुक्ति देता हूं, लेकिन पिंपरी-चिंचवड़ 3 वर्ष में नागपुर की तरह होना चाहिए. अच्छा डेवलप होना चाहिए. वर्ष 2004 में पिंपरी-चिंचवड़ में तोड़ू कार्रवाई शुरू की. समय के काफी पक्के थे, हमेशा तड़के सुबह कामकाज शुरू करते थे. फिल्म निर्देशक नागराज मंजुले ने कहा कि अजितदादा की उपस्थिति में उनका गौरव करने का मौका मिलता तो अच्छा लगता था. मेरे जैसे व्यक्ति को भी उनकी मृत्यु से अत्यंत दुःख हुआ. उनके जाने से जो कमी आयी है, वह जल्द पूरी नहीं होगी.वरिष्ठ संपादक संजय आवटे ने कहा कि अजित पवार केवल पुणे के नहीं बल्कि राज्य के नेता थे. अजित पवार महाराष्ट्र के आखिरी जननेता. उनकी राजनीति अत्यंत अलग प्रकार की थी. अजितदादा कभी धर्म या जाति पर बोले नहीं, उन्होंने हमेशा विकास की राजनीति की. अजित पवार आम व्यक्ति को हमेशा उपलब्ध होने वाले व्यक्ति थे. राजनीति का केंद्र आम व्यक्ति है. उसके इर्द-गिर्द ही हमेशा राजनीति होनी चाहिए. राजनीति में कार्यरत रहने वाले सभी नेताओं को केवल विकास पर ही ध्यान केंद्रित करना चाहिए.सिम्बायोसिस की प्रमुख डॉ. विद्या येरवड़ेकर ने कहा कि हमेशा उनकी मदद मिली. लवले के सिम्बायोसिस के हॉस्पिटल में जाते समय सनीज वर्ल्ड के सामने संकरी सड़क थी. वहां पर हमेशा एम्बुलेंस ट्रैफिक में फंसती थी. एक वर्ष फॉलोअप के बावजूद समस्या हल नहीं होने पर अजितदादा को यह जानकारी दी, उन्होंने तुरंत यह कार्य करने को अधिकारियों को बताया. अब जो सड़क चौड़ीकरण जारी है, वह अजितदादा के कारण ही हो रहा है. राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर ने कहा कि अत्यंत पारदर्शिता से कामकाज करने वाले दादा थे. दादा के चले जाने से जो बड़ी कमी पैदा हुई, उसके बाद सुनेत्रा भाभी ने दुःख दूर कर उन्होंने तुरंत शपथ लेकर अपनी जिम्मेदारी स्वीकारी.वरिष्ठ निर्देशक जब्बार पटेल, अजित पवार के निजी सचिव नंदकुमार काटकर, पुणे श्रमिक पत्रकार संघ के अध्यक्ष ब्रिजमोहन पाटिल, वरिष्ठ कांग्रेस नेता उल्हास पवार, विधान परिषद की उपसभापति डॉ. नीलम गोर्हे के साथ अन्य वक्ताओं ने अपने विचार और अजितदादा की यादें साझाकर श्रद्धांजलि अर्पित की. यहां राष्ट्रवादी के पूर्व महापौर अंकुश काकड़े, शहराध्यक्ष सुनील टिंगरे, सुभाष जगताप, विधायक चेतन तुपे, कार्याध्यक्ष प्रदीप देशमुख, राष्ट्रवादी के मनपा गुटनेता नीलेश निकम आदि उपस्थित थे.
शरद पवार का हमेशा सम्मान करते थे अजित : वरिष्ठ उद्यमी विट्ठल मणियार
वरिष्ठ उद्यमी विट्ठल मणियार ने कहा कि उनके जाने का जो धक्का लगा है, वह अभी भी नहीं जा रहा है. उसे जन्म से बड़ा होते देखा है. वर्ष 1958 में शरद पवार से मेरा परिचय हुआ, वर्ष 1959 में अजित का जन्म हुआ. तब से देख रहा हूं. उनके पिता की मृत्यु होने के बाद शरद पवार साहेब ने उनका नेतृत्व किया. उसे सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में होने वाली रूची देखते हुए उसे मौका दिया गया. डेवलपमेंट कार्य में कामकाज शुरू किया. शरद पवार जब राष्ट्रीय राजनीति में गए, उसके बाद नीचे की पूरी जिम्मेदारी अजित ने पूरी क्षमता से संभाली. अजित हमेशा शरद पवार का सम्मान करते थे. उनके परिवार को कभी भी अकेलेपन महसूस नहीं होना चाहिए. उनकी कमी हमेशा दिखाई देगी. वरिष्ठ अभिनेता मोहन आगाशे ने कहा कि व्यक्ति चला जाता है, उसका कार्य कभी खत्म नहीं होता. नागरिकों को हमेशा स्मरण में रहता है. अजितदादा के कार्य सभी को हमेशा ध्यान में रहेंगे.
हमेशा आम लोगों के लिए काम किया : उच्च शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल
राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि अजितदादादा का अचानक जाना सभी को दुःख के सागर में डालने वाला था. उन्होंने पद हो या न हो, हमेशा आम लोगों के लिए ही काम किया. पुणे मनपा के पूर्व आयुक्त महेश झगड़े ने कहा कि मंत्रालय में दादा का और मेरा परिचय हुआ. उस वक्त वे सांसद या विधायक नहीं थे. बाद में कामकाज के दौरान कई बार साथ में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए. गुटखा पर पाबंदी के प्रस्ताव के दौरान उनसे मिलने गया, उस वक्त इस प्रस्ताव से राजस्व में कमी आएगी, लेकिन राज्य की अगली पीढ़ि का भविष्य ध्यान में रखकर उन्होंने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया. उनके जाने से खालीपन आया है.