आत्मनिर्भरता और वैेिशक नेतृत्व की ओर भारत का निर्णायक मोड़

प्रसिद्ध सीए सुहास पी. बोरा ने केंद्रीय बजट के विश्लेषण में कहा : बोले - देश ने भरोसे और निरंतरता को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया

    07-Feb-2026
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शिवाजीनगर, 6 फरवरी (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)

केंद्रीय बजट 2026 की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है विनिर्माण क्षेत्र को केंद्र में रखना. जिन वस्तुओं का उत्पादन भारत में पर्याप्त मात्रा में हो रहा है, उन पर कस्टम ड्यूटी छूट समाप्त कर घरेलू उद्योगों को संरक्षण दिया गया है. यह कदम स्पष्ट संकेत देता है कि अब भारत केवल उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि वैेिशक उत्पादन केंद्र बनने की दिशा में निर्णायक रूप से आगे बढ़ रहा है. यह अपेक्षाओं से आगे स्थिरता, आत्मनिर्भरता और वैेिशक नेतृत्व की ओर भारत का निर्णायक मोड़ है, ऐसे शब्दों में प्रसिद्ध चार्टर्ड एकाउंटेंट सुहास पी. बोरा ने आज का आनंद के पाठकों के लिए विस्तार से विश्लेषण किया है. उन्होंने बताया कि केंद्रीय बजट 2026 केवल राजस्व-व्यय का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक सोच के परिपक्व होने का प्रमाण है. कल तक जिन सुधारों और राहतों की हम अपेक्षा कर रहे थे, आज यह बजट स्पष्ट कर देता है कि सरकार का फोकस अल्पकालिक लोकलुभावन कदमों से आगे बढ़कर दीर्घकालिक स्थिरता, नीति-संतुलन और वैेिशक प्रतिस्पर्धा पर है. जब वैेिशक अर्थव्यवस्था मंदी, भू-राजनीतिक तनाव और तकनीकी बदलावों से जूझ रही है, तब भारत ने भरोसे और निरंतरता को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया है. लेदर और टेक्सटाइल उद्योग के लिए निर्यात की समय-सीमा को 6 महीने से बढ़ाकर 1 वर्ष करना, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के लिए लिथियम-आयन बैटरियों को कर राहत देना और विमान रखरखाव सेक्टर के लिए कस्टम ड्यूटी में कटौती ये सभी निर्णय मेक इन इंडिया को केवल नारा नहीं, बल्कि व्यावहारिक नीति बनाते हैं. सरकार द्वारा 12.2 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय यह दर्शाता है कि सरकार आर्थिक गति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है. सड़क, रेल, शहरी विकास और लॉजिस्टिक्स में निवेश न केवल रोजगार सृजन करेगा, बल्कि निजी निवेश को भी प्रोत्साहित करेगा. सीपीएसई की भूमि पर REIT की योजना एक अभिनव कदम है, जिससे अनुपयोगी सरकारी भूमि को आर्थिक परिसंपत्ति में बदला जा सकेगा. साथ ही, इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड लंबी अवधि की परियोजनाओं में निवेश का जोखिम कम करेगा. टियर-3 शहरों में सिटी इकोनॉमिक रीजन का विकास संतुलित शहरीकरण और रियल एस्टेट के लिए नए अवसर पैदा करेगा. कुल मिलाकर, बजट 2026 सरप्राइज का नहीं, बल्कि वेिशास का बजट है. यह मोदी 3.0 की सोच - युवा शक्ति, महिला सशक्तिकरण, किसान आय में वृद्धि, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और भारत की वैेिशक पहचान को मजबूत आधार देता है. यह बजट भारत की आर्थिक उड़ान को तेज, संतुलित और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है. डिजिटल क्षेत्र के लिए ‌‘टैक्स हॉलिडे' एक दूरदर्शी निर्णय डिजिटल क्षेत्र के लिए 2047 तक का टैक्स हॉलिडे बजट 2026 का सबसे दूरदर्शी निर्णय कहा जा सकता है. भारत में स्थित डेटा सेंटर्स के माध्यम से वैेिशक क्लाउड सेवाएं देने वाली विदेशी कंपनियों को कर राहत देना भारत को ग्लोबल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम है. इससे न केवल विदेशी निवेश आएगा, बल्कि युवा शक्ति के लिए उच्च कौशल वाले रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे.  
दीर्घकाल में इलाज सस्ता और सुलभ होगा

हालांकि धारा 80ऊ के तहत अतिरिक्त कर राहत की अपेक्षाएं पूरी नहीं हुईं, फिर भी हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर, आवश्यक दवाओं के घरेलू उत्पादन और आयात लागत में कमी से दीर्घकाल में इलाज सस्ता और सुलभ होगा. इसका सीधा लाभ आम नागरिकों के साथ-साथ बीमा उद्योग को भी मिलेगा, क्योंकि बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था से दावों की गंभीरता और आवृत्ति दोनों कम होंगी.
 
सरलता और निरंतरता पर जोर

यदि बजट 2026 को एक शब्द में परिभाषित करना हो, तो वह शब्द है स्थिरता. बीते वर्षों में टैक्स, जीएसटी और अनुपालन प्रणाली में बड़े सुधार हो चुके ह्‌ैं‍| ऐसे में उद्योग जगत की सबसे बड़ी अपेक्षा यही थी कि अब नीतिगत झटकों से बचते हुए उन्हें निष्पादन (execution) पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिले. इस दृष्टि से बजट विशेष रूप से बीमा, बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं के लिए सकारात्मक है. कर कानूनों में बड़े उलटफेर के बजाय स्पष्टता, सरलता और निरंतरता पर जोर दिया गया है, जिससे व्यवसायों को दीर्घकालिक योजना बनाने में मदद मिलेगी.