शिक्षकों से ही बेहतरीन शिक्षण संस्थान बनते हैं
सिंबायोसिस स्किल्स यूनिवर्सिटी की प्रो-चांसलर डॉ. स्वाति मुजुमदार ने कार्यक्रम में कहा
07-Feb-2026
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तिलक रोड, 6 फरवरी (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) पहले के समय में शिक्षक शिक्षा के क्षेत्र में केवल विद्यार्थियों को गढ़ने और उन्हें सिखाने के उद्देश्य से आते थे. उस दौर में इस क्षेत्र में नफे-नुकसान (लाभ- हानि) का विचार नहीं किया जाता था. वरिष्ठ शिक्षाविद डॉ. एस. बी. मुजुमदार जी ने भी अपने करियर की शुरुआत एक शिक्षक के रूप में की थी, यही कारण है कि सिंबायोसिस शिक्षण संस्थान के प्रति हर किसी का नजरिया अलग और सम्मानजनक है. कोई भी शिक्षण संस्थान केवल बुनियादी सुविधाओंसे बड़ा नहीं बनता, बल्कि बेहतरीन शिक्षकों की बदौलत ही अच्छे शिक्षण संस्थानों की नींव खड़ी होती है, ऐसे विचार सिंबायोसिस स्किल्स यूनिवर्सिटी की प्रो-चांसलर डॉ. स्वाती मुजुमदार ने व्यक्त किए. वे रोटरी क्लब ऑफ पूना मिडटाउन द्वारा आयोजित सर्वोत्तम व्यावसायिक गुणवत्ता पुरस्कार वितरण समारोह में बोल रही थीं. यह कार्यक्रम तिलक रोड स्थित मराठा चेंबर ऑफ कॉमर्स के सभागार में संपन्न हुआ. इस वर्ष का वोकेशनल एक्सीलेंस अवॉर्ड वेिशकर्मा ग्रुप के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. डॉ. बिपिन सुले को प्रदान किया गया. इस अवसर पर मंच पर क्लब के अध्यक्ष डॉ. चंद्रशेखर वल्हवणकर, निदेशक डॉ. हेमंत तोडकर, सचिव एडवोकेट शोभा सोमानी आदि गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे. अपने संबोधन में डॉ. बिपिन सुले ने जीवन के प्रति अपना दृष्टिकोण साझा करते हुए कहा, इंसान को समुद्र की तरह विशाल होकर जीना चाहिए. अपना काम हमेशा विनम्रता के साथ करें. उम्र बढ़ने पर इंसान को केवल ‘बूढ़ा'नहीं, बल्कि ज्येष्ठ (अनुभवी और मार्गदर्शक) बनना चाहिए. बूढ़े होकर सहारा ढूंढने के बजाय, ज्येष्ठ बनकर दूसरों का सहारा बनना अधिक महत्वपूर्ण है. प्रस्तावना रखते हुए डॉ. चंद्रशेखर वल्हवणकर ने कहा, रोटरी क्लब ऑफ पूना मिडटाउन पिछले 56 वर्षों से सक्रिय है. मस्वयं से ऊपर सेवाफ रोटरी का ध्येय वाक्य है, और हमारा क्लब इसी आदर्श पर चल रहा है. यह समाज परिवर्तन का एक सशक्त आंदोलन है और संस्था द्वारा विभिन्न सामाजिक गतिविधियां निरंतर जारी हैं. कार्यक्रम का संचालन शुभदा जठार ने किया. डॉ. बिपिन सुले का परिचय पूर्व अध्यक्ष राजकुमार तांबे ने कराया, जबकि मुख्य अतिथि का परिचय डॉ. धनंजय केसकर ने दिया. सम्मान पत्र (मानपत्र) का वाचन वृषाली देशपांडे द्वारा किया गया.