भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझाैते की घाेषणा हाे चुकी है. जाे बहुत अच्छी बात है. अमेरिकी राष्ट्रपति डाेनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि भारतीय उत्पादाें पर लगे 50 फीसदी टैरिफ काे घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया है. इसका असर शेयर बाजार, रूपया और विनिमय दर में दिखना शुरू भी हाे गया है. दरअसल,अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादाें पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने और व्यापार सहमति न बनने से हमारी सरकार वैकल्पिक बाजार ढूंढ रही थी और अब जब ट्रम्प ने टैरिफ घटाने की घाेषणा की है, तब वैकल्पिक बाजार के साथ हमारे निर्यातकाें काे अमेरिकी बाजार भी कम आयात शु्नल पर मिल जायेगा. यह भारतीय उत्पादकाें और निर्यातकाें के लिए राहत की बात है.हालांकि,अभी यह बहुत साफ नहीं है कि भारत ने रूस से अपनी तेल खरीद काे लेकर ्नया कहा है रूस से तेल खरीद बिल्कुल समाप्त कर दी गयी है, या भारत इसे धीरे-धीरे खत्म करेगा और अभी से अमेरिका या वेनेजुएला से तेल की खरीद बढ़ा दी जायेगी, जैसा कि ट्रम्प ने अपनी पाेस्ट में लिखा है.
पर इतना मैं अवश्य कहूंगा कि अमेरिका की तरफ से टैरिफ कम करने की जाे बात कही गयी है.उससे रूस से तेल खरीद काे लेकर भारत पर जाे 25 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया था, वह बात अब पीछे रह गयी है. मेरा मानना है कि अमेरिका और रूस के बीच यूक्रेन युद्ध के यथाशीघ्र समाप्ति काे लेकर जरूर कुछ सकारात्मक बातचीत हुई है. दूसरी ओर, ईरान ने भी अमेरिका के साथ अपने रिश्ताें काे बेहतर करने की काेशिश की है. ऐसे में मेरी समझ यह कहती है कि इन कारणाें से भी भारतअमेरिका व्यापार समझाैते पर सहमति बनी है और अमेरिका ने भारतीय उत्पादाें पर टैरिफ घटाने का निर्णय लिया है.यहां भारत काे बस इस बात का ध्यान रखना हाेगा कि हम अमेरिका या वेनेजुएला से जितना भी तेल या तेल उत्पाद का आयात करें, उसके और रूस से आयातित तेल के दाम में बहुत अंतर नहीं हाेना चाहिए, नहीं ताे हमारे आयात बिल पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.
अमेरिका द्वारा टैरिफ कम किये जाने के कारणाें की पड़ताल करतहुए इसका इस तरह मूल्यांकन करना चाहिए कि भारत ने अपने जाे वैकल्पिक रिश्ते बनाये हैं. वे काफी सफल रहे हैं, इनका असर न केवल अमेरिका द्वारा भारत के मूल्यांकन पर पड़ा है. बल्कि भारत के अंदरूनी हालात पर भी पड़ा है. इसका दूसरा कारण अमेरिका की अपनी भीतरी स्थिति भी है. इस वर्ष के अंत में अमेरिका में मध्यवर्ती चुनाव हाेने वाले हैं ंऔर हमें लगता है कि वहां के कांग्रेसनल सर्कल्स और काॅरपाेरेट सर्कल्स में यह बात महसूस की जा रही है कि भारतीय उत्पादाेें पर अत्याधिक टैरिफ लगाने का अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ेगा.
इसके साथ ही वहां जाे कांग्रेस के सदस्य या जाे काॅरपाेरेट समूह हैं ,वे भी भारतीय उत्पादाें पर टैरिफ बढ़ाये जाने काे लेकर खुश नहीं थे. अमेरिका में भारतीय समुदाय और भारतीय मूल के अमेरिकी भी रहते हैं.
टैरिफ का उन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. कारण जाे भी हाे, हमें अमेरिका के इस निर्णय का स्वागत करना चाहिए.्नयाेंकि एशिया के अन्य देशाें के साथ हमारे पड़ाेसी देशाें पर भी 18 प्रतिशत से थाेड़ा अधिक टैरिफ हैं चीन के मामले में ताे यह भारत से लगभग दाेगुना है. इस कारण भारतीय निर्यातकाें काे लाभ मिलेगा.यहां इस बात की चर्चा भी जरूरी है कि आखिर ट्रम्प ने जिस भारतीय अर्थव्यवस्था काे मृत कहा था, उसके साथ व्यापार समझाैते और टैरिफ कम करने के लिए वह क्यों नाराज हाे गये. इसका उत्तर है भारत की तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था. अमेरिका के विशेषज्ञ भी कह रहे हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है.आईएमएफ ने भी कहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है और 2026 तथा 2027 में भी यह तेजी से आगे बढ़ेगी.
अमेरिकी आर्थिक विशेषज्ञाें ने ताे वहां तक कहना शुरू कर दिया है कि 2100 तक नाॅमिनल संदर्भ में अमेरिकी अर्थव्यवस्था भारत से कमतर और रियल संदर्भ में ताे संभवत: 2050 तक ही वह भारत से कम हाे जायेगी. ये सब बातें भी हैं जिन्हें ध्यान में रखकर अमेरिका ने भारतीय उत्पादाें पर लगाये गये 50 प्रतिशत टैरिफ काे कम कर 18 प्रतिशत करने का निर्णय लिया है. अब बात उन क्षेत्राें की जिन्हें टैरिफ कम हाेने का लाभ मिलेगा.तात्कालिक ताैर पर ताे फिशरीज, टे्नसटाइल्स, जेम्स व ज्वेलरी क्षेत्र काे लाभ मिलेगा ही, कई ऐसे उत्पाद भी हैं, जिन पर अमेरिका ने पहले से कम टैरिफ लगा रखा था, उनके लिए ताे अमेरिकी बाजार पहले से ही खुला हुआ है.
बाकी समझाैते के अंतिम रूप मिलने के बाद ही यह पता चल पाएगा कि किन उत्पादाें पर 18 प्रतिशत का टैरिफ लगेगा और किन पर टैरिफ में थाेड़ी और छूट मिलेगी. यहां एक और महत्वपूर्ण पहलू काे लेकर चर्चा आवश्यक है. टैरिफ कम हाेने की घाेषणा जहां हमारे उत्पादकाें और निर्यातकाें के लिए स्वागत याेग्य है. वहीं इसे लेकर कृषि और डेयरी क्षेत्र से जुड़े लाेगाें का चिंतित हाेना भी स्वाभाविक है. हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका के कृषि और डेयरी उत्पादाें काे लेकर किस तरह का समझाैता हुआ है. इस समझाैते पर भारत ने अमेरिका से ्नया वादा किया है यह भी अभी तक साफ नहीं है.