कमाई करने वाली पत्नी भी मांग सकती है भरण-पोषण

सुप्रीम कोर्ट के अनुसार सम्मानजनक जीवन जीने आय होना भरण-पोषण से वंचित करने का आधार नहीं

    08-Feb-2026
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भारतीय समाज में अक्सर यह धारणा बनाई जाती है कि यदि पत्नी नौकरी करती है या स्वयं कमाती है, तो उसे भरणपोषण (Maintenance) का अधिकार नहीं होना चाहिए्‌‍. लेकिन कानून और न्यायालयों की दृष्टि इससे भिन्न है. भरण-पोषण कोई दया या उपकार नहीं, बल्कि एक वैधानिक संरक्षण है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वैवाहिक संबंध टूटने के बाद भी कोई जीवनसाथी आर्थिक असुरक्षा का शिकार न हो. सर्वोच्च न्यायालय ने समय-समय पर स्पष्ट किया है कि आय और सम्मानजनक जीवन-स्तर दो अलग बातें हैं और भरण-पोषण का निर्धारण इसी व्यापक दृष्टिकोण से किया जाता है.  
 
एड. भालचंद्र धापटे मोबाइल-9850166213
 
सवाल- क्या कमाई करने वाली पत्नी भरण-पोषण (Maintenance) की मांग कर सकती है?
उत्तर-
हां, भारतीय कानून के अनुसार कमाई करने वाली पत्नी भी भरण-पोषण (Maintenance) की मांग कर सकती है. भरण-पोषण कोई दया या कृपादान नहीं, बल्कि एक कानूनी संरक्षणात्मक उपाय है. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125, हिंदू विवाह अधिनियम तथा घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियमइन तीनों कानूनों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वैवाहिक संबंध टूटने के कारण कोई भी कमजोर जीवनसाथी आर्थिक रूप से निराधार न हो. अतः केवल इस आधार पर कि पत्नी नौकरी कर रही है या उसे कुछ आय प्राप्त हो रही है, उसका भरण-पोषण का दावा अस्वीकार नहीं किया जा सकता यह बात सर्वोच्च न्यायालय ने समय-समय पर स्पष्ट की है.

सवाल- धारा 125 CrPC में प्रयुक्त unable to maintain herself शब्दों का कानूनी अर्थ क्या है?
उत्तर-
धारा 125 CrPC में प्रयुक्त unable to maintain herself शब्दों का प्रायः गलत अर्थ लगाया जाता है. इसका यह अर्थ नहीं है कि पत्नी पूर्णतः बेरोजगार, भूखी या दरिद्र अवस्था में हो. न्यायालयों की व्याख्या के अनुसार वास्तविक कसौटी यह है कि क्या पत्नी अपनी आय से विवाहकालीन जीवन-स्तर के अनुरूप सम्मानपूर्वक जीवन-यापन कर सकती है या नह्‌ीं‍. यदि पत्नी की आय अत्यंत कम है और बढ़ती महंगाई, मकान का किराया, चिकित्सा व्यय अथवा बच्चों की शिक्षा का खर्च वहन करने में अपर्याप्त है, तो वह unable to maintain herself की श्रेणी में आती है. सवाल-यदि पत्नी नौकरी कर रही हो या उसकी स्वयं की आय हो, तब भी क्या उसे भरण-पोषण मिल सकता है? उत्तर- हां, Sunita Kachwaha बनाम Anil Kachwaha (2014) के प्रकरण में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि पत्नी कुछ हद तक कमा रही हो, किंतु उसकी आय विवाहकालीन जीवनस्तर के अनुरूप न हो, तो उसे भरण-पोषण दिया जा सकता है. भरण-पोषण निर्धारित करते समय न्यायालय केवल पत्नी के वेतन को नहीं देखता, बल्कि दोनों पक्षों के जीवन-स्तर, सामाजिक स्थिति, वैवाहिक जीवन में पत्नी को प्राप्त सुविधाएं तथा पति की आर्थिक क्षमता इन सभी तथ्यों का समग्र रूप से विचार करता है. अतः केवल पत्नी का रोजगार, भरण-पोषण से वंचित करने का स्वतः आधार नहीं बनता.

सवाल- क्या पत्नी के शिक्षित होने या कमाने की क्षमता होने के आधार पर भरण-पोषण से इंकार किया जा सकता है?
उत्तर-
नहीं, Shailja बनाम Khobban पर (2018) के निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने कमाने की क्षमता (capability to earn) और वास्तविक आय (Actual earning) के बीच महत्वपूर्ण अंतर स्पष्ट किया है. केवल इस आधार पर कि पत्नी उच्च शिक्षित है या नौकरी करने की क्षमता रखती है, भरण-पोषण से इनकार नहीं किया जा सकता. न्यायालय का दृष्टिकोण यह है कि जब तक पत्नी वास्तव में पर्याप्त आय अर्जित नहीं कर रही है और अपने जीवन-स्तर को बनाए रखने में असमर्थ है, तब तक उसे भरण-पोषण से वंचित करना उचित नहीं होगा.

सवाल- क्या प्रत्येक कमाई करने वाली पत्नी को भरण-पोषण मिलना अनिवार्य है?
उत्तर-
नहीं, भरण-पोषण कोई स्वतः या बिना शर्त प्राप्त होने वाला अधिकार नहीं है. कुछ मामलों में पत्नी की आय पर्याप्त, स्थिर और आत्मनिर्भर होती है, उस पर कोई विशेष जिम्मेदारी नहीं होती तथा पति की आय तुलनात्मक रूप से कम होती है. ऐसी परिस्थितियों में न्यायालय भरण-पोषण से इनकार कर सकता है. Rajnesh बनाम Neha (2021) के ऐतिहासिक निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि भरणपोषण का उद्देश्य समानता स्थापित करना नहीं, बल्कि निराधार होने से संरक्षण देना है. अतः प्रत्येक मामले में पत्नी की आवश्यकता, आय, बच्चों की जिम्मेदारी, स्वास्थ्य-स्थिति, विवाहकालीन जीवन-स्तर तथा पति की आर्थिक क्षमताइन सभी पहलुओं का संतुलित विचार करने के पश्चात ही निर्णय दिया जाता है.