पुणे, 7 फरवरी (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) आज का युवा केवल अपने करियर तक सीमित नहीं है, बल्कि वह समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी समझता है. कोई डॉक्टर बनकर निः शुल्क सेवा का सपना देख रहा है, तो कोई प्रशासन, शोध, कानून या वित्त के क्षेत्र में ईमानदारी से योगदान देना चाहता है. नई पीढ़ी के इन विद्यार्थियों से प्रो. रेणु अग्रवाल ने बातचीत की. इन सभी विद्यार्थियों के विचारों में एक बात समान है. सफलता केवल पद या धन नहीं, बल्कि संतुलित जीवन, नैतिक मूल्यों, आत्मानुशासन और समाज के प्रति समर्पण से जुड़ी है. यह नई पीढ़ी बड़े सपने देखती है, कड़ी मेहनत में वेिशास रखती है और यह समझती है कि चरित्र, परिश्रम और सकारात्मक सोच ही उज्ज्वल भारत की सच्ची नींव हैं. प्रस्तुत है उनकी बातचीत के प्रमुख अंश
प्रो. रेणु अग्रवाल (मो. 8830670849)
युवा सपनों की उड़ान : लक्ष्य, लगन और जिम्मेदारी का संगम लक्ष्य-डॉक्टर बनकर निःशुल्क सेवा मैं वर्तमान में 11वीं कक्षा में विज्ञान विषय का विद्यार्थी हूँ और मेरा लक्ष्य डॉक्टर बनना है. मेरे अनुसार सफल जीवन वही है जिसमें व्यक्ति अपने लक्ष्य को प्राप्त करे, मानसिक शांति बनाए रखे और रिश्तों, करियर तथा स्वास्थ्य में संतुलन स्थापित करे. मेरी योजना है कि मैं 2027 में उत्कृष्ट अंक प्राप्त कर एमबीबीएस में प्रवेश लूं और उच्च शिक्षा पूरी करूं आगे चलकर मैं आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की निःशुल्क चिकित्सा सेवा करना चाहता हूं. पढ़ाई के साथ-साथ मुझे वीडियो एडिटिंग, कंटेंट क्रिएशन और डबिंग जैसी रचनात्मक गतिविधियों में रुचि है. मेरा मानना है कि विद्यार्थी जीवन में शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए और व्यसनों से दूर रहना चाहिए. समाज में व्याप्त जातिवाद को समाप्त करना आवश्यक है, क्योंकि समरसता और समानता से ही देश का वास्तविक विकास संभव है. जब हम भेदभाव से ऊपर उठेंगे, तभी सच्चे अर्थों में एक सशक्त और धर्मनिरपेक्ष भारत का निर्माण होगा. - सर्वेश नंदूलाल भुरे, चिकलथाना
लक्ष्य-जिम्मेदार सरकारी अधिकारी बनना मैं बीएससी गणित के तृतीय वर्ष की छात्रा हूँ और भविष्य में सरकारी सेवा के क्षेत्र में एक जिम्मेदार अधिकारी बनना चाहती हूँ. मेरा उद्देश्य समाज और देश के लिए ईमानदारी तथा निष्ठा से कार्य करना है. वर्तमान में मेरा पूरा ध्यान अपनी पढ़ाई को सुदृढ़ करने और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर केंद्रित है. पढ़ाई के अतिरिक्त मुझे समाचारपत्र पढ़ना, सामान्य ज्ञान बढ़ाना तथा भारतीय पारंपरिक शास्त्र विद्या (तलवार अभ्यास) में रुचि है. इससे मुझे अनुशासन, आत्म-नियंत्रण, एकाग्रता और आत्मवेिशास प्राप्त होता है. मेरा वेिशास है कि मेहनत, धैर्य और आत्मवेिशास से कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है. सफल जीवन वही है जिसमें व्यक्ति आत्मनिर्भर, नैतिक मूल्यों से परिपूर्ण और समाज के लिए उपयोगी बने. - ऋतुजा अरविंद हनवते, संभाजीनगर
लक्ष्य-फाइनेंस क्षेत्र में उत्कृष्टता और चरित्र निर्माण
मैं वर्तमान में सीए की पढ़ाई कर रही हूं और आगे चलकर एमबीए कर फाइनेंस क्षेत्र में कार्य करना चाहती हूं. मेरा मानना है कि सफलता केवल पद या धन से नहीं मापी जाती, बल्कि ईमानदारी और संतोष से जुड़ी होती है. मैं अपने पेशे के माध्यम से समाज की सेवा करना चाहती हूँ, जैसा कि मेरे माता-पिता, जो स्वयं डॉक्टर हैं, अपने कार्य द्वारा करते हैं. पढ़ाई के साथ-साथ मुझे नृत्य, संगीत, तैराकी और आउटडोर खेलों में रुचि है, जो मेरे व्यक्तित्व को संतुलित बनाते हैं. विद्यार्थी जीवन को पूर्ण समर्पण और चरित्र निर्माण का समय माना जाता है. यदि धन चला जाए तो वह पुनः अर्जित किया जा सकता है, स्वास्थ्य भी सुधर सकता है, परंतु चरित्र एक बार खो जाए तो सब कुछ खो जाता है. इसलिए विद्यार्थियों को अपने आचरण और मूल्यों पर विशेष ध्यान देना चाहिए. - भक्ति राधेश्याम जाजू, बीड़
लक्ष्य- निरंतर सीखना और समग्र विकास
मैंने वीआईटी कॉलेज, पुणे से ईएनटीसी इंजीनियरिंग की है और वर्तमान में विभिन्न सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा हूँ. मेरा मानना है कि विद्यार्थी जीवन सीखने और स्वयं को विकसित करने का सर्वोत्तम समय है. इस अवधि का सही उपयोग हमें भविष्य के लिए सक्षम बनाता है. मुझे नृत्य, पियानो बजाना, बागवानी और यात्रा करना पसंद है, जिससे जीवन में संतुलन बना रहता है. माता-पिता और गुरुजन हमारे जीवन के सच्चे मार्गदर्शक हैं, जिनके संस्कार हमें हर परिस्थिति में दृढ़ बनाए रखते हैं. मैं ईेशर में वेिशास करता हूँ और मानता हूँ कि आध्यात्मिकता हमें आंतरिक शांति प्रदान करती है. सफल जीवन वही है जिसमें स्वतंत्रता, स्वास्थ्य, सम्मान, आर्थिक स्थिरता और पारिवारिक संबंधों का संतुलन हो. - हृदय विकास जैन, भुसावल
लक्ष्य-न्याय के माध्यम से समाज सेवा
मैं वर्तमान में एलएलबी तृतीय वर्ष का विद्यार्थी हूं और भविष्य में एक सफल वकील बनना चाहता हूँ. मेरा उद्देश्य अपनी विधिक क्षमता के माध्यम से समाज की समस्याओं का समाधान करना है. मेरे लिए सफलता केवल धन या पद नहीं, बल्कि मानसिक शांति, कार्य के प्रति प्रेम और दूसरों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की क्षमता है. मैं अपनी पढ़ाई में उत्कृष्टता प्राप्त करने के साथ-साथ नई तकनीकों को सीखकर स्वयं को अद्यतन रखने का प्रयास कर रहा हूँ. पढ़ाई के अतिरिक्त मुझे क्रिकेट खेलना और पुस्तकें पढ़ना पसंद है, जो मुझे तनावमुक्त और रचनात्मक बनाए रखता है. मेरा वेिशास है कि अनुशासन, समय प्रबंधन और निरंतर सी- खने की जिज्ञासा ही सफलता का आधार है. युवाओं को सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग और गलत संगति से बचना चाहिए. मेहनत और ईमानदारी से किया गया प्रयास ही उज्ज्वल भविष्य की नींव रखता है. -विनय विजेंद्र सरोसिया, छत्रपति संभाजीनगर
लक्ष्य-शोध के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां मैंने एम. फार्म की शिक्षा प्राप्त की है और आगे चलकर रिसर्च साइंटिस्ट बनना चाहती हूँ. मेरे अनुसार सफल जीवन वह है जिसमें व्यक्ति अपने कार्य से संतोष अनुभव करे. जीवन में स्पष्ट उद्देश्य और उसे पूरा करने का दृढ़ संकल्प ही सफलता की कुंजी है.बड़े सपने देखना और उन्हें पूरा करने के लिए निरंतर परिश्रम करना आवश्यक है. माता-पिता और गुरु हमारे प्रथम आदर्श होते हैं, जो हमें सही दिशा और प्रेरणा देते हैं. मैं विद्यार्थियों से कहना चाहती हूँ कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता. ईमानदारी, मेहनत और निरंतर प्रयास ही हमें लक्ष्य तक पहुंचाते हैं. - मेंहरिन युसूफ खान, औरंगाबाद