क्रॉनिक हिप पेन से राहत की ओर : आधुनिक AI-समर्थित हिप रिप्लेसमेंट से नई उम्मीद

साईश्री विटालाइफ के एमडी व चीफ रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन और स्पोर्ट्स इंजुरी स्पेशलिस्ट डॉ. नीरज आडकर

    01-Mar-2026
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 मांसपेशियां व हड्डियों के दर्द में उनकी गंभीरता के अनुसार इलाज किया जाता है. इसमें सर्जरी एक महत्वपूर्ण उपाय होता है. पेशेंट को जल्दी ठीक कराने और उसकी रोजमर्रा की जिंदगी पहले जैसी आसान करने में फिजियोथेरेपिस्ट बहुत महत्वपूर्ण होते हैं. फिजियोथेरेपिस्ट की मदद से पेशेंट जल्दी ठीक हो सकता है. इस बारे में पूछे गए प्रश्नों के विस्तार से उत्तर देकर पुणे स्थित साईश्री विटालाइफ के संचालक और स्पोर्ट्स इंजुरी विशेषज्ञ डॉ. नीरज आडकर ने शंकाओं का समाधान किया.
 
डॉ. नीरज आडकर
चीफ रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट और
स्पोर्ट्स इंजरी सर्जन
चेयरमैन, साईश्री विटालाइफ हॉस्पिटल>

सवाल : किन कारणों से मरीजों को अंततः हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है?

जवाब : सबसे सामान्य कारण ऑस्टियोआर्थराइटिस है| इसमें कूल्हे के जोड़ की चिकनी कार्टिलेज धीरे-धीरे घिस जाती है| जब यह परत खत्म हो जाती है तो हड्डियां आपस में रगड़ खाती हैं, जिससे दर्द, जकड़न और चलने-फिरने में दिक्कत होती है|इसके अलावा रूमेटॉइड आर्थराइटिस, पुरानी चोट या फ्रैक्चर, एवैस्कुलर नेक्रोसिस (जब हड्डी तक रक्त की आपूर्ति कम हो जाती है) या जन्मजात विकृति भी कारण हो सकते हैं. हर कूल्हे का दर्द उम्र का असर नहीं होता. अगर दर्द लगातार बना रहे और रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए
 
. सवाल : कब मरीज को दवाइयों या फिजियोथेरेपी से आगे बढ़कर सर्जन से सलाह लेनी चाहिए?
जवाब : शुरुआत में दवाइयां और फिजियोथेरेपी काफी मदद करती हैं. लेकिन यदि: दर्द लगातार बना रहे रोजाना दर्दनिवारक दवा लेनी पड़े चलने की दूरी कम हो जाए सीढ़ियाँ चढ़ने या कुर्सी से उठने में कठिनाई हो रात की नींद दर्द से प्रभावित हो तो सर्जन से परामर्श लेना चाहिए. पूरी तरह से अपंग होने तक इंतजार करना सही नहीं है.समय पर सलाह लेने से बेहतर निर्णय लिया जा सकता है.
 
सवाल : आसान शब्दों में, हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी क्या होती है और आज यह कितनी सुरक्षित है?
जवाब : हिप रिप्लेसमेंट में कूल्हे के खराब हो चुके हिस्से को हटाकर उसकी जगह धातु, सिरेमिक या विशेष मेडिकल प्लास्टिक से बने कृत्रिम जोड़ लगाए जाते ह्‌ैं‍. यह नया जोड़ प्राकृतिक जोड़ की तरह ही काम करता है. आज के समय में यह दुनिया की सबसे सफल सर्जरियों में से एक मानी जाती है. आधुनिक तकनीक, बेहतर एनेस्थीसिया और संक्रमण नियंत्रण के कारण यह सर्जरी काफी सुरक्षित है.
 
सवाल : हिप रिप्लेसमेंट में सटीकता (A ccuracy) क्यों महत्वपूर्ण है? यदि सही एलाइनमेंट न हो तो क्या हो सकता है?
जवाब : कूल्हे का जोड़ बॉल और सॉकेट की तरह काम करता है. कृत्रिम जोड़ को सही कोण और स्थिति में लगाना बहुत जरूरी है| यदि एलाइनमेंट सही न हो तो जोड़ में अस्थिरता, चलने में असुविधा, जल्दी घिसाव या कभी-कभी डिस्लोकेशन जैसी समस्या हो सकती है| सही सटीकता से आराम, संतुलन और इम्प्लांट की लंबी उम्र सुनिश्चित होती है.
 
सवाल : हर मरीज की शारीरिक संरचना अलग कैसे होती है और ‌‘वन-साइज- फिट्स-ऑल' तरीका क्यों सही नहीं है?
जवाब : हर व्यक्ति की हड्डियों का आकार, कोण, लंबाई और चलने का तरीका अलग होता है. अगर सभी पर एक जैसा तरीका अपनाया जाए तो प्राकृतिक संतुलन पूरी तरह वापस नहीं आ पाता| व्यक्तिगत योजना और सही इम्प्लांट का चयन बेहतर परिणाम देता है.
 
सवाल : आधुनिक डिजिटल तकनीक सर्जरी के दौरान सर्जन की कैसे मदद करती है?
जवाब : आधुनिक डिजिटल तकनीक सर्जरी के दौरान मार्गदर्शन का काम करती है. यह सर्जन को सटीक माप और वास्तविक समय (रियल- टाइम) में जानकारी देती है, जिससे इम्प्लांट को अधिक सही तरीके से लगाया जा सके| Saishree Vitalife Hospital में हिप रिप्लेसमेंट के लिए भारत का पहला AI-इंटीग्रेटेड सिस्टम उपलब्ध है| यह प्रणाली सर्जन को डेटा-आधारित जानकारी देकर निर्णय लेने में सहायता करती है. ध्यान देने वाली बात यह है कि तकनीक सर्जन की जगह नहीं लेती. अनुभव और निर्णय क्षमता हमेशा सर्जन की ही रहती है, तकनीक केवल सहायता करती है.
 
सवाल : सर्जरी के दौरान डिजिटल सिस्टम किस प्रकार की जानकारी देता है?
जवाब : AI- इंटीग्रेटेड सिस्टम सर्जरी के दौरान इम्प्लांट की स्थिति, कोण, पैर की लंबाई का संतुलन और जोड़ की स्थिरता जैसी जानकारी तुरंत प्रदान करता है. Saishree Vitalife Hospital में उपलब्ध यह उन्नत प्रणाली सर्जन को तुरंत छोटे-छोटे सुधार करने की सुविधा देती है, जिससे परिणाम और अधिक सटीक हो सकते ह्‌ैं‍.
 
सवाल : मरीज के दृष्टिकोण से डिजिटल सपोर्टेड हिप रिप्लेसमेंट के क्या लाभ हैं?
जवाब : मरीज के लिए संभावित लाभ हो सकते हैं: इम्प्लांट की अधिक सटीक स्थिति पैर की लंबाई का बेहतर संतुलन जोड़ की अधिक स्थिरताअधिक सहज और प्राकृतिक मूवमेंट लंबे समय तक इम्प्लांट के बेहतर प्रदर्शन की संभावना Saishree Vitalife Hospital में भारत के पहले AI- इंटीग्रेटेड हिप रिप्लेसमेंट सिस्टम के साथ मरीजों को आधुनिक तकनीक और अनुभवी सर्जन दोनों का लाभ मिलता है|
 
सवाल : क्या बेहतर सटीकता से रिकवरी, आराम और इम्प्लांट की उम्र पर असर पड़ता है?
जवाब : हाँ, सटीकता का सीधा असर परिणामों पर पड़ता है. सही एलाइनमेंट से मरीज को अधिक आराम, बेहतर चलने-फिरने की क्षमता और प्राकृतिक संतुलन मिल सकता है. सही स्थिति में लगाया गया इम्प्लांट कम घिसता है और लंबे समय तक टिक सकता है. Saishree Vitalife Hospital में उपलब्ध AI- इंटीग्रेटेड तकनीक का उद्देश्य इसी सटीकता को बेहतर बनाना है.
 
सवाल : जो मरीज लंबे समय से कूल्हे के दर्द से परेशान हैं और सर्जरी से डरते हैं, उन्हें आप क्या सलाह देंगे?
जवाब : सर्जरी को लेकर डर होना स्वाभाविक है| लेकिन लगातार दर्द के साथ जीना भी सही नहीं है| मेरी सलाह है कि पहले सही विशेषज्ञ से मिलें, अपनी स्थिति समझें और सभी विकल्पों पर चर्चा कर्‌ें‍. हर मरीज को तुरंत सर्जरी की जरूरत नहीं होती, लेकिन यदि जरूरत हो तो आज की आधुनिक तकनीक के साथ यह पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और सटीक हो चुकी है.
 
Saishree Vitalife Hospital में भारत का पहला AI- इंटीग्रेटेड हिप रिप्लेसमेंट सिस्टम उपलब्ध है, जहाँ उन्नत तकनीक और अनुभवी सर्जनों की टीम मिलकर मरीज को बेहतर  जीवन देने का प्रयास करती है. याद रखिए, लगातार दर्द के साथ समझौता करना जरूरी नहीं है. सही उपचार से आप फिर से आराम से चल-फिर सकते हैं और सामान्य जीवन जी सकते हैं.