अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध के चलते सेंसेक्स1353 अंक गिरने से निवेशकाें के 12 लाख कराेड़ रुपये डूब गए. वहीं दूसरी ओर रुपये में गिरावट, तेल के दाम में बढ़ाेतरी, जंग गहराने से बाजार में हाहाकार मचा है. मार्केट कैप 450 लाख कराेड़ से घटकर 438 लाख कराेड़ पर आ गया है.पिछले 9 दिनाें में निवेशकाें के 22 लाख कराेड़ से अधिक डूब गए हैं. शेयर बाजार की 8 दिग्गज कंपनियाें काे 3 लाख कराेड़ का भारी झटका लगा है. भारी अफरा-तफरी के बीच सेंसेक्स2400 अंक तक ढहने के बाद कुछ संभला. अंत में 77,566 अंक पर बंद हाे गया. वहीं निफ्टी में भी 422 अंक (1.73%) की गिरावट रही, ये 24,028 पर बंद हुआ. साेमवार काेैंक, ऑटाे, मेटल, एनर्जी और एफएमसीजी शेयराें में ज्यादा बिकवाली रही. जियाेपाॅलिटिकल तनाव और जंग जैसी स्थिति में महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है.
इससे कंपनियाें का मुनाफा कम हाे सकता है. ऐसे में निवेशक अपने शेयर बेचना शुरू कर देते हैं और सुरक्षित जगह निवेश करते हैं. इससे बाजार में गिरावट आती है. ईरान-इजराइल युद्ध से सप्लाई चेन बिगड़ने का डर. कच्चे तेल के दाम बढ़ने से भारत का इंपाेर्ट बिल और महंगाई बढ़ेगी.अमेरिका और एशियाई बाजाराें में गिरावट का असर भारत पर. ईरान और इजरायलअमेरिका के बीच छिड़ी जंग से निवेशकाें की वेल्थ 22 लाख कराेड़ रुपए से ज्यादा घट गई है. जंग शुरू हाेने से पहले यानी 27 फरवरी काे बाॅम्बे स्टाॅक एक्सचेंज (बीएसई) पर लिस्टेड सभी कंपनियाें का कुल मार्केट कैप 4.63 लाख कराेड़ था. लेकिन युद्ध की वजह से बाजार में भारी बिकवाली के कारण 9 मार्च तक यह घटकर 4.41 लाख कराेड़ पर आ गया है. मिडिल-ईस्ट में चल रहे युद्ध का असर अब सीधे आम आदमी की जेब पर पड़ने लगा है. ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमले के बाद कच्चे तेल में भारी उछाल है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 110 डाॅलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई.