शादी समाराेहाें का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भाेजन व्यवस्था हाेती है. हालांकि, जिन पर शादियाें में भाेजन की जिम्मेदारी हाेती है, उन कैटरिंग व्यवसायियाें के पास एलपीजी गैस खत्म हाेने की कगार पर है. इसके चलते आने वाले दाे दिनाें में शादी समाराेहाें में भाेजन की दावत बंद हाेने की आशंका पैदा हाे गई है. कैटरिंग व्यवसायियाें का कहना है कि गैस के अभाव में शादी समाराेहाें के लिए खाना बनाना संभव नहीं हाेगा.वर्तमान में शादियाें का सीजन चल रहा है. इन समाराेहाें के लिए मंगल कार्यालय और लाॅन पूरी तरह से बुक हैं. साथ ही कैटरिंग व्यवसायियाें के पास सगाई, हल्दी, मेहंदी और विवाह समाराेहाें के भाेजन की व्यवस्था के कई ऑर्डर हैं.लेकिन पिछले कुछ दिनाें से कमर्शियल गैस की आपूर्ति ठप हाे गई है, जिसका बड़ा असर कैटरिंग व्यवसाय पर पड़ा है.शादियाें के भाेजन के लिए व्यवसायियाें काे अब बेहद किफायत से गैस का इस्तेमाल करना पड़ रहा है. स्थिति यह है कि यदि अगले दाे दिनाें में गैस की आपूर्ति सुचारू नहीं हुई, ताे शादियाें की दावतें आयाेजित करना नामुमकिन हाे जाएगा.
ईरान और इजरायल के बीच छिड़े युद्ध के कारण कमर्शियल गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर पुणे सहित पूरे महाराष्ट्र के कैटरिंग व्यवसाय पर पड़ा हराज्य में लगभग 23 हजार से अधिक कैटरिंग व्यवसायी हैं, जिनमें से पुणे में इनकी संख्या करीब 250 से 300 के आसपास है. इन सभी व्यवसायियाें के पास अब बहुत कम गैस का स्टाॅक बचा है. यदि कमर्शियल गैस की सुविधा जल्द बहाल नहीं हुई, ताे कैटरिंग व्यवसाय ठप हाेने की संभावना है. पुणे समेत पूरे राज्य में गैस आपूर्ति बंद हाेने से न केवल हाेटल व्यवसायियाें काे, बल्कि कैटरिंग क्षेत्र काे भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है.सगाई हाे या शादी, आमताैर पर 300 लाेगाें का खाना बनाने के लिए कैटरिंग व्यवसायियाें काे एक बार में 19 किलाे का कमर्शियल गैस सिलेंडर इस्तेमाल करना पड़ता है. यानी, यदि एक दिन में दाे समय का भाेजन बनाना हाे, ताे दाे सिलेंडर की आवश्यकता हाेती है.कैटरिंग व्यवसायियाें का कहना है कि यदि कमर्शियल गैस ही उपलब्ध नहीं हाेगी, ताे उनके पास व्यवसाय बंद करने के अलावा काेई विकल्प नहीं बचेगा.