भीमाशंकर मंदिर में दर्शन की अनुमति पर विवाद

    19-Mar-2026
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Bhima 
 
श्री भीमाशंकर मंदिर परिसर में निर्माण कार्य के कारण प्रवेश पर प्रतिबंध हाेने के बावजूद भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के दर्शन करने के मामले में तहसीलदार ने मंदिर ट्रस्टी और संबंधित पुलिस निरीक्षक काे नाेटिस जारी किया है.अगले वर्ष नाशिक में कुंभ मेला आयाेजित हाेने वाला है. इस दाैरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु बारह ज्याेतिर्लिंगाें में से एक श्री क्षेत्र भीमाशंकर मंदिर में दर्शन के लिए आएंगे. इसे ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर में सभामंडप और अन्य सुविधाओं के निर्माण का कार्य शुरू किया गया है. इसी कारण जनवरी से श्रद्धालुओं के प्रवेश पर राेक लगा दी गई थी. महाशिवरात्रि के दाैरान भी दर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी.ऐसी स्थिति में सांसद निशिकांत दुबे काे मंदिर में प्रवेश दिए जाने से जिला प्रशासन की आलाेचना हाे रही है.
 
मंदिर परिसर में पुरातत्व विभाग के मार्गदर्शन में पारंपरिक पत्थर शैली में सभामंडप का निर्माण किया जा रहा है. इसे चार महीने के रिकाॅर्ड समय में पूरा कर गिनीज बुक में दर्ज कराने के लिए जिला कलेक्टर जीतेंद्र डूडी प्रयास कर रहे हैं. इसी कारण उस क्षेत्र में किसी काे भी प्रवेश न करने के निर्देश दिए गए हैं.क्षेत्र में दाे स्थानाें पर पुलिस द्वारा बैरिकेड लगाकर आवाजाही राेकी गई है.इसके बावजूद दुबे की गाड़ी पहले बैरिकेड काे पार करते हुए आगे बढ़ी. उन्हें मंदिर में दर्शन कराने के लिए ट्रस्ट के एक सदस्य नेमंदिर का ताला खाेलकर प्रवेश दिया.झारखंड से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे का दिल्ली की राजनीति में प्रभाव माना जाताहै. वे शनिवार दाेपहर हेलीकाॅप्टर से खेड पहुंचे थे, जहां महायुति के एक सहयाेगी दल के वरिष्ठ नेता ने उनकी मदद की.
 
वहां से वे वाहन से भीमाशंकर पहुंचे और दर्शन किए. इस घटना के बाद साेशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देखने काे मिली. इसके बाद जिला प्रशासन सक्रिय हुआ और जिला कलेक्टर जीतेेंद्र डूडी ने स्पष्ट किया कि इस संबंध में काेई अनुमति नहीं दी गई थी.जिला प्रशासन की ओर से संबंधित तहसीलदार प्रशांत बाेरसे ने साेमवार 16 मार्च काे पुलिस निरीक्षक और मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी काे कारण बताओ नाेटिस जारी किया है. हालांकि इस मामले में सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ काेई कार्रवाई नहीं की गई है. जिला कलेक्टर कार्यालय के अधिकारियाें ने स्पष्ट किया कि फिलहाल जांच केवल पुलिस अधिकारियाें और मंदिर ट्रस्ट तक सीमित है. इस बीच स्थानीय नागरिकाें में चर्चा है कि दुबे काे प्रवेश देने और मंदिर का ताला खाेलने के पीछे किसी वरिष्ठ स्तर से निर्देश दिए गए हाे सकते हैं, जिसकी जांच हाेना भी आवश्यक है.