गुढ़ी पाड़वा पर सोने की अच्छी खरीदारी की उम्मीद

ग्राहकों ने हालात को देखते हुए अब 1,50,000 रुपये की ‌‘बेस प्राइस" को स्वीकार किया

    19-Mar-2026
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लक्ष्मी रोड, 18 मार्च (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)

ग्राहकों ने अब सोने का भाव प्रति 10 ग्राम के लिए 1,50,000 रुपये को ‌‘बेस प्राइस' के रूप में स्वीकार कर लिया है. हाल ही में भाव 1,70,000 रुपये तक जाकर वापस 1,55,000 रुपये के स्तर पर स्थिर हुए हैं, जिससे गुढ़ी पाड़वा पर अच्छी खरीदारी की उम्मीद बंधी है. पिछले साल की तुलना में धातुओं की कीमतों में महंगाई के बावजूद गुढ़ी पाड़वा पर खरीदारी का उत्साह कम नहीं हुआ है. ग्राहक अब समझदारी से खरीदारी कर रहे हैं - जहां वे स्टाइल, मजबूती और बजट के बीच तालमेल बिठाने के लिए 18 कैरेट और डायमंड फ्यूजन जैसे विकल्पों को चुन रहे हैं, ऐसे विचार वरिष्ठ कमोडिटी विशेषज्ञ एवं पीएनजी एंड संस के निदेशक अमित मोडक ने ‌‘आज का आनंद' के विशेष प्रतिनिधि स्वप्निल बापट के साथ बातचीत में रखे हैं. उनके साक्षात्कार का यह संपादित अंश.

सवाल- पिछले कुछ दिनों में भारी उतार-चढ़ाव के बीच अब सोने के भाव डेढ़ लाख रुपये के आसपास स्थिर हो रहे हैं. क्या आपको लगता है कि गुढ़ी पाडवा जैसे खरीदारी के अहम दिन पर यह स्थिति ग्राहकों की दृष्टी से फायदेमंद रहेगी..?

जवाब-
गुढ़ी पाड़वा के अवसर पर लोग जो सोने की खरीदारी करने वाले हैं, उसमें अब ग्राहकों को 1,50,000 रुपये प्रति 10 ग्राम का भाव एक मबेस प्राइसफ लगने लगा है. इसका कारण यह है कि पिछले कई दिनों से सोने का भाव इसी स्तर के आसपास बना हुआ है. कुछ समय पहले प्रति 10 ग्राम 1,70,000 रुपये तक पहुंचने के बाद, अब भाव 1,55,000 रुपये के आसपास स्थिर होता दिख रहा है. अगर गुढ़ी पाड़वा तक भाव इसी तरह 1,50,000 से 1,55,000 रुपये के बीच रहता है, तो ग्राहकों की ओर से अच्छी खरीदारी देखने को मिल सकती है.

 सवाल-वर्तमान में ग्राहकों की दृष्टि से प्राथमिकता और चुनौतियां क्या हैं, जो आपको भी महसूस हो रही है..?

जवाब-
ग्राहक अब 18 कैरेट के आभूषण की ओर रुख कर रहे हैं. साथ ही ग्राहकों द्वारा लाइटवेट (हल्के वजन के) आभूषणों की मांग बढ़ रही है. लेकिन इसमें चुनौती यह है कि पारंपरिक आभूषण बनाने में मलाइटवेटफ तकनीक का उपयोग करना कठिन होता है. इसके पीछे कुछ मुख्य कारण हैं कि पारंपरिक आभूषणों में विभिन्न आकृतियां (जैसे देवी-देवता, फल-फूल, प्रकृति के दृश्य या अन्य जटिल नक्काशी) होती हैं. ऐसी आकृतियां बनाना बड़े कौशल का काम है. लाइटवेट आभूषणों में ऐसी बारीक आकृतियां जल्दी दब या मुड़ सकती हैं. इसी कारण, एक निश्चित स्तर के बाद पारंपरिक आभूषणों को और अधिक मलाइटवेटफ बनाना काफी चुनौतीपूर्ण हो जाता है.

सवाल-यह देखा गया है कि ग्राहकों का झुकाव अब हीरे के आभूषणों की ओर बढ़ने लगा है. फिलहाल क्या स्थिती है..?

जवाब-
आजकल ग्राहक के साथ-साथ सोने में जड़े हुए आभूषणों को भी काफी पसंद हैं. इसके पीछे मुख्य कारण यह सोना बहुत महंगा हो गया है, जबडाियमंड की कीमतें तुलनात्मक से मरीजनेबलफ (किफायती) लग हैं. ग्राहक अब सोने हीरे के ‌‘फ्यूजन'वाले आभूषणों कअधिक उपयोग कर रहे हैं. इन आभूषणों में इस्तेमाल होने वाला सोना 18 कैरेट का होता है. ग्राहकों को मजबूती (हार्डनेस) की आवश्यकता होती है, वह 18 कैरेट के सोने में मिल जाती है. इस प्रकार, सोने की कम कीमत, अच्छा वजन और दिखने में सुंदर सभी खूबियों के कारण अब ग्राहकों का के आभूषणों की ओर बढ़ने लगा है.

सवाल-चांदी की बढ़ी हुई कीमतों का ग्राहकों की पर क्या असर हुआ है.. उनकी खरीदारी ड क्या बदलाव दिख रहा है..?

जवाब-
पहले लोगों का रुझान चांदी की वस्तुएं खरीदने की ओर अधिक होता था, लेकिन अब वस्तु के रूप में चांदी खरीदना काफी महंगा पड़ता रहा है. उदाहरण के लिए देखें तो पहले जो 100 ग्राम का मफुलपात्रफ (लौटा या गिलास) 5 से 6 हजार रुपये में मिल जाता था, अब वही 22 हजार रुपये के आसपास मिलने लगा है. यह ग्राहकों की उम्मीद से कहीं अधिक महंगा हो गया है, इसलिए वे अब चांदी के बर्तन या बड़ी वस्तुएं लेने से बचते हैं. इसके बजाय, अब चांदी के सिक्के, देवी-देवताओं की मूर्तियां या आर्टिफैक्ट्स (कलाकृतियां) खरीदने की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं.

सवाल- धातुओं की कीमतों में महंगाई के बावजूद ग्राहकों में खरीदारी का उत्साह बना हुआ है. लेकिन ग्राहक अब बदलते परिदृश्य में क्या अलग सोचते हैं?

जवाब-
सोने, हीरे और चांदी के साथ-साथ अब लाइटवेट गोल्ड चैन्स और कास्टिंग ज्वेलरी का एक नया ट्रेंड शुरू हुआ है. लोग इन्हें काफी पसंद कर रहे हैं क्योंकि इसमें वजन कम होने के बावजूद डिजाइन काफी बड़े साइज (लुक) में तैयार किए जा सकते हैं. हालांकि, इन गहनों के साथ कुछ सावधानियां भी जुड़ी हैं. ये गहने दिखने में तो आकर्षक होते हैं, लेकिन इस्तेमाल करने में काफी नाजुक (डेलीकेट) होते हैं. यदि ये गहने 18 कैरेट में हों और कास्टिंग तकनीक से बने हों, तो उनमें दरार (क्रैक) आने की संभावना अधिक रहती है. इसलिए, ग्राहक इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए ये गहने खरीद तो रहे हैं, लेकिन यह भी तय है कि उन्हें पहनते समय और उनका रखरखाव करते समय विशेष सावधानी बरतनी होगी.