ज्ञान, विज्ञान व उद्यमिता के उद्देश्य से ‘गाै-टेक 2026’ का आयाेजन

    19-Mar-2026
Total Views |
 

tech 
 
गाै-आधारित ज्ञान, विज्ञान और उद्यमिता काे बढ़ावा देने के लिए एक ऐतिहासिक वैश्विक पहल गाै-टेक 2026 का आयाेजन 20 से 23 मार्च तक कृषि महाविद्यालय मैदान, सिंचननगर, शिवाजीनगर में किया जा रहा है. यह कार्यक्रम गाै-आधारित ब्राउन रिवाेल्यूशन के लिए एक वैश्विक आह्वान हाेगा, जाे भारत काे सतत और आत्मनिर्भर ग्रामीण विकास में अग्रणी स्थान पर रखेगा.यह अंतर्राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन और प्रदर्शनी ग्लाेबल कंफेडरेशन ऑफ काऊ-बेस्ड इंडस्ट्रीज़(जीसीसीआई) के तत्वावधान में, महाराष्ट्र गाै सेवा आयाेग के सहयाेग से और भारत सरकार के एमएसएमई मंत्रालय के समर्थन से आयाेजित किया जा रहा है. इस के बारे में जानकारी देने के लिए बुधवार काे दाेपहर 12ः30 बजे आयाेजित पत्रकार वार्ता में जीसीसीआई के संस्थापक और पूर्व केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय कामधेनु आयाेग के पूर्व अध्यक्ष डाॅ. वल्लभभाई कथीरिया ने बताया कि गाै टेक 2026 का मुख्य उद्देश्य गाय आधारित उद्याेगाें, विज्ञान, प्राैद्याेगिकी, अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता के लिए एक वैश्विक मंच प्रदान करना है.
 
यह कार्यक्रम नीति निर्धारकाें, सामाजिक नेताओं, वैज्ञानिकाें, उद्याेगपतियाें, स्टार्टअप्स, निवेशकाें, किसानाें, गाेशालाओं, विश्वविद्यालयाें, संताें, महिला उद्यमियाें और युवाओं काे भारत और विदेशाें से एकत्र करेगा. इस प्रदर्शनी में 200 से अधिक स्टाॅल, 12 से अधिक विषय आधारित सेमिनार, विशेष सम्मेलन हाेंगे. महाराष्ट्र गाै-सेवा आयाेग के अध्यक्ष और गाै-टेक आयाेजन समिति के अध्यक्ष शेखर मुंदडा ने बताया कि इस प्रदर्शनी में जैव-खाद, दुग्ध और मूल्यवर्धित उत्पाद, गाेबर और गाेमूत्र आधारित नवाचार, प्राकृतिक खेती, वीर्य प्रयाेगशालाएं, सेक्स-छांट वीर्य और भ्रूण हस्तांतरण तकनीक, साैर और जैव-ऊर्जा, चारा और बीज उद्याेग, घास का विकास, कृषि मशीनरी, बैंकिंग और वित्त, सहकारी, दुग्ध संघ, पशु आहार प्रसंस्करण इकाइयां, स्टार्टअप्स और अनुसंधान आधारित उत्पादाें का समावेश हाेगा. इसके अलावा स्थानीय गायाें की नस्लाें का जीवंत प्रदर्शन और आयुर्वेद, पंचगव्य और नष्टाेपचार आधारित उपचाराें का प्रदर्शन भी प्रमुख आकर्षण रहेगा.इस भव्य उद्घाटन समाराेह का आयाेजन 20 मार्च शाम 4 बजे काे हाेगा, और समापन समाराेह 23 मार्च शाम काे हाेगा. इस कार्यक्रम की शुरुआत बैलगाड़ी, गाै पूजन और गाै यज्ञ से हाेगी, इसके बाद गाेशाला सम्मेलन और औपचारिक उद्घाटन हाेगा