प्रभु भ्नित की लाै मन में जलती रहे, जीवन सुखद बनेगा

    02-Mar-2026
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Osho 
 
दीपावली भारत का सबसे प्रसिद्ध धार्मिक-सांस्कृतिक त्याैहार है. वैदिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूर्ण कर अयाेध्या लाैटे थे.कहा जाता है कि अयाेध्यावासियाें ने श्रीराम के स्वागत में दीप मालाएं प्रज्ज्वलित कर उनके प्रति अपनी भ्नित और प्रीति काे अभिव्य्नत किया था. जैन परंपरा के अनुसार इस दिन भगवान महावीर जन्म-मरण के प्रवाह काे पार कर देह मु्नत हाेकर माेक्ष काे प्राप्त हुए थे. महावीर के निर्वाण काे कल्याणकारी मानकर देवलाेक में इंद्र एवं देवताओं ने तथा पृथ्वी पर अनेक राजाओं व जनता ने मणिमय दीप जलाकर कार्तिक अमावस्या की उस रात्रि काे प्रकाशित कर प्रभु के प्रति अपने भ्नितभाव काे प्रकट किया था. भगवान महावीर ने अपनी आत्मा के भीतर छिपे अज्ञान के अंधकार काे दूर किया. समता और क्षमा से उन्हाेंने शत्रुओं काे पराजित किया.
 
आत्मा पर आवृत्त अज्ञान व मिध्यात्व के अंधकार काे उन्हाेंने ज्ञान रूपी सूर्य से दूर किया. वैदिक परंपरा में दीपावली है-‘तमसाे मा ज्याेतिर्गमय।’ अंधकार से प्रकाश में आना. जैन परंपरा में तीर्थंकर महावीर काे स्मरण कर आत्मा की उपासना की जाती है. इतर परंपराओं में भी विधियाें से उपासना के विधान हैं. दीप प्रज्ज्वलन एक भाैतिक परंपरा है. जैन धर्म में इस पर्व के आत्म-पक्ष काे स्पर्श करने काे कहा है. जीवन में रही हुई बुराइयाें, त्रुटियायसनाें के अंधकार काे ज्ञान का दीप जलाकर सम्यक् पुरुषार्थ द्वारा दूर करना चाहिए.‘अणाणं परियाणामि, णाणं उवसंपज्जामि।’ - मैं अज्ञान काे छाेड़ता हूं और ज्ञान के प्रकाश में आता हूं. अप्प दीपाे भव! तथागत के इस वचन के अनुसार हमें स्वयं काे दीपक बनाना है. भीतर का अंधकार मिट गया ताे बाहर का अंधकार स्वतः मिट जाएगा. सभी का मत है कि अज्ञान का मिटना ही दीपावली है.
 
‘दीपावली’ उत्सव और उल्लास का पर्व है. दूसराें में उल्लास बांटकर इस पर्व काे मनाएं. अभाव से ग्रस्त समाज के निर्धन लाेगाें में उत्सव जगे, ऐसा कुछ उपक्रम कीजिए.वेद का एक शिक्षा-सू्नत है. ‘शतहस्त समाहर सहस्त्रहस्त संकिर।’ अर्थात साै हाथाें से कमाओ और हजार हाथाें से बांट दाे. बांटने से उत्सव हजार गुणा हाेकर पुनः बांटने वाले काे प्राप्त हाेता है, आत्मसू्नत बनाएं इस बार आप ऐसी दीपावली मनाएं और आनंद अनुभव करें. इस वेद-सू्नत काे दीपावली पर्व पर आत्म-सू्नत बनाएं. इस बार आप ऐसी दीपावली मनाएं और आनंद अनुभव करें. सर्वत्र मंगल का वर्षण हाे! आत्मा में आंतरिक उल्लास के दीप जलें.समरसता की सरस्वतियां कल-कल करती हुई बहें. इन्हीं सदाशाओं के साथ स्वस्ति!