खान-पान सिहत तनाव बढ़ाने वाली इच्छाओं पर नियंत्रण रखें
डॉ. करानी बी. संजीवी ने 10वें अंतरराष्ट्रीय मधुमेह सम्मेलन में कहा चेलाराम डायबिटीज इंस्टीट्यूट द्वारा हुआ आयोजन
20-Mar-2026
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शिवाजीनगर, 19 मार्च (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) सीलिंग ऑन डिजायर्स (इच्छाओं पर सीमा), यह आध्यात्मिक सीख अत्यंत महत्वपूर्ण है. यदि इसी अवधारणा को चिकित्सा की भाषा में समझना हो, तो हम कह सकते हैं कि हमारी इच्छाएं प्रो-इंफ्लेमेटरी (जलन/सूजन बढ़ाने वाली) हैं और उन पर मर्यादा रखना एंटी- इंफ्लेमेटरी (शामक) है. मधुमेह को रोकने या उसके प्रबंधन के लिए हमें अपनी खान-पान की आदतों और तनाव बढ़ाने वाली इच्छाओं पर नियंत्रण रखना सीखना चाहिए, ऐसे विचार डॉ. करानी बी. संजीवी ने व्यक्त किए. वे चेलाराम डायबिटीज इंस्टीट्यूट द्वारा आयोजित 10वें अंतरराष्ट्रीय मधुमेह सम्मेलन में बोल रहे थे. इस तीन दिवसीय सम्मेलन में विभिन्न देशों के 2,900 से अधिक डॉक्टरों ने भाग लिया. इस दौरान मधुमेह और उससे जुड़ी जटिलताओं के समाधान पर गहन वैज्ञानिक चर्चा की गई. वैज्ञानिक सत्रों में मधुमेह की जटिलताओं का प्रबंधन, किफायती दर पर मधुमेह का उपचार, उपचार पद्धतियों में नवीन शोध और मधुमेह प्रबंधन में तकनीक की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर मंथन किया गया. मधुमेह के प्रति समाज में जागरूकता पैदा करना इस अंतरराष्ट्रीय मधुमेह सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य था. सम्मेलन का उद्घाटन महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल के प्रशासक, राष्ट्रीय सिकल सेल उन्मूलन मिशन के सदस्य और थैलेसीमिया एंड सिकल सेल सोसाइटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. विंकी रूघवानी के हाथों किया गया. इस अवसर पर चेलाराम फाउंडेशन के उपाध्यक्ष प्रकाश भूपटकर, चेलाराम डायबिटीज इंस्टीट्यूट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. उन्नीकृष्णन ए.जी. और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक विंग कमांडर (डॉ.) हर्षल मोरे (सेवानिवृत्त) सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे. डॉ. विंकी रूघवानी ने कहा कि मधुमेह की समस्या से निपटने के लिए गहन चर्चा, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने वाली एक मजबूत प्रणाली की आवश्यकता है. कार्यक्रम के दौरान, स्वीडन के करोलिंस्का इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर और मॉलिक्यूलर मेडिसिन सेंटर में डायबिटीज इम्यूनोलॉजी अनुसंधान समूह के प्रमुख डॉ. करानी बी. संजीवी को मधुमेह अनुसंधान के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए जीवन गौरव पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस सम्मेलन में मधुमेह में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मधुमेह में मेटाबॉलिक डिसफंक्शन एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज जैसे विषयों पर विशेष कार्यशालाओं का आयोजन किया गया. साथ ही, एंडोक्रिनोलॉजी (अंतःस्राव शास्त्र) और महिला स्वास्थ्य पर भी परिसंवाद संपन्न हुआ. इन सत्रों में संबंधित क्षेत्रों की चिकित्सा चुनौतियों और अनुसंधान के नए घटनाक्रमों पर प्रकाश डाला गया. चेलाराम फाउंडेशन डायबिटीज रिसर्च अवॉर्ड्स 2026 के अवसर पर इस सम्मेलन में बुनियादी अनुसंधान और क्लीनिकल रिसर्च प्रतियोगिता में 75 से अधिक युवा शोधकर्ताओं ने अपने शोध पत्र (प्रबंध) प्रस्तुत किए. साथ ही रविवार (15 मार्च) को चेलाराम डायबिटीज इंस्टीट्यूट और ब्लू सर्कल फाउंडेशन द्वारा आयोजित रन फॉर डायबिटीज के तहत 3 किमी और 5 किमी मैराथन में टाइप-1 मधुमेह से पीड़ित बच्चों सहित लगभग 500 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया.