कभी फटे कपड़े पहनने काे मजबूर रहने वाले एक साधारण किसान ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से सफलता की ऐसी इबारत लिखी है कि अब उन्हें दुनिया के प्रतिष्ठित ऑक्सफाेर्ड विश्वविद्यालय से निमंत्रण मिला है. अमरावती जिले के म्हासाला अंजनगांव बारी के निवासी रविंद्र माणिकराव मेटकर (57) आगामी 1 से 5 मई तक यूके में आयाेजित हाेने वाले ग्लाेबल रिसर्च काॅन्फ्रेंसमें मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हाेंगे.मेटकर ने 1984 में अपने घर की छत पर महज 100 पक्षियाें और 3,000 रुपये की पूंजी से मुर्गी पालन शुरू किया था। आज उनका काराेबार 50 एकड़ में फैल चुका है, जिसमें 1.8 लाख पक्षी हैं और सालाना टर्नओवर 15 कराेड़ रुपये है। हालांकि, यह राह आसान नहीं थी; 2006 में बर्ड फ्लू के कारण उनका व्यवसाय पूरी तरह ठप्प हाे गया था, लेकिन उन्हाेंने हार नहीं मानी और दाेबारा बैंक ऋण लेकर अपने साम्राज्य काे खड़ा किया.ग्लाेबल इकाेनाॅमिक फाेरम (जीईएफ ) द्वारा आयाेजित इस सम्मेलन का विषय हर दिमाग के लिए एआई है. एक सफल कृषि उद्यमी के रूप में मेटकर वहां अपने अनुभव और नवीन कृषि पद्धतियाें पर अंतर्दृष्टि साझा करेंगे. मेटकर अब अन्य किसानाें काे भी जैविक उर्वरकाें और लागत प्रबंधन का मार्गदर्शन देते हैं.