150 तपस्वी वर्षीतप के महान आराधना में संलग्न

‌‘श्री राजस्थानी जैन श्वेतांबर संघ" पुणे द्वारा तपस्वियों के लिए ‌‘बियासना" के लिए उत्कृष्ट व्यवस्था

    22-Mar-2026
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सोमवार पेठ, 21 मार्च (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)

पुणे के सोमवार पेठ स्थित श्री राजस्थानी जैन श्वेतांबर संघ मेें प. पू. शांतिदूत गच्छाधिपति पद्मश्री आचार्य श्री नित्यानंदसूरेीशरजी म. सा. की पावन प्रेरणा से सामुदायिक वर्षीतप महाआयोजन अत्यंत भक्ति, उल्लास और आध्यात्मिक वातावरण के साथ अपनी पूर्णता की ओर अग्रसर है. इस पावन अवसर पर प. पू. पंजाब केसरी आचार्य भगवंत श्रीमद्‌‍ विजयवल्लभसूरेीशरजी म. सा. के पावन समुदायवर्ती तथा प. पू. गच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्रीमद्‌‍ विजय धर्मधुरंधरसूरेीशरजी म. सा. के आज्ञानुवर्ती मुनि श्री ऋषभचंद्र विजयजी म. सा., मुनि श्री अक्षयरत्न विजयजी म. सा. तथा सागर समुदायवर्ती साध्वीजी म. सा. मुक्तिदर्शनाश्रीजी आदि ठाणा (8) की पावन निश्रा प्राप्त हो रही है, जिससे समस्त आयोजन को दिव्यता एवं प्रेरणादायक स्वरूप प्राप्त हुआ है. यहां 150 तपस्वी आत्माएं वर्षीतप जैसी महान आराधना में संलग्न हैं. संघ द्वारा सभी तपस्वियों के लिए जयणापूर्वक बियासना की उत्कृष्ट व्यवस्था की गई है. वर्षीतप तपस्या की पूर्णाहुति 20 एप्रिल (अक्षय तृतिया) के निमित्त आयोजित ‌‘पंचनहिका महोत्सव ‌‘डच पैलेस'में है. इस कार्य में शोभायात्रा, महापूजन, पारणा, वधामना, गावसांजी एवं मंगलगीत जैसे विविध धार्मिक कार्यक्रम अत्यंत उत्साह एवं भक्तिभाव से सम्पन्न होंगे.
 इस तप साधना में विशेष उल्लेखनीय तपस्वी-
जीविबाई बाबूलाल सोलंकी (उम्र 86 वर्ष, 12 वां वर्षीतप) चंपालाल खेमचंदजी शिंघी (उम्र 80 वर्ष, 12वां वर्षीतप) घेवरचंदजी हिम्मतमलजी मुथा, भोसरी (उम्र 76 वर्ष, अखंडित 9वां वर्षीतप)
उपनगरों से तपस्वियों की सहभागिता
कोंढ़वा, येरवडा, वर्धमान विहार, भोसरी सहित विभिन्न पुणे उपनगरों से तपस्वियों की सक्रिय सहभागिता इस आयोजन को सामूहिक साधना कर रही है. अनेक जैन श्रावक-श्राविका परिवारों के निस्वार्थ सहयोग, सेवा और समर्पण से यह आयोजन निरंतर सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है और अब अपने मंगलमय समापन की ओर अग्रसर है, यह जानकारी तेजराज लालचंदजी सोलंकी (संघ के अध्यक्ष), प्रकाश पुखराजजी बाफना (सचिव) और तथा ट्रस्ट मंडल के अन्य सहयोगियों द्वारा प्रदान की गई.  
 
आत्मचिंतन की भावना प्रबल हुई
 मेरी माताजी और धर्मपत्नी की प्रेरणा से मुझे वर्षीतप तपस्या की आराधना से जुड़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. यह उपवास और बियासना के क्रम से चलने वाली साधना, अक्षय तृतीया पर इक्षु रस के प्रशान के साथ पूर्णता की ओर बढ़ती है. इस तपस्या ने मेरे जीवन में गहरा परिवर्तन किया है. आत्मचिंतन की भावना प्रबल हुई है. नियमित उपवास से स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव आया है. शरीर हल्का, ऊर्जावान और जीवनशैली अधिक अनुशासित बनी है. संयम के पालन से एक संतुलित दृष्टिकोण विकसित हुआ है. यह आत्मकल्याण का सच्चा मार्ग है. - अतुल मांडोत-जैन  
 
 
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आत्मशुद्धि और साधना का पावन माध्यम
आ. विजयवल्लभ समुदाय वर्ती प. पू. आचार्य वसंतसूरेीशरजी म. सा. के लगातार अखंड 52 वर्षीतप की प्रेरणा से मुझे इस वर्षीतप आराधना से जुड़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. वर्तमान में मेरा 12वां वर्षीतप चल रहा है, जो मेरे लिए आत्मशुद्धि और साधना का पावन माध्यम है. इस तप के दौरान मुझे आंतरिक शांति, आत्मबल और संयम का अनुभव हो रहा है. गुरुदेव का आशीर्वाद, परिवार का सहयोग और समाज का स्नेह मेरी इस आराधना को निरंतर शक्ति प्रदान कर रहा है. प्रभु से प्रार्थना है कि यह तपस्या मुझे आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती रहे. - जीविबाई बाबूलालजी सोलंकी- बिजोवा
 
 
 
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