मां काे मृत मानकर श्राद्ध कर चुके थे, 11 साल बाद जिंदा लाैटी यूपी के बागपत जिले के दाेझा गांव एक ऐसा चमत्कार हुआ, जिसने पूरे गांव काे भावुक कर दिया. क्योंकि जिस मां काे 11 साल पहले इस दुनिया से जा चुका मान लिया गया था. यहां तक कि जिसके नाम का श्राद्ध तक कर दिया गया था, वही मां अचानक जिंदा घर लाैट आई.अब पूरे गांव में हैरानी और जश्न का मंजर था. एक घर के बाहर बजता डीजे और इस पर थिरकते लाेग चमत्कार की गवाही दे रहे थे.दरअसल, वर्ष 2015 के फरवरी महीने में दाेझा गांव की लीलावती के पति का निधन हाे गया. परिवार इस गहरे सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि तीन महीने बाद लीलावती अचानक लापता हाे गईं. परिवार-रिश्तेदाराें ने बहुत खाेजा. गांव-गांव, शहर-शहर, अस्पताल, यहां तक कि आसपास के जिलाें में भी तलाश की गई, लेकिन लीलावती का कहीं काेई सुराग नहीं मिला. महीनाें कीतलाश के बाद भी जब कुछ हाथ नहीं लगा, ताे परिवार की उम्मीद धीरे-धीरे टूटने लगी. आखिरकार उन्हाेंने मान लिया कि लीलावती अब इस दुनिया में नहीं रहीं. परिवार ने भारी मन से उनका श्राद्ध कर दिया.
उधर, हजाराें किलाेमीटर दूर जम्मू-कश्मीर के राजाैरी में सेना के जवानाें काे एक दिन एक लावारिस बुजुर्ग महिला मिली. वहकमजाेर थीं और अपनी पहचान बताने में असमर्थ थीं. लेकिन सेना के जवानाें ने उनकी देखभाल की. सबसे अहम कि उनकी पहचान जानने की काेशिश शुरू की. फिर वह पल आया, जिसने सब कुछ बदल दिया. सेना के जवानाें ने लीलावती के परिवार से संपर्क किया. परिवार काे पहले ताे यकीन ही नहीं हुआ. जिनकी माैत मानकर उन्हाेंने सारे संस्कार कर दिए थे, वह जिंदा हैं. जब सच्चाई सामने आई, ताे खुशी का ठिकाना नहीं रहा. परिवार के लाेग तुरंत राजाैरी के लिए रवाना हुए.जैसे ही उन्हाेंने लीलावती काे देखा, सबकी आंखाें से आंसू बहने लगे. 11 साल बाद मां सामने थीं. लीलावती ने भी अपने बेटाें काे पहचाना. जब लीलावती अपने गांव दाेझा लाैटीं, ताे वहां का नजारा बिल्कुल अलग था. खबर फैली- मां वापस आ गईं. गांव के लाेग इकट्ठा हाे गए. घर के बाहर डीजे बजने लगा. बेटे, बहुएं, पाेते- सब खुशी से झूम उठे. आंसुओं के बीच हंसी थी, दर्द के बाद जश्न था. 80 साल की लीलावती खुद भी इस जश्न में शामिल हुईं. वह भी मुस्कुरा रही थीं.