किसानाें काे सम्मान मिलने तक लड़ाई जारी रहेगी

    24-Mar-2026
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kisan 
 
अन्नदाता किसान आज मज़ाक का विषय बन गया है. जब तक यही किसान सम्मान और इज्जत का विषय नहीं बन जाता, तब तक हमारी लड़ाई और संघर्ष जारी रहेगा, पूर्व सांसद और स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के नेता राजू शेट्टी ने कहा.सरहद पुणे और कृष्णा पब्लिकेशन्स ने शहीद भगत सिंह की जीवनी पर आधारित, ‘युगद्रष्टा भगत सिंह आणि त्यांचे मृत्यूंजयी पूर्वक’ इस किताब के विमाेचन कार्यक्रम में राजू शेट्टी बाेल रहे थे. राजू शेट्टी काे युगदृष्टा भगत सिंह राष्ट्रीय पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया. यह कार्यक्रम तिलक राेड पर इंडियन मेडिकल एसाेसिएशन ऑडिटाेरियम में हुआ. मायदेश फाउंडेशन के अरुण जाेशी, सत्यशील राजगुरु, उद्याेजक कृष्णकुमार गाेयल, सरहद संस्था के संजय नहार, कृष्णा पब्लिकेशन्स के डायरेक्टर चेतन काेली, ट्रांसलेटर इंद्रायणी चव्हाण, मशहूर लेक्चरर केतन पुरी वगैरह इस कार्यक्रम में माैजूद थे.
 
राजू शेट्टी ने कहा, सरदार भगत सिंह के नाम पर अवाॅर्ड मिलना मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है, जिनके नाम और काम काे मैं मिसाल मानकर आंदाेलन में शामिल हुआ. भगत सिंह ने बहुत कम उम्र में देश के भविष्य, किसानाें, मेहनतकश लाेगाें, वंचिताें, शाेषिताें के लिए भूमिका ली थी. उन्हाेंने जाे विचार बताए और लिखे वे प्रेरणा देने वाले हैं. उसी प्रेरणा से मैंने अब तक किसानाें के लिए आवाज़ उठाई ै. किसानाें के सवालाें और समस्याओं काे पार्लियामेंट में नेशनल लेवल पर एक प्लेटफाॅर्म दिया. मेरे संगठन काे ताेड़ने की काेशिशें हुईं. मेरे साथियाें काे हटा दिया गया. लेकिन मैं बिना डगमगाए लड़ता रहा हूं और लड़ता रहूंगा.
 
किरणजीत सिंह ने कहा, भगत सिंह सिर्फ एक इंसान तक सीमित नहीं थे. वे एक साेच हैं. भगत सिंह अपने क्रांतिकारी कामाें और कुर्बानियाें के लिए जाने जाते हैं, लेकिन उनके कई पहलू हैं, जैसे इंसानी ज़िंदगी काे सबसे ज़्यादा अहमियत देना, किसानाें, मज़दूराें, वंचिताें, शाेषिताें, मज़दूर वर्ग और महिलाओं की परवाह करना, उनके सम्मान के लिए काेशिश करना, देश की पहचान के लिए असेंबली में बम फेंकना और ज़ुल्म करने वाले ब्रिटिश अधिकारियाें पर गाेली चलाना. भगत सिंह ने अपने ख़िलाफ सभी केस में खुद अपनी दलीलें रखीं और दलीलें देते हुए उन अदालताें काे साेच का प्लेटफाॅर्म बनाया. नाइंसाफी के ख़िलाफ संघर्ष में उनकी भूमिका आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनेगी.
 
केतन पुरी ने भगत सिंह की जाेशीली ज़िंदगी के सफर के साथ-साथ उनकी प्रेरणाओं काे भी दर्शकाें के सामने पेश किया. क्रांतिकारी भगत सिंह एक दूर की साेचने वाले, कामयाब लेखक, लक्ष्य पर चलने वाले नेता और बेहतरीन वक्ता जैसे सभी पहलुओं वाले शख्सियत थे. उन्हाेंने अपनी जवानी से ही अपनी ज़िंदगी का लक्ष्य तय कर लिया था. उनका याेगदान युवाओं के लिए प्रेरणा देने वाला है.अरुण जाेशी ने माईदेश फाउंडेशन के बारे में जानकारी दी. कृष्णकुमार गाेयल, संजय नहार, ट्रांसलेटर इंद्रायणी चव्हाण ने भी अपने विचार रखे. देवदत्त भिंगरकर ने सूत्रसंचालन किया.