कराेड़ाें खर्च कर बनाया ‘बहिणाबाई चाैधरी चिड़ियाघर’ 9 साल से बंद

    25-Mar-2026
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पिंपरी-चिंचवड़ शहर का गाैरव माना जाने वाला बहिणाबाई चाैधरी सर्पाेद्यान एवं चिड़ियाघर पिछले नाै वर्षाें से पर्यटकाें के लिए बंद पड़ा है. साल 2017 से शुरू हुआ साैंदर्यीकरण और नवीनीकरण का कार्य आज 2026 में भी अधूरा है. कराेड़ाें रुपये खर्च करने के बाद भी काम पूरा न हाेने से मनपा के नियाेजन और कार्यक्षमता पर गंभीर सवाल खड़े हाे रहे हैं. विशेष बात यह है कि काम में देरी के बावजूद संबंधित ठेकेदाराें और अधिकारियाें पर कार्रवाई करने के बजाय, प्रशासन उन्हें बार-बार ‘डेडलाइन’ बढ़ाकर राहत दे रहा है.वर्तमान में चिड़ियाघर में तीसरे चरण का लगभग 14 कराेड़ रुपये का काम चल रहा है. इस काम के लिए मूल रूप से छह महीने की समय सीमा तय की गई थी.
 
हालांकि, ‘केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण’ से अनुमति मिलने में देरी का बहाना बनाकर ठेकेदार काे फिर से विस्तार दे दिया गया है. पहले इस प्राेजेक्ट काे जुलाई 2025 तक पूरा कर जनता के लिए खाेलना प्रस्तावित था, लेकिन अब अधिकारी यह बताने की स्थिति में भी नहीं हैं कि इसका नया मुहूर्त कब आएगा.6 साल में 36 बेजुबान जीवाें की माैत चिड़ियाघर पर्यटकाें के लिए ताे बंद है, लेकिन वहां वन्यजीवाें काे रखा गया है. पिछले छह वर्षाें के भीतर चिड़ियाघर के भीतर 36 वन्यजीवाें और पक्षियाें की माैत का चाैंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है.इनमें मुख्य रूप से 7 माेर, 6 मगरमच्छ, 4 कछुए, 5 सांप और 5 उल्लू का समावेश हैं.
 
औंध स्थित सरकारी पशु चिकित्सालय ने इन माैताें का कारण प्राकृतिक और बीमारी बताया है, लेकिन चिड़ियाघर की दयनीय स्थिति और वहां फैले कूड़े-कचरे ने प्रशासन की संवेदनशीलता पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है. वर्तमान मयहां 184 वन्यजीव माैजूद हैं.
विधानसभा सत्र में गूंजा मुद्दा - चिड़ियाघर की बदहाली का मामला राज्य के विधायी सत्र में भी चर्चा का विषय बना. विपक्ष ने आलाेचना करते हुए कहा कि 21 कराेड़ रुपये खर्च हाेने के बाद भी परिसर की अवस्था दयनीय है. झाड़ियाें का साम्राज्य, निर्माण कार्य का मलबा और प्रशासनिक लापरवाही के कारण मनपा की छवि धूमिल हाे रही है. अब इस चिड़ियाघर का प्रबंधन ‘वन विकास निगम’ काे साैंपने का निर्णय लिया गया है, जिससे भविष्य में बेहतर सुविधाओं की उम्मीद जगी ह