मार्केटयार्ड, 24 मार्च (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध का प्रभाव होटल और कैटरिंग उद्योग पर निश्चित रूप से पड़ा है. खासकर चाइनीज खाद्यान्न काउंटर के व्यवसाय में यह ज्यादा महसूस हो रहा है. इसका मुख्य कारण यह है कि चाइनीज व्यंजन तैयार करने में गैस की खपत अधिक होती है. मार्केटयार्ड में पन्नालाल बंसीलाल फर्म के व्यापारी मनीष संचेती ने बताया कि सिलेंडर की किल्लत और बढ़ती कीमतों के कारण कई लोगों ने अपने चाइनीज फूड स्टॉल बंद कर दिए हैं. विकल्प के रूप में, कई व्यापारियों ने अब पुलाव और बिरयानी के व्यवसाय पर अपना ध्यान केंद्रित किया है. गैस की कमी की वजह से कुछ लोगों ने कोयले का उपयोग बढ़ाकर अपना होटल चालू रखा है. कुछ विक्रेता सुबह और दोपहर में एक साथ 5 किलो या 10 किलो की हांडी में बिरयानी तैयार कर रहे हैं और उसे बेच रहे हैं. युद्ध के कारण उत्पन्न परिस्थितियों के बीच पुलाव और बिरयानी में एक बार फिर प्लेट सिस्टम का चलन बढ़ गया है. चायनीज पदार्थों की तुलना में पुलाव, स्टीम राइस और बिरयानी राइस की बिक्री का स्तर अब भी बरकरार है. संचेती ने बताया कि वास्तव में अन्य पदार्थों की खपत कम होने के कारण इन चावल आधारित व्यंजनों की मांग और भी मजबूत हुई है. मनीष संचेती ने कहा कि, जब ईरान में युद्ध शुरू हुआ, तब अनुमान था कि बासमती चावल की कीमतें कम होंगी. लेकिन फिलहाल बाजार स्थिर बना हुआ है. बासमती के दाम पहले से ही ऊंचे थे और वे अब भी बरकरार हैं. वहीं पुलाव और बिरयानी राइस के बढ़ते चलन के कारण मार्केट में मांग बनी हुई है.
चपाती की जगह चावल का प्रमाण बढ़ा युद्ध और उसके कारण उत्पन्न हुई अन्य परिस्थितियों में एक बदलाव यह दिखाई दे रहा है कि, कॉर्पोरेट मेस और कैंटीन में रोटी-चपाती के बजाय चावल की मात्रा थोड़ी बढ़ गई है. कुछ कैंटीन में बासमती सेला या बासमती रेगुलर राईस का उपयोग बढ़ा है, क्योंकि बिरयानी और पुलाव तैयार होने के बाद अगले 2-3 घंटों तक आसानी से खाए जा सकते हैं. इसके विपरीत, चपाती को गर्म करके देना पड़ता है, जो वर्तमान परिस्थितियों में संभव नहीं है. - मनीष संचेती, पन्नालाल बंसीलाल, मार्केटयार्ड