शिवाजीनगर, 24 मार्च (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)
दूध केवल एक उत्पाद नहीं है, बल्कि यह किसानों की आय का आधार है और हर परिवार के पोषण का महत्वपूर्ण हिस्सा है. वैेिशक स्तर पर युद्ध और ईंधन कीमतों में वृद्धि का प्रभाव अंततः आम आदमी के घर तक पहुंचने की संभावना चितळे डेयरी के मैनेजिंग पार्टनर निखिल चितले ने व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध के परिणाम भारत प्रभाव में दैनिक जीवन में दिखाई देने लगे हैं. विशेष रूप से कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण इसका सीधा असर दूध और दुग्ध उत्पाद उद्योग पर पड़ा है.कच्चे तेल के महंगे होने से पैकेजिंग में उपयोग होने वाली वस्तुओं की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है. पॉलीथिलीन पाउच, HIPS और प्लास्टिक क्रेट्स जैसी सामग्री पेट्रोकेमिकल आधारित होने के कारण उनकी कीमतें बढ़ गई हैं. इससे दूध पैकेजिंग का खर्च सीधे तौर पर बढ़ गया है.चितले ने बताया कि दुग्ध उद्योग 24 घंटे, 365 दिन चलने वाला उद्योग है. दूध एक नाशवंत उत्पाद होने के कारण इसे रोज किसानों से एकत्र कर प्रोसेसिंग केंद्र तक लाना और वहां से बाजार तक पहुंचाना आवश्यक होता है. डीजल की कीमतों में वृद्धि से दूध के परिवहन खर्च में काफी बढ़ोतरी हुई है, जिसका असर पूरी आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ा है. ऊर्जा लागत भी काफी बढ़ी दुग्ध प्रक्रिया उद्योग ऊर्जा पर आधारित होता है. भाप (स्टीम) बनाने और उत्पादन चलाने के लिए LSHS और फर्नेस ऑयल का उपयोग किया जाता है. इन ईंधनों की कीमतों में वृद्धि से उत्पादन लागत बढ़ गई है. कुछ स्थानों पर बढ़ते खर्च के कारण उत्पादन कम करना पड़ा है या अस्थायी रूप से बंद भी करना पड़ा है.
रिटेल कीमत बढ़ाना अनिवार्य हो सकता है गुढी पाड़वा और ईद जैसे त्यौहार होने के कारण दुग्ध उत्पादों की मांग बढ़ी. त्यौहारों के समय ग्राहकों पर तुरंत बोझ न पड़े, इसलिए दुग्ध उद्योग ने बढ़ी हुई लागत को स्वयंतक सीमित करने का प्रयास किया है. लेकिन यदि कच्चे तेल, डीजल और औद्योगिक ईंधनों की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो दूध और दुग्ध उत्पादों की अधिकतम रिटेल कीम बढ़ाना अनिवार्य हो सकता है. क्योंकि इस उद्योग में किसानों को उचित मूल्य देना, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, परिवहन और बिक्री के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक होता है. निखिल चितले, मैनेजिंग पार्टनर, चितले डेअरी