पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता दत्ता मेघे का रविवार काे 89 वर्ष की आयु में निधन हाे गया. हृदयाघात के कारण उनका देहांत हुआ्. कांग्रेस सरकार के दाैरान दत्ता मेघे नागपुर के पालक मंत्री थे. इसके साथ ही वे रामटेक, वर्धा लाेकसभा क्षेत्र से सांसद भी चुने गए थे. उन्हाेंने शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण याेगदान दिया.वे हिंगना विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक समीर मेघे के पिता थे. दत्ता मेघे के निधन से विदर्भ और पूरे राज्य के राजनीतिक, शैक्षिक और सामाजिक क्षेत्राें में एक गहरा शून्य उत्पन्न हाे गया है. मेघे का जन्म 11 नवंबर, 1936 काे वर्धा जिले के पवनार में हुआ था. अपने लंबे राजनीतिक जीवन में उन्हाेंने कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और भाजपा के लिए काम किया और नागपुर , रामटेक और वर्धा निर्वाचन क्षेत्राें से चार बार लाेकसभा सांसद रहे.
वे विदर्भ के एकमात्र नेता हैं जाे विदर्भ के तीन निर्वाचन क्षेत्राें से सांसद चुने गए्. उन्हाेंने राज्यसभा सदस्य के रूप में भी उल्लेखनीय कार्य किया. वे राज्य में विपक्ष के नेता भी रहे. इसके अलावा, उन्हाेंने राज्यसभा और महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य के रूप में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं . दत्ता मेघे के निधन पर समाज के हर वर्ग में शाेक व्यक्त किया जा रहा है. नगर युवा शिक्षण संस्था और मदत्ता मेघे आयुर्वेद संस्थानफ जैसी संस्थाओं की स्थापना के माध्यम से उन्हाेंने ग्रामीण क्षेत्राें में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएंउपलब्ध कराईं्.उनके कार्याें से विदर्भ के हजाराें छात्राें काे अवसर प्राप्त हुए्. मेघे विदर्भ राज्य की मांग के प्रबल समर्थक के रूप में भी जाने जाते थे. उनके परिवार की अगली पीढ़ी भी राजनीति में सक्रिय है और उनके बेटे समीर मेघे विधायक हैं.