मनपा का बायाेमाइनिंग प्राेजेक्ट ही नियमाें के उल्लंघन के साथ शुरू !

    26-Mar-2026
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manapa 
 
देवाची उरूली कचरा डिपाे में पुराने कचरे के प्रसंस्करण के लिए निविदा के तहत एक ठेकेदार कंपनी ने काम शुरू कर दिया है. लेकिन राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल की अनुमति मिलने से पहले ही इस कंपनी ने खुले में काम प्रारंभ कर दिया है. इससे यह सामने आया है कि विभिन्न निर्माण कार्याें पर प्रदूषण के नाम पर प्रतिबंध लगाने वाला मनपा प्रशासन स्वयं ही नियमाें का उल्लंघन कर रहा है.देवाची उरूली स्थित कचरा डिपाे में पुराने कचरे की बायाेमाइनिंग प्रक्रिया के जरिए निपटान कर जमीन खाली करने का प्रयास मनपा कर रही है. राष्ट्रीय हरित अधिकरण के आदेशानुसार यह काम लगभग छह वर्ष पहले शुरू किया गया था. अब तक 22 एकड़ क्षेत्र में फैले पुराने कचरे का बायाेमाइनिंग के माध्यम से निपटान किया जा चुका है. शेष 28 लाख टन कचरे के प्रसंस्करण के लिए मनपा ने पांच अलग-अलग टेंडर जारी किए हैं.
 
प्रत्येक ठेकेदार काे 550 रुपये प्रति टन की दर से काम देने का निर्णय लिया गया है. अगले एक वर्ष में पूरे कचरा डिपाे काे साफ करने का लक्ष्य रखा गया है.दिसंबर में संबंधित ठेकेदाराें काे कार्यादेश भी जारी किए गए थे. मनपा आयुक्त नवल किशाेर राम ने पहले निर्धारित 875 रुपये प्रति टन की दर काे अधिक मानते हुए शर्ताें में बदलाव किया, जिससे दर कम हुई और प्रशासन के अनुसार कराेड़ाें रुपये की बचत हुई है.हालांकि वास्तविक स्थिति यह है कि नए कार्य प्राप्त चार ठेकेदाराें में से केवल एक कंपनी ने ही ट्राॅमल मशीन डिपाे परिसर में स्थापित की है.कचरे के ढेर पर ही मशीन लगाकर केवल एक ही आकार के आरडीएफ और बायाेसाॅइल काे अलग किया जा रहा है. यह मशीन खुले में स्थापित है और पर्यावरण संस्था नीरी के नियमाें के अनुसार इसके लिए शेड भी नहीं बनाया गया है.प्राेजेक्ट शुरू करने के लिए राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल की अनुमति भी नहीं ली गई है.
 
कचरे की मात्रा मापने के लिए वजन कांटा नहीं है और निगरानी के लिए मनपा का काेई अधिकारी या कर्मचारी भी माैजूद नहीं है. यहां तक कि सीसीटीवी व्यवस्था भी नहीं लगाई गई है. बारिश के माैसम में खुले में काम करना कठिन हाेगा, गीले कचरे पर प्रक्रिया करना मुश्किल हाेगा और कचरे का वजन भी बढ़ जाएगा.इसके आकलन के लिए फिलहाल काेई व्यवस्था दिखाई नहीं देती.पहले के प्राेजेक्ट में आरडीएफ के साथ-साथ अविघटनशील पदार्थ, निर्माण और विध्वंस अपशिष्ट, पुनर्चक्रण याेग्य प्लास्टिक तथा बायाेसाॅइल अलग किए जाते थे. वहां सीसीटीवी, वजन कांटा और मनपा अधिकारियाें द्वारा निगरानी व्यवस्था के साथ बंद शेड में काम किया जा रहा है.कुल मिलाकर मनपा प्रशासन ने लागत कम करने के लिए कदम ताे उठाए हैं, लेकिन पर्यावरण नियमाें और केंद्र सरकार के पर्यावरण विभाग की 2026 की गाइडलाइंस की अनदेखी की जा रही है. फिलहाल केवल एक मशीन से बायाेमाइनिंग हाे रही है और कितने कचरे पर प्रक्रिया हुई है इसका भी काेई स्पष्ट आंकड़ा नहीं है, जिससे संदेह की स्थिति बनी हुई है.