सुप्रीम काेर्ट ने बुधवार काे राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ गाने काे लेकर गृह मंत्रालय के सर्कुलर के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी. काेर्ट ने कहा कि पब्लिक प्लेस और सार्वजनिक कार्यक्रमाें के लिए जारी यह निर्देश अनिवार्य नहीं है. सर्कुलर काे चुनाैती देने वाली याचिका समय से पहले दायर की गई है.मामला सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जाॅयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचाेली की बेंच में था. बेंच ने कहा कि गृह मंत्रालय की एडवाइजरी में वंदेमातरम न गाने पर किसी भी तरह की सजा का प्रावधान नहीं है. बेंच ने कहा- ये दिशानिर्देश केवल एक प्राेटाेकाॅल हैं और इनका पालन करना अनिवार्य नहीं है.जब याचिकाकर्ता के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई हाेगी, या फिर उसके लिए गाना अनिवार्य किया जाएगा, तब हम इन सब बाताें पर ध्यान देंगे.
अदालत मुहम्मद सईद नूरी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी. सीजेआई ने कहा- हमें वह नाेटिस दिखाइए जिसमें आपकाे राष्ट्रगान बजाने के लिए मजबूर किया गया है.आप एक स्कूल चलाते हैं, हमें यह भी नहीं पता कि वह मान्यता प्राप्त है या नहीं.इस पर उनके वकील ने कहा- जाे व्यक्ति वंदेमातरम गाने या राष्ट्रगीत के समय खड़े हाेने से इनकार करता है, उस पर हमेशा बहुत बड़ा बाेझ हाेता है. सलाह देने के बहाने लाेगाें काे साथ गाने के लिए मजबूर किया जा सकता है. इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि यह सिर्फ एक दृष्टिकाेण है और लाेग इससे असहमत हाे सकते हैं. अगर आपके खिलाफ काेई एक्शन हाेता है, नाेटिस आता है, ताे आप फिर से काेर्ट आ सकते हैं. फिलहाल यह याचिका ‘भेदभाव के एक अस्पष्ट अंदेशे’ के अलावा और कुछ नहीं है.