लवले, 25 मार्च (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) शिक्षा मनुष्य के जीवन को बदलने का सबसे प्रभावी साधन है. कोई भी कार्य छोटा या बड़ा नहीं होता और हमें कभी भी किसी काम को करने में शर्म महसूस नहीं करनी चाहिए. जहां इच्छाशक्ति होती है, वहां मार्ग अवश्य मिलता है, ये विचार पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ नेता सुशील कुमार शिंदे ने व्यक्त किए. सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी द्वारा उन्हें प्रतिष्ठित डॉक्टर ऑफ लेटर्स (डी.लिट.) की मानद उपाधि प्रदान की गई, जिसके उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में वे बोल रहे थे. लवले स्थित सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के परिसर में मंगलवार (24 मार्च) को इस विशेष दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया था. इस अवसर पर प्रख्यात वैज्ञानिक और काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च के पूर्व महानिदेशक डॉ. रघुनाथ माशेलकर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे. समारोह की अध्यक्षता सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति प्रो. डॉ. एस. बी. मजुमदार ने की. इस सम्मान को स्वीकार करते हुए सुशील कुमार शिंदे ने अपनी जन्मभूमि सोलापुर से शुरू हुए सफर का उल्लेख किया और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री तथा देश के गृह मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों तक पहुंचने के अपने अनुभवों को साझा किया. उन्होंने अपने शुरुआती संघर्षों को याद करते हुए श्रम की प्रतिष्ठा के महत्व पर जोर दिया. इस दौरान उन्होंने लोकमान्य तिलक, धोंडो केशव कर्वे, गोपाल गणेश आगरकर, महादेव गोविंद रानडे और गोपाल कृष्ण गोखले जैसे महान शिक्षाविदों को नमन करते हुए सिम्बायोसिस के विजन की सराहना की. मुख्य अतिथि डॉ. माशेलकर ने अपने दीक्षांत भाषण में शिंदे के जीवन को दृढ़ता और ईमानदारी का प्रतीक बताया. उन्होंने कहा, सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी से की गई सेवा अपने आप में एक प्रकार की विद्वत्ता है. डॉ. माशेलकर ने छात्रों से सहयोग और सामूहिक प्रगति का मार्ग अपनाने का आह्वान किया. कार्यक्रम का प्रास्ताविक प्रो-चांसलर डॉ. विद्या येरवड़ेकर ने किया. कुलपति डॉ. रामकृष्णन रमण ने वेिशविद्यालय की उपलब्धियों का विवरण प्रस्तुत किया, जबकि कुलसचिव डॉ. शेजुल ने आभार व्यक्त किया.