गुलटेकड़ी, 27 मार्च (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण बाजार की स्थितियां तेजी से बदल रही हैं और इसका असर धीरे-धीरे अन्य क्षेत्रों पर भी दिखने लगा है. इसी पृष्ठभूमि में दै.‘आज का आनंद' से बात करते हुए गुलटेकडी मार्केट यार्ड के वरिष्ठ व्यापारी अभय संचेती ने कहा कि अब पहले की तरह मौज-मस्ती और विलासिता (लक्जरी) को थोड़ा किनारे रखकर जीवन के लिए अनिवार्य वस्तुओं पर अधिक ध्यान देना होगा. हमें अपनी आर्थिक स्थिति और परिवार की जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए कुछ बातों का कड़ाई से पालन करना होगा. वर्तमान में खाद्यान्न, दालों, फलों और सब्जियों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. ऐसी अनिश्चित परिस्थितियों में भविष्य में क्या होगा, इसके बारे में अभी कुछ भी कहना संभव नहीं है. इसीलिए, लोगों को अपने पास मौजूद धन को बहुत ही सोच-समझकर और सावधानी से खर्च करना चाहिए, यह सलाह अभय संचेती ने दी है. उन्होंने चेतावनी देते हुए यह भी कहा कि आने वाले समय में जो लोग बिना सोचेसम झे जेब से कार्ड निकालकर स्वाइप करते हैं और केवल ईएमआई भरने पर निर्भर रहते हैं, उनका भविष्य अत्यंत चुनौतीपूर्ण हो सकता है. संचेती ने कहा कि, महाराष्ट्र में चीनी, अंगूर, इंद्रायणी चावल, ज्वारी और कुछ हद तक दालों का उत्पादन होता है. लेकिन, अधिकांश माल अन्य राज्यों से आता है. मध्य प्रदेश से चना, सोयाबीन, गेहूं; आंध्र प्रदेश और कर्नाटक से चावल; उत्तर प्रदेश से चावल; और हरियाणाप ंजाब से भी चावल की आवक होती है. यदि उन राज्यों के बाजारों पर विचार करें, तो हरियाणा-पंजाब से 1,000-1,200 किलोमीटर, मध्य प्रदेश से 700-800 किलोमीटर और आंध्र-कर्नाटक से 600-800 किलोमीटर की दूरी है. वहां से अनाज लेकर ट्रक का पुणे आना और वापस जाना, इसके लिए 700-800 लीटर से लेकर 2,500 लीटर तक डीजल की आवश्यकता होती है. लेकिन, यदि डीजल की आपूर्ति बाधित हुई तो ट्रांसपोर्ट पर विपरीत असर होगा.और स्वाभाविक रूप से माल की उपलब्धता कम होगी और स्टॉक घटने लगेगा. इसका अर्थ यह है कि आम आदमी का जीवन पूरी तरह से डीजल पर निर्भर है. हम बहुत बड़े पैमाने पर गैस सिलेंडर पर भी निर्भर हैं. इसके अलावा, पेट्रोल का उपयोग दैनिक कामकाज, घर और ऑफिस आने-जाने के लिए होता ही है. मतलब इन तीनों चीजों की आपूर्ति सुचारू रूप से होते रहना आवश्यक है.
अभी कोई किल्लत नजर नहीं आ रही
वर्तमान में बाजार में ग्राहकों की अच्छी भीड़ है. हालांकि अभी कोई किल्लत नजर नहीं आ रही है, लेकिन आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल या गैस की आपूर्ति होती रहनी चाहिए तथा लोगों को बिना डरे सतर्क रहना चाहिए. अपने परिवार के सदस्यों की सुविधा के लिए आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी करना समय की मांग है. फिलहाल केवल अपने घर, परिवार और जीवन रक्षक वस्तुओं पर ही ध्यान देना चाहिए. -अभय संचेती, वरिष्ठ व्यापारी, मार्केट यार्ड
प्राकृतिक आपदा से भी संकट की स्थिति दुर्भाग्य से खेती में भी संकट की स्थिति बनी हुई है. जब-जब किसानों की फसल काटने का समय आता है, तब-तब प्राकृतिक आपदा आ जाती है. बड़े पैमाने पर बारिश होती है और सब कुछ तहस-नहस हो जाता है. इसके कारण किसान भारी नुकसान में चला जाता है. हाल ही में कुछ क्षेत्रों में हुई बेमौसम बारिश की वजह से हमने यह स्थिति देखी है. शायद, इन सबका परिणाम यह होगा कि स्थिति काफी अस्थिर रहने वाली है. इसलिए लोगों को मौजूदा परिस्थितियों का सामना करना ही पड़ेगा.