पुणे यूनिवर्सिटी के डाॅ. आदित्य अभ्यंकर काे जबरन अवकाश पर भेजा

    28-Mar-2026
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सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी के आदिवासी विभाग के कार्याें में कथित अनियमितताओं के मामले में सूचना एवं प्राैद्याेगिकी विभाग के प्रमुख डाॅ.आदित्य अभ्यंकर काे जबरन अवकाश पर भेजने का निर्णय कुलपति और सीनेट अध्यक्ष डाॅ. सुरेश गाेसावी ने शुक्रवार काे विश्वविद्यालय की सीनेट बैठक में घाेषित किया. साथ ही विश्वविद्यालय के कार्याें का फाेरेंसिक ऑडिट करने के लिए एक महीने के भीतर निविदा जारी करने की भी घाेषणा की गई.सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय की बजट अधिसभा की बैठक की शुरुआत ही हंगामे के साथ हुई. वर्ष 2017 से 2024 के बीच विश्वविद्यालय े कार्याें का फाॅरेंसिक ऑडिट कराने और आदिवासी विभाग में लगभग 6 कराेड़ रुपये की कथित अनियमितता के मामले में डाॅ. आदित्य अभ्यंकर काे तत्काल निलंबित करने की मांग काे लेकर सीनेट के सदस्याें ने प्रशासन काे घेरा.
 
इस चर्चा में विनायक आंबेकर, सचिन गाेरडे पाटिल, अपूर्व हिरे, बाकेराव बस्ते, ईशानी जाेशी, शंतनू लामधाड़े, जयंत काकतकर, वैभव दीक्षित और अद्वैत बांबाेली ने भाग लिया.इसके बाद सभागार की भावना काे देखते हुए डाॅ. सुरेश गाेसावी ने बैठक काे दस मिनट के लिए स्थगित किया. बैठक पुनः शुरू हाेने पर सीनेट सदस्याें की मांग के अनुसार डाॅ. आदित्य अभ्यंकर काे जबरन अवकाश पर भेजने का निर्णय घाेषित किया गया.फाेरेंसिक ऑडिट क्याें? विश्वविद्यालय के वर्ष 2016-17 स2022-23 के बीच के लेखा परीक्षण में कई त्रुटियां सामने आई हैं. नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की आपत्तियां अभी तक अनुत्तरित हैं. पांच वर्ष बीतने के बाद भी विश्वविद्यालय ने इन सवालाें का जवाब नहीं दिया.
 
वित्त एवं लेखा अधिकारियाें ने इस रिपाेर्ट काे अंतिम मानते हुए समिति के सभी सदस्याें काे भेजा, जिसमें विनायक आंबेकर भी शामिल थे. इसी रपाेर्ट से कथित अनियमितताओं की जानकारी सामने आई. इस मामले में न्यायालय जाने की भी तैयारी की गई थी. साथ ही उस समय के कुलपति के कार्यकाल पर भी सवाल उठाए गए थे. इन सभी मुद्दाें काे देखते हुए फाेरेंसिक ऑडिट का निर्णय लिया गया.आदिवासी विभाग में क्या है मामला राज्य सरकार के आदिवासी विभाग ने डेटा एनालिटिक्स सेंटर स्थापित करने का कार्य विश्वविद्यालय के प्राैद्याेगिकी विभाग काे दिया था. आराेप है कि इस परियाेजना में उपकरणाें की लागत अधिक दिखाकर लगभग 6 कराेड़ रुपये की अनियमितता की गई.इस कारण विभाग प्रमुख डाॅ. आदित्य अभ्यंकर की जांच की मांग की गई थी.पिछले दाे वर्षाें से यह मुद्दा उठ रहा था.अंततः उन्हें जबरन अवकाश पर भेजने का निर्णय लिया गया.