देश के वित्तीय सिस्टम की पाेल खाेल देने वाला एक और बड़ा मामला सामने आया है. केंद्र सरकार की जांच एजेंसी सीरियस फ्राॅड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस यानी एसएफआईओ ने सरकारी वित्तीय संस्था इंडस्ट्रियल फाइनेंस काॅर्पाेरेशन ऑफ इंडिया (आईएफसीआई) और उससे जुड़े कई शीर्ष अधिकारियाें व कई कंपनियाें के खिलाफ 6,855 कराेड़ रुपये के कथित घाेटाले काे लेकर नेशनल कंपनी लाॅ ट्रिब्यूनल में कंपनी ए्नट की विभिन्न धाराओं के तहत याचिका दाखिल की है.सूत्राें के मुताबिक, इस मामले में पहली सुनवाई इसी महीने हुई. अब अगली सुनवाई मई 2026 में तय है. हजाराें कराेड़ की धांधली का यह मामला अब एक लंबी कानूनी लड़ाई में बदल सकता है. यह मामला सिर्फ एक फ्राॅड केस नहीं है, बल्कि यह पूरे बैंकिंग और फाइनेंशियल सिस्टम पर सवाल खड़े करता है.इसमें देश की कई बड़ी काॅरपाेरेट कंपनियाें और दर्जनाें अधिकारियाें के नाम सामने आ रहे हैं.
एसएफआईओ की ओर से दायर याचिका में आराेप लगाया गया है कि आईएफसीआई द्वारा कई कंपनियाें काे दिए गए कर्ज में गंभीर अनियमितताएं हुईं. मसलन, लाेन देने के दाैरान जरूरी जांच सही तरीके से नहीं हुई, वैल्यूएशन रिपाेर्ट्स और जाेखिम मूल्यांकन में गड़बड़ी, आंतरिक प्रक्रियाओं का उल्लंघन इन वजहाें से कई कंपनियाें काे दिए गए कर्ज बाद में फंस गए और भारी नुकसान हुआ.इस केस में जिन कंपनियाें के नाम सामने आए हैं, वे देश के काॅरपाेरेट सेक्टर की बड़ी और चर्चित कंपनियां रही हइनमें ब्लू काेस्ट हाेटल्स, एमटेक ऑटाे, अलाेक इंडस्ट्रीज, भूषण स्टील, जेपी इंफ्राटेक, एबीजी शिपयार्ड शामिल हैं. इनमें से कई कंपनियां पहले ही दिवालिया प्रक्रिया से गुजर चुकी हैं.हजाराें कराेड़ के इस खेल में सिर्फ कंपनियां ही नहीं, बल्कि कई पूर्व और माैजूदा अधिकारी भी शामिल हैं. इनमें सीईओ एमडी, डायरेक्टर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं.