शिवाजीनगर, 30 मार्च (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण रियल एस्टेट क्षेत्र के प्रभावित होने की आशंका के बीच, राज्य सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए रेडी रेकनर (RR - आरआर) दरों में औसतन 4-5% की वृद्धि करने की चर्चा चल रही है. बताया गया कि महानिरीक्षक पंजीकरण एवं मुद्रांक का कार्यालय इस प्रस्ताव को अंतिम रूप दे रहा है और इसके 31 मार्च को घोषित होने की उम्मीद है. लेकिन इस बढ़ोतरी से घरों की बिक्री पर विपरीत असर होने के डर से रियल इस्टेट सेक्टर से इसका विरोध शुरु हो रहा है. रेडी रेकनर की नई दरें 1 अप्रैल से लागू होती हैं. इस वर्ष दरों में बढ़ोतरी 3% से 10% के बीच रहने की उम्मीद है. खासकर मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन, पुणे, नासिक और उन शहरों में अधिक वृद्धि की संभावना है जहां शक्तिपीठ कॉरिडोर और समृद्धि एक्सप्रेसवे के विस्तार जैसे बड़े बुनियादी ढांचे के प्रोजेक्ट चल रहे हैं. रियल इस्टेट उद्योग का कहना है कि अगर रेडी रेकनर दरों में बढ़ोतरी होती है तो लोग संपत्ति खरीदने के प्रति हतोत्साहित होंगे. बता दें कि प्रीमियम एफएसआई (फ्लोर स्पेस इंडेक्स), एंसिलरी एफएसआई और फंजिबल एफएसआई आदि की गणना आरआर दरों के आधार पर की जाती है. कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि आरआर दरों में जितनी अधिक वृद्धि होगी, संपत्ति उतनी ही खरीदारों की पहुंच से बाहर होती जाएगी. एक ओर जहां लागत बढ़ रही है और मेटल से लेकर सेंसेक्स तक हर बाजार गिर रहा है, वहीं युद्ध जैसी स्थिति में इसकी पूरी संभावना है कि बहुत कम लोग घर खरीदने का विकल्प चुनेंगे. मुंबई में मंत्रालय और रियल इस्टेट उद्योग के गलियारों में चर्चा यह चल रही है कि आगामी वित्तीय वर्ष के लिए, हालांकि सरकार शुरुआत में पश्चिम एशिया के संघर्ष का रियल एस्टेट बाजार पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर आशंकित थी, लेकिन अब उसने वार्षिक संशोधन के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया है. बताया गया कि रियल एस्टेट क्षेत्र में संभावित मंदी की चिंताओं को देखते हुए सरकार इस निर्णय पर विभाजित थी. खासकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, जिनके पास वित्त विभाग का प्रभार भी है, ने वर्तमान परिस्थितियों में आरआर दरों को बढ़ाने के बारे में अपनी शंकाएं व्यक्त की थीं. लेकिन राजस्व विभाग ने कई शहरों में बाजार दरों और आरआर दरों के बीच बढ़ते अंतर के साथ-साथ संभावित राजस्व हानि की ओर ध्यान आकर्षित किया, जिससे संशोधन की आवश्यकता स्पष्ट हुई है. तदनुसार, मुख्यमंत्री ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए एक उचित वृद्धि को मंजूरी दे दी है. राजस्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह वृद्धि मोटे तौर पर पिछले साल के संशोधन के अनुरूप होगी. वित्त वर्ष 2025-26 में कुल औसत वृद्धि 3.89% थी. रेडी रेकनर दरों की जानकारी आरआर (रेडीरेकनर) दरें राज्य सरकार द्वारा संपत्ति के लेनदेन के लिए निर्धारित न्यूनतम कीमतें हैं, जो यह सुनिश्चित करती हैं कि कर और स्टाम्प ड्यूटी का भुगतान उचित मूल्य पर किया जाए. इन दरों को पंजीकृत संपत्तियों के लेनदेन मूल्य के आधार पर प्रतिवर्ष संशोधित किया जाता है. ये दरें स्थान और प्रशासनिक प्रभागों जैसे कारकों के आधार पर विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग होती हैं. मुंबई जैसे शहरों में, दरें अक्सर वार्ड या उप-वार्ड स्तर पर तय की जाती हैं, जबकि राज्य के अन्य हिस्सों में तहसील इसके लिए निर्धारक निकाय के रूप में कार्य करती हैं. भूमि लेनदेन बढ़ने से दरों में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद अधिकारियों के अनुसार, इस वर्ष तेजी से शहरीकरण का सामना कर रहे क्षेत्रों में रेडी रेकनर दरों में भारी वृद्धि होने की संभावना है. खासकर कुंभ मेले से पहले, नाशिक में कई बुनियादी ढांचें परियोजनाएं पाइपलाइन में हैं, और हाल के महीनों में भूमि अधिग्रहण और पंजीकरण में तेजी आई है. इसी तरह, हवाई अड्डों, डेटा केंद्रों और विकास केंद्रों (ग्रोथ हब) की घोषणाओं के कारण रायगढ़, ठाणे और पालघर जिलों में भी भूमि लेनदेन बढ़ गए हैं. इन क्षेत्रों के लिए रेडी रेकनर दरों में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है. राजस्व हमेशा बढ़ता ही है रियल इस्टेट उद्योग से जुड़े डेवलपर्स, बिल्डर्स और उद्यमियों का कहना है कि जब भी रेडी रेकनर दरों में बदलाव नहीं किया गया, तब भी सरकार के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. अतः रियल एस्टेट क्षेत्र को सहारा देने के लिए वे सरकार से दरें यथावत रखने का आग्रह कर रहे हैं. वे बताते हैं कि यह समय-समय पर सिद्ध हुआ है कि दरों में वृद्धि हो या न हो, राजस्व हमेशा बढ़ता ही है. चूंकि वर्ष 2026 और 2027 काफी चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं, इसलिए दरों में कोई बदलाव न करना ही उचित होगा.
रेडी रेकनर न बढ़ाएं, फूटनोट्स में सुधार जरुरी हम मुख्यमंत्री महोदय से विनम्र अनुरोध करते हैं कि वर्ष 2026-27 के लिए रेडी रेकनर दरों में कोई वृद्धि न की जाए और वार्षिक बाजार मूल्य दर तालिका के ‘फूटनोट्स' में आवश्यक सुधार किए जाएं. इसके पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं. विस्तार से बताया जाए तो वर्तमान युद्ध की स्थिति का अर्थव्यवस्था पर व्यापक और प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. आईटी, प्रोफेशनल और विभिन्न सेवा क्षेत्रों के कर्मचारियों के मन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कारण नौकरी जाने का भय बना हुआ है. साथ ही शेयर बाजार और धातुओं की कीमतों में भारी उतार- चढ़ाव देखा जा रहा है. यह सभी कारक यह दर्शाते हैं कि आने वाला वर्ष रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण और अनिश्चितताओं से भरा होगा. इसके साथ ही, फूटनोट्स में अधिक स्पष्टता लाने के लिए उनमें संशोधन की आवश्यकता है. कुछ नियमों के कारण जो अन्याय हो रहा है, उसे वरिष्ठ अधिकारियों ने भी मौखिक रूप से स्वीकार किया है. कई अन्य राज्य हर तीन साल में एक बार रेडी रेकनर दरों में संशोधन करते हैं; हमारी सरकार को भी इसी नीति को अपनाना चाहिए. - शांतिलाल कटारिया, पूर्व अध्यक्ष, क्रेडाई महाराष्ट्र
स्टाम्प ड्यूटी संग्रह लक्ष्य से पीछे
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए लक्ष्य - 68,032 करोड़ रु.
29 मार्च 2026 तक का संग्रह - 60,000 करोड़ रु.
31 मार्च 2026 तक संभावित संग्रह - 61,000 करोड़ रु.
इस वर्ष में संभावित कमी लगभग 7,032 करोड़ रु.