प्रवासी श्रमिकों को गैस सिलेंडर न मिलने से गंभीर समस्याएं

सिर्फ व्यापार ही नहीं बल्कि अर्थव्यवस्था पर भी हो रहा असर : व्यापारी महावीर कटारिया ने सरकार का ध्यान खींचते हुए कहा

    31-Mar-2026
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पुणे, 30 मार्च (स्वप्निल बापट)

महाराष्ट्र में कार्यरत लाखों प्रवासी श्रमिकों को एलपीजी गैस सिलिंडर न मिलने से गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं. वर्तमान में अन्य राज्यों से पुणे में आए इन श्रमिकों के पास स्थानीय एलपीजी गैस कनेक्शन के लिए कार्ड उपलब्ध नहीं है. इस वजह से उन्हें समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं. इस समस्या का कोई उपाय नहीं दिखाई देने से यह श्रमिक अपने-अपने गृह राज्य में वापस जा रहे हैं. पुणे के वरिष्ठ कपड़ा व्यापारी महावीर कटारिया ने दै.‌‘आज का आनंद' के जरिये, इस मुद्दे पर राज्य सरकार का ध्यानाकर्षण करते हुए कहा है कि अगर उन श्रमिकों का स्थलांतर नहीं रोका गया तो न सिर्फ व्यापार बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था पर भी इसका बुरा असर पड़ सकता है. दै.‌‘आज का आनंद' के विशेष प्रतिनिधि स्वप्निल बापट से बातचीत में उन्होंने कहा कि इस समस्या पर राज्य सरकार को तुरंत विचार कर उचित निर्णय लेना चाहिए, ताकि श्रमिकों का भरोसा बना रहे और राज्य की प्रगति निर्बाध रूप से चलती रहे. उनकी बातचीत के यह संपादित अंश. महाराष्ट्र में अन्य राज्यों से आए हुए हजारों श्रमिक काम करते हैं. लेकिन उन्हें एलपीजी गैस सिलेंडर नहीं मिल रहा है. वह कहीं से सिलिंडर लेने की कोशिश करते भी हैं, तो उन्हें बहुत बड़ी रकम चुकानी पड़ रही है. इसलिए यह श्रमिक अपने गांव वापस जाना चाहते हैं. कटारिया की मांग है कि कृपया कुछ ऐसा निर्णय लें जिससे यह श्रमिक अपने गांव नहीं जाए, क्योंकि एक बार अगर वे गांव चले गए तो वापस आने में बहुत समय लगेगा. इससे राज्य में व्यापार बाधित होगा साथ ही राज्य की प्रगती पर भी बुरा असर पड़ेगा. श्रमिकों को एलपीजी सिलिंडर नहीं मिल पाने से महाराष्ट्र राज्य की प्रगति नहीं रुके इस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भी अनुरोध करते हुए महावीर कटारिया ने कहा है कि भोजन जैसी बुनियादी सुविधा के अभाव और आर्थिक बोझ के कारण श्रमिकों ने अब अपने गांवों की ओर पलायन करना शुरू कर दिया है. यदि यह पलायन नहीं रुका, तो आने वाले समय में महाराष्ट्र के उद्योगों और विकास कार्यों की गति धीमी पड़ सकती है. प्रवासी श्रमिकों के लिए बिना राशन कार्ड / स्थानीय पते के भी उचित मूल्य पर छोटे या अस्थाई एलपीजी सिलेंडर की व्यवस्था की जाए.  
 
श्रमिकों के लिए अलग फॉर्मेट तैयार किया जाए
सरकार से हमारी यही मांग है कि इन श्रमिकों को गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएं. जो श्रमिक हैं, उनके लिए कुछ अलग व्यवस्था की जानी चाहिए. जो कोई भी काम के लिए महाराष्ट्र में आए हैं, उन्हें आधार कार्ड जैसे पहचान पत्र के आधार पर दो-तीन महीने में कम से कम एक सिलेंडर तो दिया ही जाना चाहिए. इन श्रमिकों के लिए ऐसा कोई फॉर्मेट (प्रारूप) तैयार किया जाए, जिससे उनका काम आसान हो सके और वे श्रमिक भी सुचारू रूप से महाराष्ट्र में टिक सकें, वे यहां से पलायन न करें. हम सरकार से भी यह अपेक्षा करते हैं कि इस पर कोई निर्णय लेकर ठोस कार्रवाई की जाए, जिससे मजदूरों की परेशानियां कम हों. - महावीर कटारिया, वरिष्ठ कपड़ा व्यापारी, पुणे  
 
दस्तावेज के अभाव में सिलेंडर नहीं मिल रहा
गौरतलब है कि न सिर्फ पुणे बल्कि महाराष्ट्र में उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और अन्य राज्यों के जो लोग रह रहे हैं, उनके पास गैस सिलिंडर लेने के लिए उचित कार्ड (दस्तावेज) नहीं हैं. इस कारण उन्हें सिलेंडर नहीं मिल रहा है. यदि वे कहीं किसी से सिलेंडर लेने का प्रयास भी करते हैं, तो उन्हें इसके लिए बहुत अधिक कीमत चुकानी पड़ती है, जिसे वहन करना इन श्रमिकों के बस में नहीं है. स्वाभाविक रूप से, इन लोगों के बीच ऐसी मानसिकता बन गई है कि अब सिलेंडर मिलना मुमकिन नहीं है. भविष्य में स्थिति क्या होगी, इसका कोई ठिकाना नहीं है. इसलिए, अब हमें अपने गांव वापस लौट जाना चाहिए. ऐसी मनस्थिति में ये श्रमिक स्थलांतर करने का विचार कर रहे हैं.