देसी गाय प्रशिक्षण केंद्र को अजितदादा पवार का नाम देने मंजूरी

महाराष्ट्र कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान परिषद की 122वीं बैठक में लिया गया महत्वपूर्ण निर्णय

    04-Mar-2026
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पुणे, 3 मार्च (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)
कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने बताया कि, इस केंद्र का नामकरण अजीतदादा पवार देसी गाय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र रखने को मंजूरी मिल गई है. बताया जाता है कि, देसी गाय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र महात्मा फुले कृषि वेिशविद्यालय, राहुरी के अंतर्गत कार्यरत है. यहां पर स्वदेसी गायों के पालनपोषण एवं संरक्षण के साथ-साथ दूध एवं दुग्ध उत्पादों, गौमूत्र एवं गोबर प्रसंस्करण पर अनुसंधान किया जाता है. बैठक में इनकी रहीं उपस्थिति महाराष्ट्र कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान परिषद की 122वीं बैठक रविवार (2 फरवरी) को पुणे के भोसलेनगर में आयोजित की गई. इसमें निम्नलिखित निर्णय लिए गए. परिषद कार्यालय में आयोजित इस बैठक में कृषि शिक्षा, अनुसंधान और प्रौद्योगिकी प्रसार से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई. इस अवसर पर प्रधान सचिव विकास चंद्र रस्तोगी, कृषि आयुक्त सूरज मांढरे, सचिव एवं कृषि परिषद की महानिदेशक वर्षा लढ्ढा-उंटवाल, उपाध्यक्ष तुषार पवार, कुलपति डॉ. संजय भावे, कुलपति डॉ. इंद्र मणि, कुलपति डॉ. विला खर्चे, कुलपति डॉ. शरद गडाख, गैर-सरकारी सदस्य विनायक काशिद, कृषि वैज्ञानिक विनायक कातकड़े, उप सचिव प्रतिभा पाटिल, डॉ. मंगल कदम, डॉ. प्रशांत बोडके और अन्य प्रमुख अधिकारी उपस्थित थे. 56 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जाएंगे इस बैठक में सरकार को देसी गाय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र को सुदृढ़ बनाने के लिए आवश्यक शेष व्यय के लिए प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त करने की सिफारिश की गई. तदनुसार, इस केंद्र के लिए गौशाला , सिलो बंकरों, बायोगैस इकाई, खाद और भंडारण इकाई, प्रयोगशाला, किसान छात्रावास, प्रशिक्षण कक्ष, साथ ही प्रशासनिक और आवासीय भवनों के निर्माण हेतु चरण-2 के तहत 56 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जाएंगे. कृषि मंत्री भरणे ने कहा, दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार की परिकल्पना पर आधारित एक अभिनव स्वदेशी गाय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया गया है. यह केंद्र स्वदेशी गायों की मूल्यवान और दुर्लभ नस्लों के संरक्षण, उनके दूध उत्पादन में वृद्धि और किसानों को सतत कृषि के लिए मार्गदर्शन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर काम कर रहा है. उनके नाम पर इस केंद्र का नाम रखा जाएगा और उनके कार्यों और स्मृति को संजोकर रखा जाएगा.