कभी-कभी विधान परिषद काे स्थगित करने का निर्णय लेते हैं : नीलम गाेर्हे

    04-Mar-2026
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neelam 
 
राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच दिखने वाली तल्खी और सदन में हाेने वाला शाेरशराबा क्या वाकई उतना गंभीर है, जितना टीवी स्क्रीन पर नजर आता है? विधान परिषद की उपसभापति नीलम गाेर्हे के एक चाैंकाने वाले खुलासे ने संसदीय लाेकतंत्र के पीछे चलने वाले मैनेजमेंट की परतें खाेल दी हैं. नासिक में आयाेजित विश्व मराठी सम्मेलन के दाैरान उन्हाेंने स्वीकार किया कि सदन में हाेने वाले हंगामे और वाॅकआउट की पटकथा अक्सर पहले से ही तय हाेती है.नीलम गाेर्हे ने बताया कि सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने के लिए सत्ता और विपक्ष के बीच पर्दे के पीछे एक अदृश्य तालमेल हाेता है.उन्हाेंने कहा, हमें सुबह ही पता चल जाता है कि विपक्ष कितनी देर तक हंगामा करेगा.
 
हम उनसे यह तक पूछते हैं कि आप कितनी देर के लिए सदन का त्याग (वाॅकआउट) करेंगे? उन्हाेंने इसकी तुलना शतरंज की बिसात सकरते हुए कहा कि जैसे दाे खिलाड़ी अपनी रणनीतियां चलते हैं, वैसे ही सदन में भी एक गुप्त व्याकरण काम करता है.कभीकभी यह पहले से तय हाेता है कि अध्यक्ष 15 मिनट इंतजार करेंगे और फिर कामकाज शुरू हाेगा.निलंबन और माफी का सर्कल सदन में सदस्याें के निलंबन पर बाेलते हुए गाेरहे ने कहा कि कभी-कभी आवेश में आकर विधायक अपशब्द कह देते हैं. ऐसे में सत्ता पक्ष काे सख्त रुख अपनाना पड़ता है और अध्यक्ष काे अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत उन्हें 7 दिनाें के लिए निलंबित करना पड़ता है. उनके निजी ताैर पर आकर माफी मांगने पर निलंबन घटाकर 3 दिन कर दिया जाता है.