‌‘लाडकी बहीण योजना' का प्रभाव चुनाव तक सीमित नहीं

पोल पंडित द्वारा प्रस्तुत अध्ययन से सामने आए निष्कर्ष : समूचे राज्य की महिला लाभार्थियों से संवाद साधा

    05-Mar-2026
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शिवाजीनगर, 4 मार्च (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)

महाराष्ट्र में पिछले विधानसभा चुनावों से पहले शुरु की गई ‌‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिण योजना' (मुख्यमंत्री मेरी लाडली बहन योजना) के बाद महिलाओं की उनके परिवार और आर्थिक निर्णयों में भागीदारी बढ़ी है. एक सर्वेक्षण से पता चला है कि, 79% महिलाएं मतदान करते समय योजना को प्राथमिकता देती हैं, जबकि 17% इसे प्राथमिकता नहीं देती हैं. पुणे की पोल पंडित संस्था ने समूचे राज्य की महिला लाभार्थियों से संवाद कर लाडकी बहिण योजना के विभिन्न प्रभावों का अध्ययन किया, जिसकी रिपोर्ट 24 फरवरी को जारी की गई है. बताया गया है कि, देशभर में हुए विभिन्न चुनावों और उसके बाद महाराष्ट्र में हुई विधानसभा चुनावों के दौरान सरकारी योजनाओं के लाभार्थी और उनके माध्यम से बनने वाली मतपीठ का एक नया रुझान दिखाई देता है. इस दौर में हाल ही में सबसे अधिक चर्चा लाडकी बहीण योजना की रही. ‌‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण' योजना महायुति सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है, जो अब डेढ़ वर्ष से अधिक समय से चल रही है. सत्तारूढ़ पार्टी इसे महिला सशक्तिकरण का मार्ग मानती है, जबकि विपक्ष इसे चुनाव जीतने का साधन बताते हैं. इस राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से परे जाकर, पुणे की पोल पंडित संस्था ने इस मूलभूत प्रश्न: क्या यह योजना वास्तव में महिलाओं के जीवन में कोई महत्वपूर्ण बदलाव ला रही है..? का उत्तर खोजने के लिए राज्यव्यापी सर्वे क्षण और विश्लेषण किया. 5,326 महिलाओं से प्रत्यक्ष संवाद महाराष्ट्र की लोकसभा चुनावों में सामने आए परिणामों को मुख्यतः मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण योजना से विधानसभा में बदलाव का श्रेय दिया जाता है. इसी पृष्ठभूमि में, योजना के आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव का गहन अध्ययन पोल पंडित संस्था ने राज्यव्यापी सर्वेक्षण के माध्यम से किया. राज्य के 7 प्रशासनिक विभागों के 139 विधानसभा क्षेत्रों में 5,326 महिलाओं से प्रत्यक्ष संवाद कर यह सर्वेक्षण किया गया. इसका उद्देश्य योजना के वास्तविक प्रभावों को समझना था. सर्वेक्षण में स्पष्ट हुआ कि, 37% महिलाएं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, 31% उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, 16% पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार और 13% महिलाएं महायुति सरकार को योजना का श्रेय देती हैं.  
 
सर्वेक्षण के महत्वपूर्ण निष्कर्ष

 सर्वेक्षण के अनुसार, 56% महिलाओं को योजना का हफ्ता नियमित मिलता है, जबकि 44% महिलाओं का कहना है कि, उन्हें यह नियमित नहीं मिलता. 81% महिलाएं योजना के पैसे खर्च करते समय किसी से पूछती नहीं हैं, जबकि 19% महिलाएं अपने घर के जिम्मेदार पुरुष से पूछकर खर्च करती हैं. 38% महिलाएं पैसे घरेलू खर्च में, 23% महिलाएं पैसे अपने लिए, 22% महिलाएं पैसे बच्चों की शिक्षा में, 5% महिलाएं बचत तथा 4% महिलाओं ने उन पैसों से छोटा उद्योग शुरू किया है.  
 
लाभार्थियों की प्रतिक्रिया
 59% महिलाओं का कहना है कि, योजना से उनके ऊपर आर्थिक दबाव कम हुआ है, जबकि 31% महिलाओं के अनुसार पैसों से कुछ हद तक आर्थिक दबाव कम हुआ. 69% महिलाओं का कहना है कि योजना से उनके परिवार और आर्थिक निर्णयों में भागीदारी बढ़ी, जबकि 23% महिलाओं ने कहा कि परिवार में कोई बदलाव नहीं आया. 63% महिलाएं मतदान करते समय अपना निर्णय खुद लेती हैं, जबकि 37% अभी भी घर के जिम्मेदार पुरुष से पूछकर मतदान करती हैं.