पुणे, (स्वप्निल बापट), 4 मार्च जब हमें पता चला कि, दुबई से विमान सेवाएं स्थगित कर दी गई हैं, तब हम बहुत डर गए थे. असल में क्या हुआ है और हमें कितने समय तक वहां फंसे रहना होगा, इसका कोई अंदाजा नहीं था. लेकिन,जब हम बेंगलुरु हवाई अड्डे पर उतरे, तब जाकर हमारी जान में जान आई. डर से शुरू हुआ, यह 100 घंटों का सफर सुकून पर आकर खत्म हुआ, इन शब्दों में पुणे के प्रसिद्ध उद्यमी और सामाजिक कार्यकर्ता द्वारका जालान ने अपनी भावनाएं व्यक्त कीं. ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध की स्थिति के कारण जालान 28 फरवरी से दुबई में फंसे हुए थे. मंगलवार (3 मार्च) की रात वे सुरक्षित पुणे लौट आए. उस पूरे घटनाक्रम, अपनी मानसिक स्थिति और अनुभवों को उन्होंने आज का आनंद के साथ साझा किया. जालान ने बताया, हमारी दुबई-पुणे फ्लाइट 28 फरवरी की शाम 5.40 बजे की थी. लगभग 2 घंटे विलंब का पता चलने के बाद जब हम एयरपोर्ट पहुंचे तो वहां जाना कि फ्लाइट कैंसिल हो गई है, और एयरपोर्ट तुरंत खाली करवाके हमें बाहर जाने के निर्देश दिए गए, बिना किसी सहायता के हम फिर अपने होटल पर पहुंचे, किंतु स्थिति बिगड़ने लगी थी.यह होटल हमारे मित्र सुनील खंडेलवाल का होने से हमें सभी सुविधाएं आसानी से मिल गईं. धीरे धीरे अन्य पुणेकर भी इसी होटल में आ गए. एयरपोर्ट बंद,कोई भी फ्लाइट नहीं चल रही थी. कोई कहता था कि, ओमान से फ्लाइट उड़ रही है, कभी आबू धाबी से फ्लाइट उड़ने की खबरें आ रही थी. कुल मिलाकर हर कोई भ्रमित था. इस बीच अन्य कोई रास्ता ना देखते हुए हमने भी मस्कत (ओमान) से वीसा के प्रति सदस्य 8,000 रुपये और टिकट के मुंह मांगे दाम के साथ टिकटें बुक कीं. फिर पता चला वहां भी बॉर्डर पर हजारों की भीड़ है, बेहद तकलीफ है और असामान्य स्थितियां हैं. एक फ्लाइट पता चला की फ्लाई दुबई कम्पनी जो दुबई-कोची उड़ने वाली थी. उसकी टिकटें भी बुक कीं. हम में से कई अभी तक एयरपोर्ट पर फंसे थे क्योंकि फ्लाइट कैंसिल हो गई. हम टिकटें बुक करते और कैंसिल करते बस.केवल चारों ओर निराशा और कुंठा का भाव था. किंतु इस बीच दुबई शांत था, सामान्य था, सब कुछ व्यवस्थित था. किसी जनरल मार्केट में ना एक पैसा अयादा मांगा, ना किसी चीज की कोई कमी थी. हमे भारत से ही वहां बम गिरने की सनसनीखेज खबरें मिलती थीं, जो डरावनी होती थी, चिंतित करनेवाली थी, पर ऐसा कुछ भी नहीं थीं. तभी हमारे विकास अग्रवाल (VT Travelers) ने दुबई-बेंगलुरु की स्पेशल फ्लाइट की खबर दी. हम 7 लोगों ने तुरंत फ्लाइट बुक की और हम पहुंच गए अपने देश. जैसे ही फ्लाइट बेंगलुरु एयरपोर्ट पर उतरी, फ्लाइट के सारे यात्रियों ने जोश भरे स्वर में भारत माता की जय के नारे लगाकर वातावरण को भावभीना कर दिया. विमान कंपनियां भुलावे के खेल बंद करें आज स्पाइस जेट की कुछ फ्लाइटें उड़ने की घोषणा हुई किंतु वे सारी फ्लाइटें कैंसिल होने की बात अभी मेरे मित्र श्याम अग्रवाल ने दुबई से मुझे बताई. मेरा अनुरोध है विमान कंपनियों से कि वे भुलावे के खेल बंद करें, आप अपनी वेिशसनीयता खो रहे हैं. मेरी समझ में फिलहाल एमिरेट्स ही एक कंपनी है जो वेिशसनीय है.
यात्रियों की तकलीफ के बारे में कौन सोचेगा..?
दुबई के होटल में परेशान और चिंतित बैठे हुए हमने 3 बार स्पाइस जेट से बुकिंग की और हर बार उन्होंने कैंसिल की. एक सवाल मन में हर बार आता रहा कि, जब फ्लाइट उड़ानी ही नहीं थी तो बुकिंग क्यों ली..? केवल पैसा इक्कट्ठा करने के लिए..? यात्रियों की तकलीफ के बारे में कौन सोचेगा..?
मुख्य अंतर दुबई एयरपोर्ट पर एमिरेट्स वालों ने पूरा साथ सह्योग किया सामान के अयादा वजन के बारे में किंतु बेंगलुरु आते ही इंडिगो ने अयादा वजन के लिए हमसे पैसे मांगे और लिए भी.
इस बीच हजारों लोग अभी भी दुबई एवं मस्कट में हैं, अपनी पारी का इंतजार कर रहे हैं. कइयों के पास पैसे खत्म हो गए हैं, कई लंगर या अन्य तरीकों से कुछ अच्छा होने की राह देख रहे हैं.