अहिंसा ही मानवता व प्रकृति के संतुलन का आधार : डॉ. राजमल

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर श्रुतदीप रिसर्च फाउंडेशन द्वारा SHRUT TALK का आयोजन

    05-Mar-2026
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 पुणे, 4 मार्च (आ. प्र.)

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर शनिवार (28 फरवरी) को श्रुतदीप रिसर्च फाउंडेशन द्वारा SHRUT TALK का आयोजन किया गया. इस अवसर पर डॉ. श्री राजमलजी जैन (Space Scientist) और नरेंद्र गोइदानी (Life coach and Motivational Speaker) के व्याख्यान का आयोजन किया गया था. डॉ. राजमल जैन ने अपने ‌‘अहिंसा- एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण' इस विषय पर उद्बोधन में वर्तमान समय में बढ़ती हिंसा पर चिंता व्यक्त करते हुए मांसाहार को इसके प्रमुख कारणों में से एक बताया. उन्होंने कहा कि, केवल पेट भरने के लिए प्रतिदिन असंख्य पशुओं की हत्या की जा रही है, जिसका दुष्प्रभाव नैतिक मूल्यों के साथ-साथ पर्यावरण और वैेिशक तापमान (ग्लोबल वार्मिंग) पर भी पड़ रहा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि, पशु हत्या और मांसाहार पर्यावरण असंतुलन के महत्त्वपूर्ण कारण हैं, आज भूकंप और बाढ जैसे प्रकोप बढ रहे हैं. अपने विचारों में उन्होंने भगवान महावीर की अहिंसा की वाणी को आज के समय में अत्यंत प्रासंगिक बताते हुए कहा कि अहिंसा ही मानवता और प्रकृति के संतुलन का आधार है. श्री नरेंद्र गोइदानी ने ‌‘व्यवसाय में जैन तत्त्वों का पालन' इस विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए. उन्होंने बताया कि एक व्यवसायी किस प्रकार जैन सिद्धांतों को अपने उद्यम में आत्मसात कर सकता है. यदि हमारे भीतर कुछ देने की भावना होगी, तभी वास्तविक समृद्धि प्राप्त होगी. उन्होंने क्रोध और असहिष्णुता को भी अहिंसा से जोड़ते हुए कहा कि इससे दूसरे व्यक्ति की भावनाएं आहत होती हैं. यह भी सूक्ष्म हिंसा का एक रूप है. इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष राजेंद्र बाठिया, कार्याध्यक्ष डॉ. वर्धमान जैन, उपाध्यक्ष दीपक शाह, सचिव नरेंद्र छाजेड़, कोषाध्यक्ष किशोर ओसवाल, प्रमुख मार्गदर्शक डॉ. जितेंद्र शाह तथा प्रबंधन समिती सदस्य ललित गुंदेशा, रमेश गांधी और अदिति शहा आदि उपस्थित थे. कार्यक्रम के लिए उपस्थित सभी श्रोताओं ने अहिंसा, नैतिकता और मूल्य आधारित जीवन को अपनाने का संकल्प लिया.