शिवाजीनगर, 5 मार्च (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) पश्चिमी भारत में बैरियट्रिक (वजन घटाने) सर्जरी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए, पुणे शहर में रूबी हॉल क्लीनिक में पहली रोबोटिक रिविजनल बैरियट्रिक सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न की गई. यह जटिल सर्जरी फरवरी- 2026 में डॉ.केदार पाटिल (रोबोटिक बैरियट्रिक और एडवांस्ड लैप्रोस्कोपिक सर्जन) द्वारा एक बहु-विषयक टीम के साथ की गई. लगभग डेढ़ साल पहले मरीज की किसी अन्य केंद्र में लैप्रोस्कोपिक स्लीव गैस्ट्रोक्टॉमी सर्जरी हुई थी. इसके बाद उन्हें मध्यम दर्जे का हायटल हर्निया, एसिड रिफ्लक्स और पित्ताशय की पथरी जैसी गंभीर समस्या हो गई. उन्नत रोबोटिक तकनीक का उपयोग करके स्लीव गैस्ट्रोक्टॉमी को रूक्स-एन-वाई गैस्ट्रिक बाईपास सर्जरी में परिवर्तित किया गया, साथ ही हायटल हर्निया की मरम्मत और कोलेसिस्टेक्टॉमी भी की गई. सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न हुई और मरीज की हालत अच्छी है. मरीज को स्थिर हालत में बिना किसी जटिलता के अस्पताल से छुट्टी दे दी गई. उन्होंने बैरियट्रिक प्रोटोकॉल के अनुसार मुंह से खाना शुरू कर दिया है और फॉलो-अप में उनकी स्थिति अच्छी है. एसिडोसिस से संबंधित शिकायतें कम हो गई हैं और अगले कुछ महीनों में दीर्घकालिक चयापचय और लक्षणात्मक सुधार की उम्मीद है. ऑपरेशन के बाद की सुचारू प्रक्रिया रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी के फायदों को उजागर करती है. जिसमे कम दर्द,न्यूनतम रक्तस्राव, तेजी से रिकवरी और अधिक सटीकता है. इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के बारे में बात करते हुए, डॉ. परवेज ग्रांट (अध्यक्ष और मुख्य हृदयरोग विशेषज्ञ) ने कहा, बैरियट्रिक संबंधी सर्जरी में रिविजनल बैरियट्रिक प्रक्रियाएं सबसे चुनौतीपूर्ण प्रक्रियाओं में से एक हैं. इन्हें रोबोटिक रूप से करना हमारे संस्थान की विशेषज्ञता और बुनियादी ढांचे की गहराई को दर्शाता है. डॉ.केदार पाटिल (रोबोटिक बेरियट्रिक और एडवांस्ड लैप्रोस्कोपिक सर्जन) ने कहा कि,रोबोटिक तकनीक शल्य चिकित्सा की सटीकता बढ़ाती है.जटिलताओं को कम करती है और जटिल मामलों में रोगी के ठीक होने की गति में सुधार करती है. डॉ.पाटिल ने इस सफल सर्जरी के लिए डॉ.साइमन ग्रांट, डॉ. विद्याचंद्र गांधी और डॉ. राजेंद्र पंधारे के समन्वित प्रयासों के प्रति आभार व्यक्त किया.
बैरियट्रि क उपचारों की बढ़ती आवश्यकता
रिवीजन बेरियट्रिक सर्जरी, प्राइमरी बेरियट्रिक सर्जरी की तुलना में अपेक्षाकृत दुर्लभ और अधिक जटिल होती है. वेिश स्तर पर, लगभग 10-15% बैरियट्रिक सर्जरी पुनरीक्षण के लिए की जाती हैं,और पिछले दशक में वजन घटाने की सर्जरी की बढ़ती संख्या को देखते हुए, इन सर्जरी की संख्या भी बढ़ रही है. भारत में मोटापे की दर भी तेजी से बढ़ रही है, शहरी क्षेत्रों में वयस्कों में मोटापे का प्रचलन 30-40% तक पहुंच गया है, जिससे बैरियट्रिक उपचारों की बढ़ती आवश्यकता हो रही है. प्राथमिक सर्जरी के बाद, लगभग 15% रोगियों का वजन विभिन्न कारणों से दोबारा बढ़ सकता है, जिसके लिए पुनरीक्षण सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है. अधिकांश पुनरीक्षण सर्जरी लैप्रोस्कोपिक विधि से की जाती हैं.
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