युद्ध की वजह से ड्राई फ्रूट्स व तेल की कीमतों में उछाल

सूखा मेवा 5 प्रतिशत, तो खाद्य तेल 5 रुपये महंगा हुआ लाखों रुपयों के कृषि उत्पाद बंदरगाहों पर अटके

    06-Mar-2026
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गुलटेकड़ी, 5 मार्च (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)
इजरायल और ईरान के बीच चल रहें युद्ध और रमजान के कारण बढ़ी हुई मांग की वजह से सूखे मेवे की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है. खासकर हरा पिस्ता,खारा पिस्ता,खजूर और काली किशमिश की औसतन दरों में दो से पांच प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है. हालांकि, देश में फिलहाल सूखे मेवे का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है, लेकिन यदि युद्ध का समय और बढ़ा,तो सभी प्रकार के सूखे मेवों की कीमतों में और इजाफा होने की संभावना जताई जा रही है. दूसरी ओर, युद्ध के कारण भारतीय कृषि उत्पादों के निर्यात पर भी बुरा असर पड़ा है और फलों का निर्यात रुक गया है.
विभिन्न देशों से सूखे मेवे की आवक
पुणे के मार्केटयार्ड में विभिन्न देशों से सूखे मेवे की आवक होती है. हरा पिस्ता, खारा पिस्ता और विभिन्न प्रकार के खजूर बड़ी मात्रा में ईरान से भारत आयात किए जाते हैं. ईरान दुनिया के प्रमुख पिस्ता उत्पादक देशों में से एक है. वहां के उत्पादन, प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) और निर्यात व्यवस्था पर युद्ध का सीधा असर पड़ा है, जिससे सप्लाई चेन बाधित हुई है. विशेषज्ञों का मानना है कि, यदि युद्ध एक महीने से अधिक समय तक खिंचता है, तो सूखे मेवे की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है. फिलहाल होलसेल बाजार की दरों में मामूली बढ़ोतरी हुई है. व्यापारियों का कहना है कि, रमजान के महीने में खाड़ी देशों,विशेष रूप से सऊदी अरब में विभिन्न प्रकार के फलों की मांग रहती है.भारत से होने वाले कुल निर्यात का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा इसी क्षेत्र में जाता है. केला, अंगूर, प्याज और चावल की भी भारी मांग विदेशों में रहती है. वर्तमान में युद्ध के कारण बंदरगाह बंद हैं, जिससे निर्यात पूरी तरह ठप हो गया है.निर्यात रुकने की वजह से भारतीय किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.
 
तेल के होलसेल बाजार भाव
(प्रति डिब्बा रुपयों में)
मूंगफली ------- 2,750 रुपये
सोयाबीन ------ 2,300 रुपये
सूरजमुखी ----- 2,480 रुपये
पाम तेल ------ 2,350 रुपये
कॉटनसीड ----- 2,200 रुपये
 
ड्राई फ्रूट्स कीमतें
खजूर 80-250
बादाम 850-1200
काजू 850-1200
अंजीर 850-1200
चारोली 1800 -2200
पिस्ता 1900-2600
केसर 280 रुपये प्रति ग्राम.
 

खाद्य तेलों के मामले में भी स्थिति चिंताजनक
वर्तमान में पुणे के बाजारों में तेल की कीमतों में प्रति किलो 5 से 7 रुपये की बढ़ोतरी हुई है.हमारे यहां पर मुख्य रूप से मूंगफली,सोयाबीन, सूरजमुखी, कॉटनसीड, पाम ऑयल की मांग अधिक रहती है. व्यापारियों का मानना है कि, युद्ध की स्थिति के कारण हुई यह मूल्य वृद्धि केवल अस्थायी है. युद्ध के डर से लोगों ने एहतियात के तौर पर अतिरिक्त स्टॉक जमा करना शुरू कर दिया है. मांग में इस अचानक उछाल के कारण भी कीमतें बढ़ी हैं.  
 
किसानों और व्यापारियों को भारी नुकसान
मुंबई बंदरगाह पर केले के 250 से 300, अंगूर के 100 और अन्य माल के 350 से 400 कंटेनर फंसे हुए हैं. इसके अलावा, केले और अंगूर के 500 से 600 कंटेनर और लगभग 500 अन्य कंटेनर रास्ते में ही रुके हुए हैं. केले के एक कंटेनर की कीमत 8 से 9 लाख रुपये, जबकि अंगूर के एक कंटेनर की कीमत 24 से 25 लाख रुपये होती है.भारत आनेवाले सेब,कीवी और खजूर के 800 से 900 कंटेनर ईरान के अब्बास बंदरगाह पर फंसे हुए हैं.वहां बिजली न होने के कारण फलों के खराब होने का डर बना हुआ है.निर्यात रुकने की वजह से घरेलू बाजार में केले और अंगूर की कीमतों में गिरावट आई है, जिससे किसानों और व्यापारियों को भारी नुकसान हुआ है. इस माल के निर्यात के लिए विशेष प्रकार के कंटेनरों की आवश्यकता होती है. इन कंटेनरों की लागत भी बहुत अधिक होती है, इसलिए लाखों रुपये के नुकसान की आशंका बनी हुई है. - सत्यजीत झेंडे, गुरुदत्त इंपेक्स, मुंबई.
 
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आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई तो परिस्थिति बिगड़ेगी
युद्ध शुरू होने के बाद से सभी खाद्य तेलों की कीमतों में प्रति किलो लगभग 5 से 7 रुपये की वृद्धि हुई है. हमारे यहां कंपनियों के पास डेढ़-दो महीने का स्टॉक उपलब्ध हो सकता है, इसलिए तब तक कोई बड़ी समस्या नहीं आएगी. आमतौर पर इंडस्ट्री के नियम यही हैं कि वे लगभग 60 दिनों का स्टॉक अपने पास रखते हैं. हालांकि, रोटेशन में जो माल बाहर से आने वाला है, यदि वह आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई, तो स्टॉक कम हो जाएगा और कीमतें और बढ़ सकती हैं. आयात होने वाले तेल के टैंकरों के बीमा और परिवहन की भी समस्या आ रही है. यदि युद्ध रुक जाता है और सब कुछ फिर से सामान्य हो जाता है, तो कीमतें पुराने स्तर पर वापस आ जाएंगी और आगे नहीं बढ़ेंगी. लेकिन यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो किल्लत की स्थिति पैदा हो सकती है. - रायकुमार नहार, तेल व्यापारी,मार्केटयार्ड
 
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परिवहन लागत और डॉलर बढ़ने से कीमतें प्रभावित
 वर्तमान में ईरान में युद्ध स्थिति बनने से हालात खराब है. हालांकि, बाजार में अगले चार महीनों का सूखे मेवे का स्टॉक उपलब्ध है, इसलिए कीमतों में अचानक भारी बढ़ोतरी नहीं होगी; लेकिन यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो दरें बढ़ सकती हैं. फिलहाल हरा पिस्ता, खारा पिस्ता, खजूर और काली किशमिश की कीमतों में दो से पांच प्रतिशत की वृद्धि देखी जा रही है. वर्तमान में शिपिंग कंटेनरों का भाड़ा (ऋीशळसहीं) बढ़ने और डॉलर की दरों में उछाल आने के कारण माल की कीमतों में थोड़ी तेजी है. औसतन प्रति किलो 20 से 25 रुपये की बढ़ोतरी हुई है. पिस्ता मुख्य रूप से ईरान से आता है. वहां कंटेनरों की कमी होने के कारण भी कीमतों में थोड़ी वृद्धि महसूस हो रही है.परिवहन लागत और डॉलर की बढ़ी हुई कीमतों ने सभी ड्राई फ्रूट्स के आयात को प्रभावित किया है. वर्तमान में स्टॉक पर्याप्त है, लेकिन नया माल आने में थोड़ी देरी हो सकती है. 10 तारीख के बाद लगभग रिटेल ग्राहकों की खरीदारी शुरू हो जाएगी, क्योंकि 20 तारीख तक रोजे (रमजान) हैं. फिलहाल खजूर की मांग अच्छी है. लेकिन कुछ जगहों पर खजूर का स्टॉक ब्लॉक हो जाने के कारण वहां से फिलहाल आयात नहीं हो पा रहा है. इसी वजह से खजूर के दामों में लगभग 5 से 10 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है. - नवीन गोयल, मे. नवीन पेढ़ी , सूखा मेवा व्यापारी,मार्केटयार्ड
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