पुणे, 6 मार्च (आ.प्र.) आशा वर्कर्स, पार्टटाईम परिचारक, आंगनवाडी सेविकाएं और आंगनवाडी मदतनीस कर्मचारियों के लिए भविष्य निर्वाह निधि पेन्शन योजना लागू है. इसलिए, पुणे जिला परिषद अक्टूबर 1986 से मार्च 2024 तक की पीएफ की राशि 1084 करोड 13 लाख, 74 हजार , 635 रुपये बकाया राशि इन कर्मचारियों के पीएफ अकाउंट्स में अगले 60 दिनों में जमा करे, यह आदेश भविष्य निर्वाह निधि संगठन (पुणे विभाग) द्वारा दिया गया है. भविष्य निर्वाह निधि संगठन (पुणे विभाग) ने एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड्स एंड मिसलेनियस प्रोविजधस एक्ट 1952 के सेक्शन 7 के तहत जिला परिषद, पुणे के खिलाफ कानूनी प्रोविडेंट फंड प्रोविजधस का पालन न करने के बारे में एक जांच पूरी कर ली है. यह जांच ईपीएफओ इंस्पेक्टर्स की एक टीम की रिपोर्ट के आधार पर शुरू की गई थी, जिन्होंने देखा कि एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड और एम्प्लॉई पेंशन स्कीम के तहत कानूनी फायदे जिला परिषद, पुणे द्वारा रखे गए कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कुछ कैटेगरी के कर्मचारियों को नहीं दिए जा रहे थे, जैसे कि इंटीग्रेटेड चाइल्ड डेवलपमेंट स्कीम्स और नेशनल हेल्थ मिशन जैसी सरकारी वेलफेयर स्कीम्स के तहत काम करने वाले कर्मचारी, इन वर्कर्स की कैटेगरी में आशा वर्कर्स, परिचारक, आंगनवाड़ी सेविकाएं और आंगनवाड़ी मदतनीस शामिल हैं. बताया जाता है कि उन्हें सीधे कंसोलिडेटेड सैलरी पर रखा गया था. इंस्पेक्शन रिपोर्ट से पता चला कि जिला परिषद इन कर्मचारियों के लिए सही प्रोविडेंट फंड कंट्रीब्यूशन भेजने में फेल रही, जिससे उन्हें अक्टूबर 1986 से मार्च 2024 तक के समय के लिए किए गए कानूनी सोशल सिक्योरिटी से वंचित होना पड़ा. कार्रवाई के दौरान किए गए रिकॉर्ड और सब्मिशन की जांच करने के बाद, सक्षम अधिकारी ने 9015 कर्मचारियों के लिए 1084 करोड़ 13 लाख 74 हजार 635 रुपये का प्रोविडेंट फंड बकाया तय किया. जिला परिषद पुणे को 2 मार्च को यह आदेश जारी किया गया है की, 60 दिनों के अंदर बकाया राशि जमा करने का निर्देश दिया गया है. यह आदेश रीजनल प्रोविडेंट फंड कमिश्नर (वन) अमित वशिष्ठ ने दिया है. तय समय के अंदर इस आदेश का पालन न करने पर जिला परिषद के खिलाफ ईपीएफ और एमपी एक्ट 1952 के नियमों के अनुसार आगे की कानूनी कार्रवाईकी जाएगी.यह भी पीएफ कार्यालय द्वारा स्पष्ट किया गया है. सेंटर फॉर इंडियन ट्रेड युनियन (सीटू) के पुणे जिला अध्यक्ष अजित अभ्यंकर और महासचिव वसंत पवार ने अंगनवाडी और अन्य कर्मचारियों का पक्ष रखा. सेंटर फॉर इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू ) के पुणे जिला अध्यक्ष अजित अभ्यंकर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के 2022 के फैसले के मुताबिक, आशा वर्कर्स, पार्ट-टाइम परिचारिका, आंगनवाड़ी वर्कर्स और आंगनवाड़ी मदतनीस को मिलने वाला मानधन नहीं बल्कि सैलरी है. इसलिए, पीएफ कमिश्नर के पास पीएफ जमा करने के बारे में ऑर्डर जारी करने और केस करने का अधिकार है. सीटू ने इन कर्मचारियों के न्याय के हक के लिए सरकार को लगातार ज्ञापन दिए हैं. प्रोविडेंट फंड कमिश्नर के सामने कानूनी मुद्दों के आधार पर दलीलें दीं. नतीजतन, पीएफ ऑफिस की तरफ से यह ऑर्डर दी गई है. इसलिए, अब देश में आंगनवाड़ी वर्कर्स, आशा वर्कर्स और दूसरे कर्मचारियों को पीएफ का फायदा मिलने का रास्ता साफ हो गया है.